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Water Crisis in Damoh: गर्मियों की दस्तक के साथ जलसंकट से जूझने लगे लोग, बैलगाड़ी से ढोकर ला रहे पानी
Mon, 10 Apr 2023 05:27 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Mon, 10 Apr 2023 05:27 PM IST
सार
एक ओर सरकार नल जल योजना, जल जीवन मिशन, कुएं सहित अन्य योजनाएं चलाकर गांवों में शत-प्रतिशत पानी पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन दूसरी ओर हकीकत यह है कि कहीं पानी की कोई व्यवस्था ही नहीं है।
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चार किमी दूर से पानी ढोकर ला रहे लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बुंदेलखंड का दमोह जिला हर साल गर्मियों में जलसंकट से जूझता है। जिले के हटा और तेंदूखेड़ा ब्लॉक में सबसे अधिक पानी की समस्या रहती है। हटा ब्लॉक के भटिया बिजौरी गांव में जलसंकट गहरा गया है। यहां पर केवल दो हैंडपंप पानी दे रहे हैं, लेकिन इससे ग्रामीणों की पूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में 850 से ज्यादा ग्रामीणों को जल की व्यवस्था करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीण चार किमी दूर खेतों में बने कुओं से बैलगाड़ी में पानी लाने के लिए मजबूर हैं।
बिजौरी गांव के लक्ष्मण लोधी ने बताया कि गांव में पानी की किल्लत है। इसलिए ग्रामीणों को सुबह से लेकर देर रात्रि तक पानी की व्यवस्था करना पड़ रही है। एक ओर सरकार नल जल योजना, जल जीवन मिशन, कुएं सहित अन्य योजनाएं चलाकर गांवों में शत-प्रतिशत पानी पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन दूसरी ओर हकीकत यह है कि कहीं पानी की कोई व्यवस्था ही नहीं है।
ग्रामीण गोविंद ने बताया कि अधिकारी गांव में आकर समस्या नहीं देखते, वे अपने कार्यालयों से रिपोर्ट वरिष्ठ अफसरों को भेजते रहते हैं। जबकि गांव में पानी का कोई स्थाई इंतजाम नहीं है, इसलिए सुबह होते ही बैलगाड़ी पर टंकी रखकर पानी की तलाश में निकल जाते हैं। वहीं, जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक के ग्रामीण अंचलों में जलसंकट के ऐसे हालात बनते हैं कि ग्रामीण अपने जानवरों के साथ पलायन कर दूसरे जिले में चले जाते हैं और चार महीने बाद ही गांव वापस आते हैं।
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बिजौरी गांव के लक्ष्मण लोधी ने बताया कि गांव में पानी की किल्लत है। इसलिए ग्रामीणों को सुबह से लेकर देर रात्रि तक पानी की व्यवस्था करना पड़ रही है। एक ओर सरकार नल जल योजना, जल जीवन मिशन, कुएं सहित अन्य योजनाएं चलाकर गांवों में शत-प्रतिशत पानी पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन दूसरी ओर हकीकत यह है कि कहीं पानी की कोई व्यवस्था ही नहीं है।
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ग्रामीण गोविंद ने बताया कि अधिकारी गांव में आकर समस्या नहीं देखते, वे अपने कार्यालयों से रिपोर्ट वरिष्ठ अफसरों को भेजते रहते हैं। जबकि गांव में पानी का कोई स्थाई इंतजाम नहीं है, इसलिए सुबह होते ही बैलगाड़ी पर टंकी रखकर पानी की तलाश में निकल जाते हैं। वहीं, जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक के ग्रामीण अंचलों में जलसंकट के ऐसे हालात बनते हैं कि ग्रामीण अपने जानवरों के साथ पलायन कर दूसरे जिले में चले जाते हैं और चार महीने बाद ही गांव वापस आते हैं।
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