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'उस समय ऐसा लगा जैसे किसी ने आखों में पिघलता लोहा उड़ेल दिया'
विकास मल्होत्रा/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
Updated Thu, 15 Jun 2017 05:44 PM IST
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Ludhiana Acid Attack
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तेजाब ने 13 साल की उम्र में ही राजवंत के हंसते खेलते जीवन को ग्रहण लगा दिया। पिछले 10 साल से वह अंधेरी दुनिया में रह रही है। बसंत की बहार, सावन के झूलों के बारे में वह केवल सुन ही सकती है, उनको देख नहीं सकती। एक अप्रैल 2007 की शाम मुंह पर पड़े तेजाब ने उसकी आंखों की रोशनी छीन ली।
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पिछले दस साल में रोशनी पाने के लिए उसने लुधियाना से लेकर हैदराबाद तक दौड़ लगाई, लेकिन अभी तक उसकी दुनिया में रंग नहीं लौट पाए। इसके बावजूद 23 वर्षीय राजवंत और उसके परिवार को उम्मीद है कि वह एक दिन फिर से देख पाएगी। जीवन के अंधेरे को वह शिक्षा के ज्ञान से दूर करने का प्रयास कर रही है। राजवंत चंडीगढ़ रोड जमालपुर स्थित दृष्टिहीन बच्चों के स्कूल में दसवीं की शिक्षा हासिल कर रही है।
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ऐसे हुआ था हादसा
ताजपुर रोड स्थित बाबा जीवन सिंह नगर में रहने वाली राजवंत कौर (23) ने बताया कि वह शिवा धागा फैक्टरी में काम करती थी। उसके साथ उसकी दो सहेलियां संदीप कौर और सोनिया काम करती थीं। 01 अप्रैल 2007 की शाम को वह अपनी दोनों सहेलियों के साथ फैक्टरी से घर आ रही थी। उसकी सहेली संदीप कौर का किसी युवक के साथ कोई विवाद था। नाराज युवक ने उस पर तेजाब फेंका।
ताजपुर रोड स्थित बाबा जीवन सिंह नगर में रहने वाली राजवंत कौर (23) ने बताया कि वह शिवा धागा फैक्टरी में काम करती थी। उसके साथ उसकी दो सहेलियां संदीप कौर और सोनिया काम करती थीं। 01 अप्रैल 2007 की शाम को वह अपनी दोनों सहेलियों के साथ फैक्टरी से घर आ रही थी। उसकी सहेली संदीप कौर का किसी युवक के साथ कोई विवाद था। नाराज युवक ने उस पर तेजाब फेंका।
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इस हमले में संदीप कौर और राजवंत के मुंह बुरी तरह जल गया। वहीं दूसरी सहेली सोनिया का हाथ बुरी तरह झुलस गया। आरोपी वहां से फरार हो गया। राजवंत कौर ने बताया कि उस समय ऐसा लगा कि किसी ने उसकी आंखों में पिघला हुआ लोहा उडे़ल दिया हो और वह मांस को जलाता हुआ अंदर ही जा रहा हो। उस जलन से बचने का कोई उपाय नहीं था। आसपास उसे कुछ नहीं दिखाई दे रहा था। सुनाई दे रही थीं तो बस चीखें।
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सहेली ने दम तोड़ा
राजवंत के पिता जोगिंदर सिंह बताते हैं कि हादसे से कुछ दिन बाद संदीप की मौत हो गई, जबकि राजवंत का मुंह पूरी तरह से झुलस गया। काफी समय तक राजवंत कौर सीएमसी अस्पताल में दाखिल रही। सरकार की तरफ से कुछ मदद भी हुई। इस मामले में आरोपी को उम्रकैद की सजा हो चुकी है, अभी वह जेल में बंद है।
राजवंत के पिता जोगिंदर सिंह बताते हैं कि हादसे से कुछ दिन बाद संदीप की मौत हो गई, जबकि राजवंत का मुंह पूरी तरह से झुलस गया। काफी समय तक राजवंत कौर सीएमसी अस्पताल में दाखिल रही। सरकार की तरफ से कुछ मदद भी हुई। इस मामले में आरोपी को उम्रकैद की सजा हो चुकी है, अभी वह जेल में बंद है।