जीएसटी को लेकर मोदी सरकार व्यापारियों के एक बड़ा तोहफा दे सकती है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चल रही है, जल्दी से करा लें और जानिए क्या फायदा होगा।
केंद्र सरकार जीएसटी में पंजाब के हिस्से का निर्धारण नोटबंदी से पहले की वैट वसूली के आधार पर कर सकती है। पंजाब ने इस संबंध में मांग रखी थी, जिस पर सैद्धांतिक तौर पर सहमति हो गई है। शनिवार को होने वाली जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में इस पर औपचारिक मुहर लगने की संभावना है।केंद्र सरकार एक जुलाई से गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स लागू करने की तैयारी कर रही है।
इसमें राज्यों के साथ प्रमुख टकराव यह था कि जीएसटी में राज्य के हिस्से का निर्धारण 2017 की वैट वसूली के आधार पर न किया जाए। क्योंकि नोटबंदी के बाद वैट वसूली काफी गिर गई है। पंजाब में नोटबंदी से पहले वैट कलेक्शन चालीस करोड़ रुपये था, जो नोटबंदी के एक हफ्ते बाद गिर कर 15-18 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। बाद में स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन अधिकारी मानते हैं कि अभी भी राजस्व में 40-50 प्रतिशत गिरावट है।
अगर इस आधार पर जीएसटी में हिस्से का निर्धारण हुआ तो पंजाब को नुकसान होगा। इसलिए विभाग की मांग थी कि नोटबंदी के पहले के राजस्व के आधार पर ही निर्धारण किया जाए। केंद्र सरकार इस पर सहमत हो गई है। नोटबंदी के पहले तीन साल का औसत राजस्व लेकर, उसके आधार पर जीएसटी में पंजाब का हिस्सा निर्धारित करने की उम्मीद है। हिस्सा कितना होगा, इसे लेकर भी केंद्र ने दो-तीन फॉर्मूले तैयार किए हैं।
कारोबारियों के एसेसमेंट को लेकर भी केंद्र और राज्यों के अधिकारों के बीच टकराव चल रहा था। उसके भी हल होने की उम्मीद है, क्योंकि केंद्र सरकार किसी भी हालत में एक जुलाई से जीएसटी लागू करने की तैयारी में है। डेढ़ करोड़ तक के 90 फीसदी केसों का एसेसमेंट राज्य सरकार को दिया जा सकता है, बाकी केंद्र करेगा। वहीं, डेढ़ करोड़ से ज्यादा वाले केसों में दोनों ही पचास-पचास फीसदी मामलों का एसेसमेंट करेंगे।