{"_id":"58984ced4f1c1b9452378503","slug":"a-letter-to-soniya-gandhi-for-change-candidate-in-varanasi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":" अब वाराणसी में कांग्रेस प्रत्याशी बदलने की मांग, सोनिया गांधी को लिखा पत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब वाराणसी में कांग्रेस प्रत्याशी बदलने की मांग, सोनिया गांधी को लिखा पत्र
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Mon, 06 Feb 2017 04:01 PM IST
विज्ञापन
करिश्माई रहा काशी में सोनिया गांधी का रोड शो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा चुनाव 2017 में टिकट वितरण के बाद लगभग सभी बड़े दलों में असंतोष का भाव है। असंतुष्ट कार्यकर्ताओं और नेताओं को समझाने-मनाने का काम चल रहा है। वाराणसी की कुछ सीटों पर पहले सपा उसके बाद भाजपा द्वारा उम्मीदवार घोषित करने के बाद हंगामा हुआ।
अब कांग्रेस प्रत्याशी को भी बदलने की मांग हो रही है। बता दें कि सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत शहर उत्तरी सीट से सपा के पूर्व विधायक समद अंसारी को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इस बात को लेकर शहर उतरी के लोगों और कांग्रेस समर्थकों में नाराजगी है।
कांग्रेस की ओर से शनिवार को जारी नौ प्रत्याशियों की सूची में समद को शहर उत्तरी सीट से, दक्षिण से पूर्व सांसद राजेश कुमार मिश्रा, पिंडरा से विधायक अजय राय जबकि कैंट से अनिल श्रीवास्तव को प्रत्याशी घोषित किया गया है।
विज्ञापन
उत्तरी सीट से कांग्रेस की राबिया कलाम और जफरूल्लाह जफर प्रबल दावेदार थे।
ऐसे में समद को टिकट दिए जाने के बाद लोगों में आपत्ति है।
सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर प्रत्याशी बदलने की मांग की गई है। यह पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
विज्ञापन
अब कांग्रेस प्रत्याशी को भी बदलने की मांग हो रही है। बता दें कि सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत शहर उत्तरी सीट से सपा के पूर्व विधायक समद अंसारी को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इस बात को लेकर शहर उतरी के लोगों और कांग्रेस समर्थकों में नाराजगी है।
विज्ञापन
कांग्रेस की ओर से शनिवार को जारी नौ प्रत्याशियों की सूची में समद को शहर उत्तरी सीट से, दक्षिण से पूर्व सांसद राजेश कुमार मिश्रा, पिंडरा से विधायक अजय राय जबकि कैंट से अनिल श्रीवास्तव को प्रत्याशी घोषित किया गया है।
विज्ञापन
उत्तरी सीट से कांग्रेस की राबिया कलाम और जफरूल्लाह जफर प्रबल दावेदार थे।
ऐसे में समद को टिकट दिए जाने के बाद लोगों में आपत्ति है।
सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर प्रत्याशी बदलने की मांग की गई है। यह पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
ये रहा,सोशल मीडिया में वायरल पत्र
congress logo
आदरणीया श्रीमती सोनिया गांधी जी
राष्ट्रीय अध्यक्षा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी, नई दिल्ली।
सादर प्रणाम!
