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मामाजी, कृपया जाति को शिक्षा में न लाएं, छात्रों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहा

Tue, 22 May 2018 11:29 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Updated Tue, 22 May 2018 11:29 AM IST
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students said to MP CM Shivraj Singh Chouhan, Mamaji please do not bring caste into education
शिवराज सिंह चौहान
ऐसा अक्सर नहीं होता है कि आप शैक्षिक संस्थानों में आरक्षण और छात्रों की जाति के आधार पर मुफ्त लैपटॉप जैसी सुविधाएं देने जैसे संवेदनशील विषय पर एक मुख्यमंत्री से सवाल पूछ सकें। 
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चर्चित उपनाम का इस्तेमाल करते हुए कहा कि एक छात्र ने कहा, "मामाजी, कृपया जाति को शिक्षा में न लाएं।" छात्र ने यह शिकायत करते हुए कि कहा कि आरक्षित वर्ग के उसके एक दोस्त को लैपटॉप मिल जाएगा भले ही उसने उससे तीन फीसदी कम अंक लाए हैं। 
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मुख्यमंत्री कुछ समय के लिए असहज हो गए जब सवाल करने वाले बच्चे ने थोड़े आक्रामक तरीके से दोहराया 'मामाजी जाति, मामाजी जाति' और उसने काफी आश्चर्यच व्यक्त किया कि उसे लैपटॉप क्यों नहीं मिलेगा जब वह बराबर पढ़ाई करता है और 80 प्रतिशत अंक लाया है, अपने दोस्त से तीन प्रतिशत ज्यादा। 
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यह बातचीत तब हुई जब मुख्यमंत्री 'लाइव फोन इन' कार्यक्रम में राज्य के छात्रों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने भोपाल में मॉडल स्कूल ऑडिटोरियम में मौजूद छात्रों के भी सवालों का जवाब दिया। 

असुविधाजनक सवाल ने आधिकारियों को असहज कर दिया और उन्होंने तीन बार जाति पर जोर देकर मुख्यमंत्री की बात काटने वाले छात्र को चुप करने के लिए हस्तक्षेप किया। छात्र ने कहा कि 'कृपया इसे सभी के लिए बराबर बनाएं', जिस पर अन्य छात्र उसके समर्थन में आ गए। 

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हस्तक्षेप करने से मना कर दिया  और फिर जवाब देने के लिए कुछ सेकंड लेने के बाद उन्होंने आरक्षण को उचित ठहराया। चौहान ने कहा, "कुछ लोग बहुत पीछे छूट गए हैं और अगर उन्हें कुछ रियायतें दी जाती हैं तो हमें शिकायत नहीं करनी चाहिए।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "हमारे देश में विभिन्न रंगों के फूल हैं। हमें सभी की देखभाल करने और बचाने की आवश्यकता है। बड़े दिल वाला बनिए।" मुख्यमंत्री ने युवा छात्र को उन अन्य योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया जो  जाति पर आधारित नहीं हैं। 


एक और छात्र ने जाति के सवाल को उठाया कि क्यों केवल आरक्षित श्रेणी के छात्र सामान्य श्रेणी के छात्रों की तुलना में कम अंक लाने के बावजूद लैपटॉप जैसी रियायतों के लिए योग्य हैं। 
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