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ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या था, क्यों आई इसकी नौबत? 19 क्लिक में पढ़िए पूरी कहानी

Sun, 17 Jun 2018 09:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 17 Jun 2018 09:50 AM IST
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34th anniversary of operation blue star in golden temple amritsar
ऑपरेशन ब्लू स्टार - फोटो : फाइल फोटो
ऑपरेशन ब्लू स्टार की 34वीं बरसी पर हम बता रहे हैं वे सभी कारण, जिन्होंने इंदिरा गांधी सरकार को ऑपरेशन ब्लू स्टार करने पर मजबूर किया। तारीख 6 जून 1984, जगह अमृतसर स्थित दरबार साहिब....और ऑपरेशन ब्लू स्टार। इतिहास में कभी न भूलने वाला सच।
34th anniversary of operation blue star in golden temple amritsar
ऑपरेशन ब्लू स्टार
6 जून 1984 के दिन सिखों के सबसे पावन स्थल स्वर्ण मंदिर परिसर में भारतीय सेना की कार्रवाई 'ऑपरेशन ब्लूस्टार ने दुनिया भर में सुर्खियों में रही। आज भी लोग इसे याद करके सिहर उठते हैं। मामला 1970 के दशक के अंत में अकाली राजनीति में खींचतान और अकालियों की पंजाब संबंधित मांगों को लेकर शुरू हुआ था। 1978 में पंजाब की मांगों पर अकाली दल ने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पारित किया।
34th anniversary of operation blue star in golden temple amritsar
Operation Blue Star
इसके मूल प्रस्ताव में सुझाव दिया गया था कि भारत की केंद्र सरकार का केवल रक्षा, विदेश नीति, संचार और मुद्रा पर अधिकार हो, जबकि अन्य सब विषयों पर राज्यों के पास पूर्ण अधिकार हों। वे ये भी चाहते थे कि भारत के उत्तरी क्षेत्र में उन्हें स्वायत्तता मिले। अकालियों की प्रमुख मांगें थीं- चंडीगढ़ पंजाब की ही राजधानी हो, पंजाबी भाषी क्षेत्र पंजाब में शामिल किए जाएं, नदियों के पानी के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय की राय ली जाए।
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34th anniversary of operation blue star in golden temple amritsar
ऑपरेशन ब्लू स्टार
इसके साथ वे यह भी चाहते थे कि 'नहरों के हेडवर्क्स' और पन-बिजली बनाने के मूलभूत ढांचे का प्रबंधन पंजाब के पास हो, फौज में भर्ती काबिलियत के आधार पर हो और इसमें सिखों की भर्ती पर लगी कथित सीमा हटाई जाए और अखिल भारतीय गुरुद्वारा कानून बनाया जाए। विश्लेषकों के मुताबिक, इंदिरा गांधी की सरकार और अकालियों के बीच एक यह मसला सुलझाने के लिए तीन बार बात हुई थी।
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34th anniversary of operation blue star in golden temple amritsar
ऑपरेशन ब्लू स्टार
इस बीच अकाली कार्यकर्ताओं और निरंकारियों के बीच अमृतसर में 13 अप्रैल 1978 को हिंसक झड़प हुई। इस घटना को पंजाब में चरमपंथ की शुरुआत के तौर पर देखा गया। विश्लेषक मानते हैं कि शुरुआत में सिखों पर अकाली दल के प्रभाव को कम करने के लिए कांग्रेस ने सिख प्रचारक जरनैल सिंह भिंडरावाले को परोक्ष रूप से प्रोत्साहन दिया। इसके पीछे कांग्रेस का मकसद था कि अकालियों के सामने किसी संगठन या ऐसे व्यक्ति को खड़ा किया जाए, जो उनको मिलने वाले समर्थन में सेंध लगा सके।
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