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Chandigarh News: चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक में 124 पदों की भर्ती पर रोक
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने द चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक में 124 पदों पर प्रस्तावित भर्ती को लेकर निदेशक मंडल की सात अगस्त की बैठक के बाद की गई कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। अदालत ने भर्ती से जुड़े नियमों और आवश्यक मंजूरियों की स्थिति साफ करने को कहा है।
मामला बैंक के पूर्व अध्यक्ष एवं मौजूदा निदेशक सतिंदर पाल सिंह सिद्धू, उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह ढिल्लों और निदेशक भूपिंदर सिंह बढ़हेड़ी, जीत सिंह बहलाना व बाल कृष्ण बुड़ैल की याचिका से जुड़ा है। पांचों निदेशकों ने आरोप लगाया कि 124 पदों पर नियमित सीधी भर्ती समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव नियमों की अनदेखी कर बैठक में लाए गए और उनके विरोध के बावजूद पारित कर दिए गए।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने बताया कि सात अगस्त को निदेशक मंडल की बैठक बुलाई गई जबकि नियमों के अनुसार बैठक का एजेंडा निर्धारित समय से पहले सभी निदेशकों को उपलब्ध कराया जाना जरूरी था। उनका दावा है कि ऐसा नहीं किया गया। साथ ही इतनी बड़ी भर्ती और अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए बैंक की सामान्य सभा और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से आवश्यक मंजूरी भी नहीं ली गई।
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जस्टिस संदीप मोदगिल ने कहा कि पहले पारित आदेश को केवल एक एजेंडा तक सीमित मानना उचित नहीं है। अदालत ने दो सवाल विचारणीय माने हैं क्या निदेशक मंडल उपनियमों के तहत प्रत्येक एजेंडा पर निर्णय लेने में सक्षम था और क्या पंजाब सहकारी समितियां नियम, 1963 के तहत रजिस्ट्रार की पूर्व मंजूरी ली गई थी। सात अगस्त की बैठक की कार्रवाई अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगी।
मामला बैंक के पूर्व अध्यक्ष एवं मौजूदा निदेशक सतिंदर पाल सिंह सिद्धू, उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह ढिल्लों और निदेशक भूपिंदर सिंह बढ़हेड़ी, जीत सिंह बहलाना व बाल कृष्ण बुड़ैल की याचिका से जुड़ा है। पांचों निदेशकों ने आरोप लगाया कि 124 पदों पर नियमित सीधी भर्ती समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव नियमों की अनदेखी कर बैठक में लाए गए और उनके विरोध के बावजूद पारित कर दिए गए।
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याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने बताया कि सात अगस्त को निदेशक मंडल की बैठक बुलाई गई जबकि नियमों के अनुसार बैठक का एजेंडा निर्धारित समय से पहले सभी निदेशकों को उपलब्ध कराया जाना जरूरी था। उनका दावा है कि ऐसा नहीं किया गया। साथ ही इतनी बड़ी भर्ती और अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए बैंक की सामान्य सभा और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से आवश्यक मंजूरी भी नहीं ली गई।
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जस्टिस संदीप मोदगिल ने कहा कि पहले पारित आदेश को केवल एक एजेंडा तक सीमित मानना उचित नहीं है। अदालत ने दो सवाल विचारणीय माने हैं क्या निदेशक मंडल उपनियमों के तहत प्रत्येक एजेंडा पर निर्णय लेने में सक्षम था और क्या पंजाब सहकारी समितियां नियम, 1963 के तहत रजिस्ट्रार की पूर्व मंजूरी ली गई थी। सात अगस्त की बैठक की कार्रवाई अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगी।