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चुनाव से पहले सपा को लगा बड़ा झटका, वाराणसी जिला पंचायत अध्यक्ष हुईं भाजपाई
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Sat, 18 Nov 2017 01:39 PM IST
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महेंद्र नाथ पाण्डेय ने अपराजिता सोनकर को पार्टी ज्वाइन कराई
- फोटो : अमर उजाला
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पीएम के संसदीय क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगा है। यहां होने वाले निकाय चुनाव से मात्र नौ दिन पहले सपा की युवा नेता और वाराणसी जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर ने सपा से किनारा कर लिया।
सपा की महिला विंग का बड़ा चेहरा कही जाने वाली अपराजिता अपराजिता सोनकर ने लखनऊ भाजपा मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। साइकिल छोड़ कमल थामने वाली अपराजिता ने कहा कि उन्होंने विकास के लिए भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। पार्टी की नीतियों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगी।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही भाजपा ने जिला पंचायत पर काबिज होने की कवायद शुरू कर दी थी। भाजपा की ओर से सपा की जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया। बावजूद इसके अविश्वास प्रस्ताव साबित नहीं होने पर अपराजिता की कुर्सी बच गई।
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उस दौरान भी चर्चा रही कि पार्टी से साठगांठ होने के कारण कुर्सी बचाई गई है। भाजपा सही वक्त का इंतजार भाजपा कर रही थी। निकाय चुनाव के दौरान सपा की जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता को भाजपा में शामिल कर पार्टी ने विरोधियों को करारी पटखनी दी है।
जिले के नेताओं को भी इसकी भनक सदस्यता ग्रहण करने के बाद लगी। पूर्व में भी अपराजिता ने पार्टी में शामिल होने का प्रयास किया था तो उस दौरान यहां के नेताओं ने शामिल नहीं कराया था। सदस्यता ग्रहण कराने के दौरान उनके साथ भाजपा नेता अशोक तिवारी रहे।
अपराजिता को भाजपा में शामिल कराने में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और अनुसूचित मोर्चा के नेता मनोज सोनकर का नाम आ रहा है लेकिन इसके पीछे पड़ोसी जिले के एक सांसद की भूमिका अहम रही।
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सपा की महिला विंग का बड़ा चेहरा कही जाने वाली अपराजिता अपराजिता सोनकर ने लखनऊ भाजपा मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। साइकिल छोड़ कमल थामने वाली अपराजिता ने कहा कि उन्होंने विकास के लिए भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। पार्टी की नीतियों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगी।
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प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही भाजपा ने जिला पंचायत पर काबिज होने की कवायद शुरू कर दी थी। भाजपा की ओर से सपा की जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया। बावजूद इसके अविश्वास प्रस्ताव साबित नहीं होने पर अपराजिता की कुर्सी बच गई।
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उस दौरान भी चर्चा रही कि पार्टी से साठगांठ होने के कारण कुर्सी बचाई गई है। भाजपा सही वक्त का इंतजार भाजपा कर रही थी। निकाय चुनाव के दौरान सपा की जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता को भाजपा में शामिल कर पार्टी ने विरोधियों को करारी पटखनी दी है।
जिले के नेताओं को भी इसकी भनक सदस्यता ग्रहण करने के बाद लगी। पूर्व में भी अपराजिता ने पार्टी में शामिल होने का प्रयास किया था तो उस दौरान यहां के नेताओं ने शामिल नहीं कराया था। सदस्यता ग्रहण कराने के दौरान उनके साथ भाजपा नेता अशोक तिवारी रहे।
अपराजिता को भाजपा में शामिल कराने में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और अनुसूचित मोर्चा के नेता मनोज सोनकर का नाम आ रहा है लेकिन इसके पीछे पड़ोसी जिले के एक सांसद की भूमिका अहम रही।