मैं अपनी भावनाओं से आपको अवगत कराना चाहता हूं। लेकिन पार्टी का फैसला मुझे मान्य है। मुझे कहना है कि हम सपा कांग्रेस के गठबंधन से काफी खुश थे। कांग्रेस ने वाराणसी मे जो प्रत्याशी उतारे हम उनसे भी खुश थे। लेकिन दिनांक 04/02/2017 को जो सूची कांग्रेस ने जारी की उसमे समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक समद अंसारी का नाम देख कर आश्चर्य हो गया। आश्चर्य क्यों न होता। गठबंधन धर्म मे वाराणसी उत्तरी की सीट सपा को दे दी जाती और समाजवादी पार्टी अपने उम्मीदवार के रूप मे समद अंसारी को मैदान मे उतार देती। हम भी गठबंधन धर्म को निभाते। लेकिन समद अंसारी को कांग्रेस का सिम्बल देकर लड़ाने की सच्चाई यह है कि सपा अपना दामन साफ रखना चाहती है। यह वही समद अंसारी है जिन्होने जमीन पर कब्जा किया था और इनके विरुद्ध जिला मुख्यालय पर घर और नकाब से बाहर न निकलने वाली मुस्लिम महिलाएं दिनांक 04/06/2013 से 09/07/2013 तक 35 दिन तक धरना दिया था। फिर भी सपा सरकार ने इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नही की थी। इन्ही समद अंसारी की वजह से बनारस का अंसारी वर्ग दो ग्रुप मे बंट गया है। समद अंसारी की भाषा शैली बहुत ही खराब है। शिक्षा के नाम पर इनके पास कुछ भी नही है। इनके मानने वाले दबे ज़ुबान मे कह रहे है कि हमने अपने पैसे के बल बूते पर कांग्रेस का टिकट ले लिया। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या कांग्रेस के पास नेताओ की कमी हो गयी थी? क्या उत्तरी मे कांग्रेस के पास कार्यकर्ता नही थे? हम लोग पार्षद कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए। क्या हम लोग विधान सभा नही लड़ सकते? क्या कमी है हम मे ? नेतृत्व जरा बताये? पर कार्यकर्ताओं की क्यो सुनी जाती। कार्यकर्ता तो सिर्फ भीड़ जुटाने के लिए होता है। कार्यकर्ता सिर्फ वोट दे और दिलाये। ऊपर से प्रत्याशी आकर टिकट ले उड़े। यही राजनीति है तो बेहद घटिया चीज है राजनीति।
राष्ट्रीय अध्यक्षा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी, नई दिल्ली।
सादर प्रणाम!
मैं अपनी भावनाओं से आपको अवगत कराना चाहता हूं। लेकिन पार्टी का फैसला मुझे मान्य है। मुझे कहना है कि हम सपा कांग्रेस के गठबंधन से काफी खुश थे। कांग्रेस ने वाराणसी मे जो प्रत्याशी उतारे हम उनसे भी खुश थे। लेकिन दिनांक 04/02/2017 को जो सूची कांग्रेस ने जारी की उसमे समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक समद अंसारी का नाम देख कर आश्चर्य हो गया। आश्चर्य क्यों न होता। गठबंधन धर्म मे वाराणसी उत्तरी की सीट सपा को दे दी जाती और समाजवादी पार्टी अपने उम्मीदवार के रूप मे समद अंसारी को मैदान मे उतार देती। हम भी गठबंधन धर्म को निभाते। लेकिन समद अंसारी को कांग्रेस का सिम्बल देकर लड़ाने की सच्चाई यह है कि सपा अपना दामन साफ रखना चाहती है। यह वही समद अंसारी है जिन्होने जमीन पर कब्जा किया था और इनके विरुद्ध जिला मुख्यालय पर घर और नकाब से बाहर न निकलने वाली मुस्लिम महिलाएं दिनांक 04/06/2013 से 09/07/2013 तक 35 दिन तक धरना दिया था। फिर भी सपा सरकार ने इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नही की थी। इन्ही समद अंसारी की वजह से बनारस का अंसारी वर्ग दो ग्रुप मे बंट गया है। समद अंसारी की भाषा शैली बहुत ही खराब है। शिक्षा के नाम पर इनके पास कुछ भी नही है। इनके मानने वाले दबे ज़ुबान मे कह रहे है कि हमने अपने पैसे के बल बूते पर कांग्रेस का टिकट ले लिया। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या कांग्रेस के पास नेताओ की कमी हो गयी थी? क्या उत्तरी मे कांग्रेस के पास कार्यकर्ता नही थे? हम लोग पार्षद कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए। क्या हम लोग विधान सभा नही लड़ सकते? क्या कमी है हम मे ? नेतृत्व जरा बताये? पर कार्यकर्ताओं की क्यो सुनी जाती। कार्यकर्ता तो सिर्फ भीड़ जुटाने के लिए होता है। कार्यकर्ता सिर्फ वोट दे और दिलाये। ऊपर से प्रत्याशी आकर टिकट ले उड़े। यही राजनीति है तो बेहद घटिया चीज है राजनीति।