आइए आपको मिलाते हैं कारगिल के एक ऐसे योद्धा से, जिन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। इनका नाम है मेजर डीपी सिंह और दिलचस्प है इनकी कहानी।
चंडीगढ़ से दिल्ली तक मैराथॉन का आयोजन कर रहे
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देश का पहला ब्लेड रनर और कारगिल का योद्धा डीपी सिंह
कारगिल के युद्ध में डीपी सिंह बुरी तरह से घायल हो गए थे। उनका एक पैर भी कट चुका था। इलाज के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था, लेकिन वह बाद में जी उठे और उन्होंने कृत्रिम पैर की मदद से 21 किलोमीटर की मैराथन भी पूरी कर चुके हैं।
दौड़ने के इच्छुक इस लिंक पर रजिस्टर कर सकते हैं
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देश का पहला ब्लेड रनर और कारगिल का योद्धा डीपी सिंह
उन्हें फर्स्ट इंडियन ब्लेड मैराथन रनर के नाम से भी पहचाना जाता है। जब वे ठीक हुए तो उन्होंने वो कर दिखाया जो शायद किसी ने भी सपने में नहीं सोचा होगा। उन्होंने अपने कृत्रिम पैर की मदद से 21 किलोमीटर की मैराथन दौड़ पूरी की, जिस पैर से चार से पांच किलोमीटर चलना ही काफी पीड़ादायक होता है।
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देश का पहला ब्लेड रनर और कारगिल का योद्धा डीपी सिंह
मैराथन के बाद से वह दिव्यांगों के लिए आइकन बन चुके हैं, लेकिन अब यही जुनून और जज्बा वे उन सभी दिव्यांगों में देखना चाहते हैं, जो अपने अंदर हीन भावना रखते हैं। इस उद्देश्य से वे चंडीगढ़ से दिल्ली तक स्वच्छ एबिलिटी रन 2016 आयोजित करने जा रहे हैं।
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देश का पहला ब्लेड रनर और कारगिल का योद्धा डीपी सिंह
इसकी शुरूआत 27 नवंबर को चंडीगढ़ से होने जा रही है। सोमवार को वेस्टर्न कमांड के पीआरओ दफ्तर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में मेजर डीपी सिंह ने बताया कि इस आयोजन में दो तरह की मैराथन रखी गई है।