पीएम मोदी का विपक्ष पर वार: हमारे सिलेबस में सबका साथ, उनकी डिक्शनरी में माफियावाद-परिवारवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वाराणसी का दौरा किया। जहां उन्होंने जनसभा में विपक्षी पार्टियों पर हमला बोला। इस दौरै पर पीएम मोदी ने 2100 करोड़ रुपये की परियोजनाएं लोगों को समर्पित कीं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को 21 सौ करोड़ रुपये की 27 परियोजनाओं की सौगात देने के साथ ही विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने विपक्ष का नाम लिए बिना कहा, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की यह भाषा उनके सिलेबस से बाहर है। उनके सिलेबस में है माफियावाद, परिवारवाद और घरों-जमीनों पर अवैध कब्जा।
पीएम ने कहा, जब काशी व यूपी के विकास में, डबल इंजन की डबल शक्ति की बात करता हूं, तो कुछ लोगों को ज्यादा कष्ट होने लगता है। यह वो लोग हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश को सिर्फ जाति, मजहब, पंथ, के चश्मे से ही देखा। इन लोगों ने कभी नहीं चाहा कि यूपी का विकास हो, यूपी की आधुनिक पहचान बने। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, सड़क, पानी, बिजली, गरीबों के घर, गैस कनेक्शन, शौचालय, इनको तो वो विकास मानते ही नहीं।
पीएम ने पुरानी सरकारों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पहले जो यूपी को मिलता था और अब जो मिल रहा है, दोनों में फर्क साफ है। उन्होंने विपक्ष पर सियासी शब्दबाण चलाते हुए निशाना साधा और कहा, हमारे यहां गाय की बात करना कुछ लोगों ने गुनाह बना दिया है। गाय कुछ लोगों के लिए गुनाह हो सकती है, हमारे लिए गाय, माता व पूजनीय है। गाय-भैंस का मजाक उड़ाने वाले लोग ये भूल जाते हैं कि देश के आठ करोड़ परिवारों की आजीविका ऐसे ही पशुधन से चलती है।
इससे पहले पिंडरा के करखियांव में पीएम मोदी ने बनास काशी संकुल का शिलान्यास किया और काशी की 870.16 करोड़ की लागत से तैयार 22 परियोजनाओं का लोकार्पण और 1225.51 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखी। पीएम ने स्वामित्व योजना के छह लाभार्थियों को प्रमाणपत्र सौंपा और बटन दबाकर प्रदेश के 20 लाख परिवारों तक घरौनी प्रमाणपत्र का लिंक मैसेज से भेजा। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो के दूध की शुद्धता पहचान का लोगो भी लांच किया। मंच पर आने से पहले पीएम मोदी ने सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों से भी संवाद किया।
आने वाली पीढ़ियों का भविष्य प्राकृतिक खेती से सुरक्षित
पीएम मोदी ने कहा कि समय के साथ प्राकृतिक खेती का दायरा सिमटता गया, उस पर केमिकल वाली खेती हावी होती गई। धरती मां के कायाकल्प, हमारी मिट्टी की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए, हमें एक बार फिर प्राकृतिक खेती की तरफ मुड़ना ही होगा। उन्होंने विश्व में प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की मांग का जिक्र करते हुए कहा, स्टार्ट अप सेक्टर से जुड़े युवाओं के पास नेचुरल फार्मिंग में अनेक संभावनाएं हैं।