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बहादुर बेटा एशियन गेम्स में चमका, रचा वो इतिहास...मां-बाप हुए भावुक, इंडियन नेवी को भी नाज

Tue, 21 Aug 2018 05:15 PM IST
निरंजन कुमार राणा, अमर उजाला, यमुनानगर(हरियाणा)
निरंजन कुमार राणा, अमर उजाला, यमुनानगर(हरियाणा) Updated Tue, 21 Aug 2018 05:15 PM IST
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Asian Games 2018, Shooter Sanjeev Rajput Success Story
शूटर संजीव राजपूत
पिता पूड़ी का ठेला लगाते थे, लेकिन बेटे को एक अच्छे स्कूल में पढ़ाया। बेटे ने भी पिता के सपने को उड़ान दी और एशियन गेम्स में वो इतिहास रच दिया, देखती रह गई दुनिया।
Asian Games 2018, Shooter Sanjeev Rajput Success Story
sanjeev rajput
हम बात कर रहे हैं शूटर संजीव राजपूत की। 37 वर्षीय संजीव ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन में सिल्वर मेडल जीता है। यमुनानगर के जगाधरी से ताल्लुक रखने वाले संजीव के पिता कभी खाने का ठेला लगाते थे। नम आंखों से पिता कृष्ण कुमार कहते हैं कि उन्होंने अपने बेटे को बड़ी मुश्किलों में पाला था, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा था कि बेटा कामयाब जरूर होगा। मौजूदा वक्त में इंडियन नेवी में बतौर मास्टर चीफ पेटी ऑफिसर-2 और एक बेटी के पिता हैं।
Asian Games 2018, Shooter Sanjeev Rajput Success Story
शूटर संजीव राजपूत
संजीव की इस उपलब्धि पर इंडियन नेवी को भी नाज है। संजीव राजपूत अब से पहले एशियन गेम्स में एक रजत और दो कांस्य पदक जीत चुके हैं। संजीव ने 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भी संजीव राजपूत ने मेन्स 50 मीटर राइफल-3 पोजिशन में रिकॉर्ड 454.5 प्वाइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता था।  ग्लास्गो में 2014 कॉमनवेल्थ खेलों में सिल्वर मेडल जीता था। उन्होंने 2006 के मेलबर्न कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल पर निशाना साधा था।
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Asian Games 2018, Shooter Sanjeev Rajput Success Story
शूटर संजीव राजपूत
संजीव राजपूत भारत के लिए पिछले 14 साल से मेडल जीतते आ रहे हैं। इनके पिता सड़क किनारे ठेला लगाकर पूड़ी बेचा करते थे। पूड़ी बेच-बेचकर उन्होंने अपने बेटे संजीव राजपूत को अच्छे स्कूल में पढ़ाया। जिसका नतीजा रहा कि 18 साल की उम्र में वे नेवी में भर्ती हो गए और यहीं पर रहते हुए उनके अंदर 2001 से निशानेबाजी का शौक जागा। अमीरों का खेल होने के कारण घर पर उन्होंने कभी बूंदक नहीं चलाई थी, लेकिन नेवी में भर्ती होने के बाद उन्होंने इसमें हाथ अजमाया और सफल रहे।
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शूटर संजीव राजपूत
निशानेबाजी के गुर सिखने के बाद संजीव ने पहली बार 2004 में पाकिस्तान में पहला पदक जीता, फिर इसके बाद कभी उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा, वे एक के बाद एक करके मेडल जीतते जा रहे हैं। संजीव राजपूत हरियाणा के युमनानगर जिले में स्थित जगाधरी के रहने वाले है। इनका जन्म एक मध्यवर्गीय परिवार में 5 जनवरी 1981 में हुआ था। मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे संजीव ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जगाधरी के एसडी पब्लिक स्कूल में शुरू की और वहां 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद महज 18 की उम्र में उनका चयन इंडियन नेवी में हो गया।
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