इराक से ताबूत में आए पति के अवशेष देखकर पत्नी ने ऐसी बात कह डाली कि बूढ़ी मां का कलेजा फट गया, वह फूट-फूट कर रोने लगी।
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बलवंत राय का अंतिम संस्कार
इराक में आईएसआईएस आतंकियों के हाथों मारे गए जालंधर के सात युवकों के अवशेष चार साल के इंतजार के बाद मंगलवार को उनके घरों में पहुंचे। चार साल से जिनकी राह में हर दिन दरवाजे को देखते रहे, अब वह आए तो ताबूत में बंद होकर। मंगलवार सुबह 9.40 बजे बलवंत राय के अवशेष उनके निवास गांव ढड्डे लाए गए।
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बलवंत राय का अंतिम संस्कार
मां सिमरो और पत्नी ज्ञान कौर अवशेष देखने की जिद पर अड़ी थी, हाल देखकर अधिकारियों ने इजाजत दे दी। परिवार वालों ने ताबूत खोला और देखा कि अंदर रूई पर बलवंत राय के अवशेष पड़े थे। साथ में उसकी पैंट कमीज के अलावा बूटों का जोड़ा था। अवशेष देखते ही मां सिमरो बोली, 4 साल बाद बेटा आया और वह मुझसे बात ही नहीं कर रहा।
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बलवंत राय का अंतिम संस्कार
पत्नी ज्ञान कौर तो सुध-बुध ही खो बैठी। बेटा पवन को मां को संभाल रहा था, लेकिन वह अर्द्धबेहोशी की हालत में जा रही थीं। ज्ञान कौर एक ही बात दोहरा रही थीं कि एक बार चेहरा तो दिखा जाते...पता नहीं था कि ऐसे हाल में लौटोगे, आपको इराक ही नहीं भेजती। बलवंत राय के अवशेष के साथ उनके कपड़े भी आए थे, जिनमें छेद हो चुके थे।
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बलवंत राय का अंतिम संस्कार
हालात और साथ आया सामान साफ बयां कर रहे थे कि आईएस आतंकियों ने कितनी बेरहमी से उन्हें मारा होगा। सभी रीति रिवाज पूरे होने के बाद बलवंत राय का संस्कार किया गया। बड़े बेटे राकेश ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस मौके डीसी वीके शर्मा, एसएसपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर, तहसीलदार गुरप्रीत सिंह व अन्य अधिकारियों ने बलवंत राय को नमन किया।