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शहीद पति को नमन करने व्हीलचेयर पर आई पत्नी, PM मोदी इन्हें प्रणाम करते हैं
Thu, 25 May 2017 09:10 AM IST
amarujala.com- Written by: खुशबू गोयल
amarujala.com- Written by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 25 May 2017 09:10 AM IST
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अमृतसर पहुंची रसूलन बीबी
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चल फिर नहीं सकती, पर जज्बा वीरांगना वाला। व्हील चेयर पर शहीद पति को नमन करने आई 93 साल की रसूलन तो सभी देखते रह गए, आप भी देखिए।
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अमृतसर पहुंची रसूलन बीबी
1965 की जंग में पाकिस्तान के अमेरिकन पैटन टैंकों को धूल चटाने वाले शहीद वीर अब्दुल हमीद की 93 वर्षीय पत्नी रसूलन आसल उताड़ में उनकी की कब्र पर चादर चढ़ाने के लिए रविवार को अमृतसर पहुंचीं। कहती हैं कि अब शायद सांसें साथ न दें, इसलिए आखिरी बार चादर चढ़ा कर उनको सजदा करने आई हैं। उन्होंने अपने शहीद पति की मजार पर सेना और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में चादर चढ़ाई।
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अमृतसर पहुंची रसूलन बीबी
पंजाब के अमृतसर में खेमकरण स्थित शहीदी स्थल आसल उताड़ में पूर्व सैनिक कल्याण समिति तथा भारतीय सेना की तरफ से रखे समागम में शहीद शौहर को नमन करते वक्त रसूलन खूब रोईं। आंसू थमे तो उन्होंने देश के युवाओं को शहीदों की कुर्बानी की शपथ दिलाई और सेना में पहल के आधार पर भर्ती होने की बात कही। उनका कहना है कि जिंदगी और मौत सिर्फ एक बार मिलती है, इसलिए इसे देश के नाम करें।
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अमृतसर पहुंची रसूलन बीबी
उम्र के आखिरी पड़ाव से गुजर रही रसूलन की आखिरी ख्वाहिश थी कि एक बार चादर चढ़ा जाएं। जब वह मजार पर चादर चढ़ा रही थीं तो एकाएक पति के साथ बिताए दिन याद आ गए, कितने हंसमुख और हिम्मती थे...। एकाएक आंखों से आंसू आंसू छलक आए और वह फफक-फफक कर रो पड़ीं। शायद यह आखिरी दर्शन है। खैर, संभलीं तो भारतीय सेना और शहीदों की बहादुरी से गौरवान्वित हुईं।
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अमृतसर पहुंची रसूलन बीबी
रसूलन ने कहा कि शहीदों ने वतन के लिए कुर्बानी दी और पाक जैसे पड़ोसी देश से लोहा लेते हुए रोज शहादत का जाम पी रहे हैं। शहादत और कुर्बानियों का सिलसिला थमना नहीं चाहिए। युवाओं को सेना में आकर देश सेवा करनी चाहिए, क्योंकि यह उनकी मिल्कियत है जिसे शहीदों ने उनके ही हवाले किया है। वह कहती हैं कि कल हम रहें न रहें, लेकिन हमारा अहले वतन आबाद रहना चाहिए।
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