{"_id":"6aa8f212337b1253040d6e25","slug":"tikamgarh-wins-indias-first-award-in-the-cleanliness-campaign-tikamgarh-news-c-1-1-noi1349-4726132-2026-09-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमपी: आईएससी-फिक्की स्वच्छता पुरस्कार में टीकमगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर विजेता, ग्रे वॉटर प्रबंधन को मिला सम्मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमपी: आईएससी-फिक्की स्वच्छता पुरस्कार में टीकमगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर विजेता, ग्रे वॉटर प्रबंधन को मिला सम्मान
Wed, 16 Sep 2026 09:51 PM IST
टीकमगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़
Published by: टीकमगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2026 09:51 PM IST
सार
टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों के ग्रे वॉटर प्रबंधन के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। आईएससी-फिक्की स्वच्छता पुरस्कार में टीकमगढ़ को ग्रे वॉटर प्रबंधन श्रेणी में विजेता घोषित किया गया। जिले में यह व्यवस्था अब 225 गांवों तक पहुंच चुकी है।
विज्ञापन
पुरस्कार ग्रहण करते टीकमगढ़ कलेक्टर।
विस्तार
गांवों की गलियों में बहते गंदे पानी, कीचड़ और जलभराव की समस्या के समाधान के लिए टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों द्वारा किए गए प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। आईएससी-फिक्की स्वच्छता पुरस्कार में टीकमगढ़ को ग्रे वॉटर प्रबंधन श्रेणी में विजेता घोषित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने टीम के साथ पुरस्कार ग्रहण किया।
जिले में भूमिगत जल निकासी की यह पहल चंद्रपुरा गांव से शुरू हुई थी। इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे व्यवस्थित योजना के साथ अन्य गांवों तक पहुंचाने की कार्ययोजना तैयार की। तकनीकी मार्गदर्शन, चरणबद्ध कार्ययोजना और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के समुचित उपयोग से पिछले दो वर्षों में यह व्यवस्था 225 गांवों तक विस्तारित की जा चुकी है।
इस व्यवस्था के तहत घरों से निकलने वाले स्नान, कपड़े धोने और रसोई आदि के पानी को खुले में बहने से रोकने के लिए घरों के बाहर गाद-छन्ना चैंबर बनाए जाते हैं। इन चैंबरों को करीब 8 इंच व्यास के पाइपों से जोड़ा जाता है। पाइपों के माध्यम से पानी को भूमिगत रूप से गांव के अंतिम बिंदु तक पहुंचाया जाता है, जहां सोख्ता गड्ढे के जरिए पानी का निस्तारण किया जाता है। चैंबरों में गाद और ठोस पदार्थों को रोकने की व्यवस्था होने से पाइपों में रुकावट की संभावना भी कम होती है।
विज्ञापन
इस पहल से गांवों की गलियों में खुले रूप से बहने वाले गंदे पानी, कीचड़ और जलभराव की समस्या में कमी आई है। आवागमन आसान हुआ है तथा महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए ग्रामीण परिवेश अधिक सुविधाजनक बना है। ग्रामीण इस बदलाव को इन शब्दों में व्यक्त कर रहे हैं “हमारे गांव की गलियां अब आंगन में बदल गई हैं।”
ये भी पढ़ें- सांवेर में जर्जर मकान तोड़ते समय पास के मकान की दीवार गिरी, मलबे में दबने से चार महिलाओं की मौत, पांच घायल
जिला प्रशासन की योजना, तकनीकी सहयोग और पंचम वित्त आयोग से उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के उपयोग से ग्राम पंचायतों में चैंबर, भूमिगत पाइपलाइन और सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया जा रहा है।
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने कहा कि यह पुरस्कार टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों के संकल्प, विश्वास और प्रयासों का परिणाम है। चंद्रपुरा से शुरू हुई पहल अब 225 गांवों तक पहुंच चुकी है। यह केवल भूमिगत जल निकासी व्यवस्था बनाने का काम नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता और गांवों के परिवेश को बदलने का अभियान है।
विज्ञापन
जिले में भूमिगत जल निकासी की यह पहल चंद्रपुरा गांव से शुरू हुई थी। इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे व्यवस्थित योजना के साथ अन्य गांवों तक पहुंचाने की कार्ययोजना तैयार की। तकनीकी मार्गदर्शन, चरणबद्ध कार्ययोजना और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के समुचित उपयोग से पिछले दो वर्षों में यह व्यवस्था 225 गांवों तक विस्तारित की जा चुकी है।
विज्ञापन
इस व्यवस्था के तहत घरों से निकलने वाले स्नान, कपड़े धोने और रसोई आदि के पानी को खुले में बहने से रोकने के लिए घरों के बाहर गाद-छन्ना चैंबर बनाए जाते हैं। इन चैंबरों को करीब 8 इंच व्यास के पाइपों से जोड़ा जाता है। पाइपों के माध्यम से पानी को भूमिगत रूप से गांव के अंतिम बिंदु तक पहुंचाया जाता है, जहां सोख्ता गड्ढे के जरिए पानी का निस्तारण किया जाता है। चैंबरों में गाद और ठोस पदार्थों को रोकने की व्यवस्था होने से पाइपों में रुकावट की संभावना भी कम होती है।
विज्ञापन
इस पहल से गांवों की गलियों में खुले रूप से बहने वाले गंदे पानी, कीचड़ और जलभराव की समस्या में कमी आई है। आवागमन आसान हुआ है तथा महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए ग्रामीण परिवेश अधिक सुविधाजनक बना है। ग्रामीण इस बदलाव को इन शब्दों में व्यक्त कर रहे हैं “हमारे गांव की गलियां अब आंगन में बदल गई हैं।”
ये भी पढ़ें- सांवेर में जर्जर मकान तोड़ते समय पास के मकान की दीवार गिरी, मलबे में दबने से चार महिलाओं की मौत, पांच घायल
जिला प्रशासन की योजना, तकनीकी सहयोग और पंचम वित्त आयोग से उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के उपयोग से ग्राम पंचायतों में चैंबर, भूमिगत पाइपलाइन और सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया जा रहा है।
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने कहा कि यह पुरस्कार टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों के संकल्प, विश्वास और प्रयासों का परिणाम है। चंद्रपुरा से शुरू हुई पहल अब 225 गांवों तक पहुंच चुकी है। यह केवल भूमिगत जल निकासी व्यवस्था बनाने का काम नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता और गांवों के परिवेश को बदलने का अभियान है।

पुरस्कार ग्रहण करते कलेक्टर