पार्टी ने दिया सम्मान, अपराजिता ने किया विश्वासघात
अपराजिता सोनकर
- फोटो : अमर उजाला
नगर निकाय चुनाव के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर ने सपा को तगड़ा झटका दिया है। पार्टी की महिला विंग का बड़ा चेहरा कही जाने वाली अपराजिता के पार्टी छोड़ने से सपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। पार्टी भी इस फैसले से हतप्रभ है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि हमने जिसे बहन और बेटी की तरह सम्मान दिया, उसने पार्टी के साथ विश्वासघात किया। सपा के जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव को शाम को जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर के भाजपा में शामिल होने की सूचना मिली तो वह हतप्रभ रह गए।
बताया कि चार दिन पहले उन्होंने अपराजिता सोनकर को मेयर प्रत्याशी का चुनाव प्रचार करने को कहा था। तब उन्होंने खुद को बीमार बताते हुए कुछ दिन तक प्रचार करने में असमर्थता जताई थी। देर शाम शहर पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम को भी वास्तविकता से अवगत कराया गया।
नेताओं का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ भाजपा जब अविश्वास प्रस्ताव लाई थी तो पूरी पार्टी अपराजिता के साथ खड़ी थी और मजबूती से लड़कर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा बरकरार रखा। जिसने छुरा घोंपा, अपराजिता उसी के साथ चली गईं।
पार्टी नेताओं का कहना है कि हमने जिसे बहन और बेटी की तरह सम्मान दिया, उसने पार्टी के साथ विश्वासघात किया। सपा के जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव को शाम को जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर के भाजपा में शामिल होने की सूचना मिली तो वह हतप्रभ रह गए।
बताया कि चार दिन पहले उन्होंने अपराजिता सोनकर को मेयर प्रत्याशी का चुनाव प्रचार करने को कहा था। तब उन्होंने खुद को बीमार बताते हुए कुछ दिन तक प्रचार करने में असमर्थता जताई थी। देर शाम शहर पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम को भी वास्तविकता से अवगत कराया गया।
नेताओं का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ भाजपा जब अविश्वास प्रस्ताव लाई थी तो पूरी पार्टी अपराजिता के साथ खड़ी थी और मजबूती से लड़कर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा बरकरार रखा। जिसने छुरा घोंपा, अपराजिता उसी के साथ चली गईं।
बहन ने छोड़ा साथ, भाई ने जताया ‘नेताजी’ पर भरोसा
अपराजिता सोनकर
- फोटो : file
बहन ने भले ही साइकिल का साथ छोड़ दिया हो लेकिन भाई का भरोसा आज भी ‘नेताजी’ पर है। शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर ने समाजवादी पार्टी का दामन छोड़कर भगवा झंडा थाम लिया है।
इसके बाद चर्चा रही कि अब उनके भाई समाजवादी छात्र सभा के नेता अनूप सोनकर भी अखिलेश यादव की टीम छोड़ देंगे। हालांकि फिलहाल अनूप ने साफ कर दिया है कि बहन ने भले ही साथ छोड़ दिया लेकिन उनका भरोसा सपा पर ही है।
अनूप सोनकर का कहना है कि वे सपा का साथ नहीं छोड़ेंगे। काशी विद्यापीठ के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अनूप सोनकर समाजवादी छात्र सभा से जुड़े हैं। पिछले साल छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर चुने गए। हाल में संपन्न हुए छात्रसंघ चुनाव में भी वो पूरी तरह से सक्रिय रहे। हालांकि उन्हाेंने सछास के बागियों का साथ दिया।
इसके बाद चर्चा रही कि अब उनके भाई समाजवादी छात्र सभा के नेता अनूप सोनकर भी अखिलेश यादव की टीम छोड़ देंगे। हालांकि फिलहाल अनूप ने साफ कर दिया है कि बहन ने भले ही साथ छोड़ दिया लेकिन उनका भरोसा सपा पर ही है।
अनूप सोनकर का कहना है कि वे सपा का साथ नहीं छोड़ेंगे। काशी विद्यापीठ के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अनूप सोनकर समाजवादी छात्र सभा से जुड़े हैं। पिछले साल छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर चुने गए। हाल में संपन्न हुए छात्रसंघ चुनाव में भी वो पूरी तरह से सक्रिय रहे। हालांकि उन्हाेंने सछास के बागियों का साथ दिया।