इराक में मारे गए युवक के अवशेष वाला ताबूत घर पहुंचा तो मासूम बेटी ने मां से ऐसी बात पूछ ली कि उसका कलेजा फट गया। दादा-दादी भी फूट फूट कर रोने लगे।
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कंवलजीत सिंह का अंतिम संस्कार
इराक में आंतकियों के हाथों मारे गए कंवलजीत का शव मंगलवार को बटाला स्थित गांव रुपोवाली लाया गया तो ताबूत देखकर बेटी बोली, मां लकड़ी के बक्से में क्या है। मां ने कोई जवाब नहीं दिया। बेटी ने दोबारा पूछा, मम्मी ये क्या है तो जवाब मिला कि तुम्हारे पापा हमें छोड़कर चले गए हैं। बेटा कंवलजीत ताबूत में आया तो देखकर उसके बूढ़़े पिता हरभजन सिंह और मां महिंदरजीत कौर का बुरा हाल हो गया।
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कंवलजीत सिंह का अंतिम संस्कार
शव के अवशेषों को संस्कार के लिए ले जाया गया तो चीख पुकार मच गई। प्रशासन के अधिकारियों ने ताबूत खोलने से मना किया हुआ था। सरकार की तरफ से इस बारे में सख्त आदेश दिया गया था, लेकिन मां की जिंद के आगे प्रशासन की नहीं चली। श्मशानघाट में मां ने अपने बेटे के अवशेष को देखने की जिद कर दी, जिसके बाद गांव के लोगों ने अधिकारियों से कहकर सिर्फ मां को ही अंतिम दर्शन करवाए।
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कंवलजीत सिंह का अंतिम संस्कार
कंवलजीत के अवशेष एडीसी जगविंदर सिंह संधू की अगुवाई में उसके गांव रूपोवाली में लाया गया। अंतिम संस्कार गांव के श्मशानघाट में कर दिया गया। अंतिम संस्कार के वक्त मृतक कंवलजीत की पत्नी हरप्रीत कौर और उसकी बेटी हरगुण भी मौजूद थी। वहीं मृतक कंवलजीत की मां महिंदरजीत कौर ने बताया कि उनके लिए आज के दिन का सामना करना बेहद मुश्किल है।
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कंवलजीत सिंह का अंतिम संस्कार
जिस दिन से भारत सरकार ने इराक में फंसे 39 भारतीयों की मौत की पुष्टि की, उसी दिन से वह कभी रो लेते हैं कभी चुप हो जाते हैं। उनका इस दुनिया में अब कोई नहीं रहा। हरभजन सिंह ने बताया कि उनके बड़े बेटे की 22 साल की आयु में ही मौत हो गई थी, अब कंवलजीत भी इस दुनिया से चला गया है। उनके आगे पीछे कोई नहीं रहा है। एक पोती है, वह भी अपने ननिहाल में हैं।