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ब्रेव डॉटरः 23 साल की उम्र में जान देकर बचाई थीं 360 जिंदगियां, मौत पर पाकिस्तान भी रोया था

Wed, 05 Sep 2018 04:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 05 Sep 2018 04:17 PM IST
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5 September Neerja Bhanot Death Anniversary, Brave Daughter of India
5 सितंबर को हाईजेक हुआ प्लेन और नीरजा भनोट
हम आपको सुना रहे हैं देश की उस बहादुर बेटी की कहानी, जिसकी मौत पर पाकिस्तान ने भी आंसू बहाए थे। जिसने एक 'शिक्षक' की तरह दुनिया को वो सबक सिखाया, जो कोई न सिखा पाएगा।
5 September Neerja Bhanot Death Anniversary, Brave Daughter of India
नीरजा भनोट की कहानी - फोटो : File Photo
अपने लिए जिए तो क्या जिए, देश की यह वीरांगना 17 घंटे तक 300 से ज्यादा जानों के लिए जीती रही। हिम्मत नहीं हारी, और उन सभी की जान बचा ली, लेकिन अपनी जिंदगी गंवा दी। उनके लिए सीने पर गोलियां खाईं, पर हौंसला इतना बुलंद था कि हत्यारे भी पस्त हो गए और भाग गए। 5 सितंबर 1986 का दिन और नीरजा भनोट का नाम दुनिया भर में अमर हो गया। आज भी लोग जब उस मंजर को याद करते हैं तो सिहर उठते हैं, लेकिन नीरजा के बारे में सोचकर भारतीय होने पर गर्व भी करते हैं।
5 September Neerja Bhanot Death Anniversary, Brave Daughter of India
बहादुर बेटी नीरजा भनोट
चंडीगढ़ में 7 सितंबर 1963 को जन्मी नीरजा भनोट को उसके जन्मदिन से दो दिन पहले 5 सितंबर 1986 के दिन आतंकियों ने गोली मार दी थी, लेकिन दम तोड़ने से पहले इस बेटी ने 360 लोगों की जानें बचाई थी। 17 घंटे तक वह आतंकियों से जूझती रही। इस बहादुर बेटी ने भारत ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'अशोक चक्र' से नवाजा तो पाक ने तमगा-ए-इन्सानियत से। भारत सरकार ने नीरजा के नाम पर डाक टिकट भी जारी किया था। मोगा के गांव घलकलां के देशभगत पार्क में उसका एकमात्र स्टेच्यू स्थापित किया गया है। वहीं पर 16 फुट लंबा जहाज बनाया गया है।

 
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5 September Neerja Bhanot Death Anniversary, Brave Daughter of India
बहादुर बेटी नीरजा भनोट
उस हादसे के 22 साल बाद भाई ने उसे रक्षाबंधन के मौके पर एक ऐसा तोहफा दिया, देखकर छलक जाएंगे आंसू। नीरजा भनोट की यादों को संजोते हुए भाई अनीश भनोट ने एक किताब लिखी डाली है। अशोक चक्र विजेता नीरजा भनोट पर आधारित किताब ‘नीरजा भनोट, द स्माइल ऑफ करेज’ का विमोचन रविवार को चंडीगढ़ सेक्टर-10 स्थित गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी में किया गया। इसका विमोचन नीरजा के भाई अनीश भनोट की ओर से लिखी गई पुस्तक का विमोचन चीफ गेस्ट नीरजा के सबसे बडे़ भाई अखिल भनोट ने किया।

 
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5 September Neerja Bhanot Death Anniversary, Brave Daughter of India
neerja
नीरजा का बचपन मुम्बई में बीता। स्कूली शिक्षा बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से हुई और सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली। नीरजा को बचपन से ही प्लेन में बैठने और आकाश में उड़ने की इच्छा थी। नीरजा भनोट की शादी 1985 में हो गई थी, लेकिन दहेज के दबाव के कारण उनके रिश्तों में खटास आ गई। वे शादी के दो महीने बाद ही मुम्बई लौट आई थीं। 1986 में मॉडल के रूप में उन्होंने कई TV और प्रिंट ऐड करना शुरू कर दिए थे। शौक को पूरा करने के मकसद से नीरजा ने बाद में एयरलाइंस ज्वाइन कर ली।
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