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एटीएम से कैश निकालने को लेकर खड़ी हुई नई मुसीबत, ये जानकारी पढ़ें...इग्नोर की तो पछताएंगे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 10 Aug 2018 02:30 PM IST
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बैंक अकाउंट होल्डर्स के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है, खासकर एटीएम से कैश निकालने को लेकर। ये जानकारी जरूर पढ़ लें, वरना पैसे से हाथ धो बैठेंगे।
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कार्ड क्लोनिंग डिवाइस, इस चीज ने बैंक अधिकारियों और लोगों में हड़कंप मचाया हुआ है। कार्ड स्वैपिंग वाली जगह पर इसे लगाकर एटीएम की डिटेल लीक की जा रही है। जिसके जरिए कई लोगों के साथ ठगी के मामले सामने आए। चंडीगढ़ में साइबर एक्सपर्ट राजेश राणा के अनुसार, शातिर ठगों द्वारा यह डिवाइस एटीएम में लगाया जा रहा है। यह डिवाइस एटीएम कार्ड को क्लोन कर देती है और फिर आरोपी तक एटीएम कार्ड की जानकारी पहुंच जाती है।
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- फोटो : डेमो
क्या है एटीएम स्किमिंग
सरल भाषा में इसे एटीएम कार्ड का डाटा चोरी होना कहते हैं। एक छोटी सी डिवाइस जिसे स्किमर कहते हैं, इसका प्रयोग एटीएम का इस्तेमाल करने के दौरान कार्ड की जानकारी चुराने के लिए किया जाता है। जब एटीएम कार्ड को मशीन में स्वाइप किया जाता है तो स्किमर डिवाइस कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप पर स्टोर की गई जानकारी को कैप्चर कर लेता है।
सरल भाषा में इसे एटीएम कार्ड का डाटा चोरी होना कहते हैं। एक छोटी सी डिवाइस जिसे स्किमर कहते हैं, इसका प्रयोग एटीएम का इस्तेमाल करने के दौरान कार्ड की जानकारी चुराने के लिए किया जाता है। जब एटीएम कार्ड को मशीन में स्वाइप किया जाता है तो स्किमर डिवाइस कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप पर स्टोर की गई जानकारी को कैप्चर कर लेता है।
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इसे कैसे किया जाता है?
जालसाज मशीन में एटीएम कार्ड स्वाइप करने वाली जगह पर स्किमर डालते हैं। हालांकि यह पर्याप्त नहीं होता। इससे कार्ड में स्टोरेज जानकारी तो कॉपी होती है, मगर एटीएम के पिन पता नहीं चलता। ऐसे में देखा गया है कि जालसाज बैंक के अंदर एक कैमरा छिपाते हैं या फिर एटीएम के अंदर जाकर खड़े जाते हैं, ताकि उपभोक्ता का पिन का पता चल सके। विदेशों में तो हैकर्स बैंक कैमरा ही हैक कर लेते हैं। कई बार जालसाज उपभोक्ता को फोन कर बातों के जाल में फंसाकर पिन कार्ड नंबर ले लेते हैं। पिन कार्ड नंबर और स्किमर से जानकारी चुरा लेने के बाद अपराधी आनलाइन शापिंग और किसी दूसरे एटीएम से पैसे निकालकर काम तमाम कर लेते हैं।
जालसाज मशीन में एटीएम कार्ड स्वाइप करने वाली जगह पर स्किमर डालते हैं। हालांकि यह पर्याप्त नहीं होता। इससे कार्ड में स्टोरेज जानकारी तो कॉपी होती है, मगर एटीएम के पिन पता नहीं चलता। ऐसे में देखा गया है कि जालसाज बैंक के अंदर एक कैमरा छिपाते हैं या फिर एटीएम के अंदर जाकर खड़े जाते हैं, ताकि उपभोक्ता का पिन का पता चल सके। विदेशों में तो हैकर्स बैंक कैमरा ही हैक कर लेते हैं। कई बार जालसाज उपभोक्ता को फोन कर बातों के जाल में फंसाकर पिन कार्ड नंबर ले लेते हैं। पिन कार्ड नंबर और स्किमर से जानकारी चुरा लेने के बाद अपराधी आनलाइन शापिंग और किसी दूसरे एटीएम से पैसे निकालकर काम तमाम कर लेते हैं।
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ऐसे करते है ठगी
एटीएम कार्ड में एक मैग्नेटिक स्ट्रिप होती है, जिसमें अकाउंट से जुड़ी सभी जानकारी होती है। शातिर ठग स्कीमर नाम की एक डिवाइस का इस्तेमाल कार्ड क्लोनिंग के लिए करते हैं। ठग मशीन में कार्ड स्वाइप करने वाली जगह पर यह स्कीमर लगा देते हैं। यह डिवाइस एटीएम कार्ड की डिटेल स्वाइप कर लेती है जबकि दूसरी डिवाइस की-बोर्ड के पास लगाते हैं, जिसमें एक हिडन कैमरा लगा होता है, जो आपके पासवर्ड को कैद कर लेता है। अगर कोई भी व्यक्ति एटीएम मशीन से रुपये निकालने जाता है तो उनके एटीएम कार्ड का नंबर स्वाइप होते ही डिवाइस में दर्ज हो जाता है। ठग आपके एटीएम की हर मूमेंट की रिकार्डिंग को देखकर ठगी कर लेते हैं।
एटीएम कार्ड में एक मैग्नेटिक स्ट्रिप होती है, जिसमें अकाउंट से जुड़ी सभी जानकारी होती है। शातिर ठग स्कीमर नाम की एक डिवाइस का इस्तेमाल कार्ड क्लोनिंग के लिए करते हैं। ठग मशीन में कार्ड स्वाइप करने वाली जगह पर यह स्कीमर लगा देते हैं। यह डिवाइस एटीएम कार्ड की डिटेल स्वाइप कर लेती है जबकि दूसरी डिवाइस की-बोर्ड के पास लगाते हैं, जिसमें एक हिडन कैमरा लगा होता है, जो आपके पासवर्ड को कैद कर लेता है। अगर कोई भी व्यक्ति एटीएम मशीन से रुपये निकालने जाता है तो उनके एटीएम कार्ड का नंबर स्वाइप होते ही डिवाइस में दर्ज हो जाता है। ठग आपके एटीएम की हर मूमेंट की रिकार्डिंग को देखकर ठगी कर लेते हैं।