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इराक में मारे गए सुरजीत की पत्नी भड़की, बोलीं- सुषमा स्वराज कहती थीं, जो समझना समझ लो

Sat, 14 Apr 2018 10:44 AM IST
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Updated Sat, 14 Apr 2018 10:44 AM IST
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39 Indians Died in Iraq, Jalandhar Boy Surjit Singh Family Interview
सुरजीत मेनका जालंधर
जैसे ही मौत की खबर आई, इराक में मारे गए सुरजीत माणके की पत्नी बेसुध हो गई। उन्होंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को लेकर अपनी भड़ास निकाली है।
39 Indians Died in Iraq, Jalandhar Boy Surjit Singh Family Interview
सुरजीत मेनका जालंधर
हमें 20 बार दिल्ली बुलाया गया, रात की ट्रेन पकड़ते और सीधा रकाबगंज गुरुद्वारा साहिब पहुंच जाते, वहां से सुबह बस में हमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पास ले जाया जाता। हर बार वह दिलासा देतीं कि आपके लोग जिंदा है, चिंता न करो। यह कहना है, जालंधर में आदमपुर के पास गांव चूहड़वाली निवासी सुरजीत माणके की मां हरबंस कौर और पत्नी ऊषा का, जिनका रो-रोकर बुरा हाल था।
39 Indians Died in Iraq, Jalandhar Boy Surjit Singh Family Interview
सुरजीत मेनका जालंधर
वे दोनों कहती हैं कि हम दिल्ली गए, इस आशा में कि सुरजीत की शायद खोज खबर मिल गई होगी। हम जब भी कहते कि हमें एक बार उनसे बात करवा दो या उनका लाइव वीडियो दिखा दो तो विदेश मंत्री गुस्से में आ जातीं और कहतीं कि जाओ जो समझना है.. फिर समझते रहो। हमारे पास कोई रास्ता नहीं था, हम उनकी बात पर भरोसा कर चार साल अपने घर का दरवाजा देखते रहे।
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39 Indians Died in Iraq, Jalandhar Boy Surjit Singh Family Interview
सुरजीत मेनका जालंधर
उनका कहना था कि जेब से पैसा खर्च कर दिल्ली पहुंचते और सुषमा यह ही कहतीं कि सब ठीकठाक है, हमें क्या पता था कि हमारे साथ धोखा किया जा रहा है। एक बार तो दिल्ली में कहा गया कि सभी अगवा लोग मोसुल से 25 किमी दूर बादुश के जेल में बंद हैं। सभी भारतीय लोगों के इराक में जिंदा होने का दावा किया था। हम सिर्फ इतना ही कहते कि एक बार उनकी फोटो मंगवा दो तसल्ली हो जाएगी।

 
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39 Indians Died in Iraq, Jalandhar Boy Surjit Singh Family Interview
बलवंत राय जालंधर
‘जब भी दिल्ली जाते, सिर्फ आश्वासन ही मिलता’
गांव ढड्डे के बलवंत राय के बेटे पवन ने बताया कि हमें हमेशा ही आशा की किरण नजर आती थी। जब भी दिल्ली जाते तो सिर्फ आश्वासन लेकर ही लौटते थे। एक बार तो मैंने सुषमा जी से इस बात का प्रूफ मांग लिया कि मेरे पिता मोसुल में जिंदा भी है या नहीं... तो गुस्से से वह बोलीं कि जो मर्जी समझ लो। फिर बोली कि मेरे सूत्र बताते हैं कि बंदे ठीक हैं... वह कामकाज कर रहे हैं। हमने तो यह भी ऑफर किया कि किसी तरह हमें पिता जी के हस्ताक्षर मंगवा दो... हस्ताक्षर तो मैं झट से पहचान सकता था, लेकिन फिर सुषमा जी गुस्सा कर गईं। अब तो आठ माह से हमारी सुध लेना भी बंद कर दिया गया था।
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