{"_id":"6ae80f9714dbeece780cf49f","slug":"sheopur-three-held-over-cheetah-cub-s-killing-in-kuno-guns-seized-stf-probes-hunting-network-2026-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीता शावक शिकार कांड का खुलासा: एसटीएफ ने ससुर और दो दामादों समेत तीन को किया गिरफ्तार, बंदूकें बरामद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चीता शावक शिकार कांड का खुलासा: एसटीएफ ने ससुर और दो दामादों समेत तीन को किया गिरफ्तार, बंदूकें बरामद
Mon, 02 Nov 2026 09:50 AM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Mon, 02 Nov 2026 09:50 AM IST
सार
कूनो नेशनल पार्क के बाहर चीता शावक को गोली मारने के मामले में एसटीएफ ने तीन संदिग्ध शिकारियों को हिरासत में लिया है। इनमें एक ससुर और उसके दो दामाद शामिल हैं। एसटीएफ के मुताबिक, पूछताछ में तीनों ने शिकार की बात स्वीकार की है।
विज्ञापन
चीता शावक का शिकार
- फोटो : Instagram
विस्तार
कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकले 19 माह के चीता शावक की गोली मारकर हत्या करने के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को बड़ी सफलता मिली है। एसटीएफ की टीम ने शिकार के आरोप में तीन लोगों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपितों में एक ससुर और उसके दो दामाद शामिल हैं। एसटीएफ का दावा है कि तीनों आरोपितों ने पूछताछ के दौरान चीता शावक का गोली मारकर शिकार करने की बात स्वीकार कर ली है। टीम ने आरोपितों के पास से बंदूकें भी बरामद कर ली हैं। अब जांच एजेंसी इन आरोपितों के संपर्कों और उनके पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है, ताकि जंगल में वन्यजीवों का शिकार करने वाले पूरे गिरोह तक पहुंचा जा सके।
विज्ञापन
वन विभाग के विजयपुर परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नितनवांस इलाके में 19 माह का चीता शावक गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला था, जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। जांच में सामने आया कि इस क्षेत्र में मुरैना और श्योपुर जिलों के कुछ गांवों से जुड़े शिकारी परिवार जंगलों में अवैध रूप से डेरा जमाकर रहते हैं।
विज्ञापन
जंगल में अवैध कब्जे और शिकार का नेटवर्क
एसटीएफ के मुताबिक हिरासत में लिए गए तीनों लोग जंगल काटकर खेती करने और वन्यजीवों के अवैध शिकार में लिप्त थे। ये शिकारी परिवार जंगलों में अवैध रूप से डेरा जमाकर रहते हैं और वन्यजीवों का शिकार कर उनके मांस व अन्य अवशेषों की तस्करी का काम करते हैं।
विज्ञापन
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि चीता शावक का शिकार करने के बाद उसके अवशेष कहां भेजे जाने थे और इस काम में इनके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। एसटीएफ की पड़ताल में सामने आया है कि यह परिवार लंबे समय से जंगल के भीतर इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।
ये भी पढ़ें: मध्यप्रदेश स्वामित्व योजना: धनतेरस पर गांव पहुंचेंगे मंत्री-विधायक, हाथों हाथ कराएंगे पात्रों की रजिस्ट्री
विभिन्न वन क्षेत्रों में फैले संदिग्ध ठिकाने
कूनो नेशनल पार्क और सामान्य वन मंडल के आसपास के जंगलों में शिकारियों के कई ठिकाने होने की जानकारी सामने आई है। इनमें मुरैना जिले का बहरारे और श्योपुर जिले के वीरपुर का धौरेट सरकार क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा इमलिया, नीमडांडा, मेटोनी, विजयपुर का नितनवांस, बालकदास बाबा के आश्रम के आसपास का इलाका, पनवाड़ा, श्यामपुर, नहरखेड़ा, धौंधा, रघुनाथपुर, ओछापुरा, सिरोनी और अगरा क्षेत्र में भी ऐसे डेरे बताए जाते हैं।
कूनो और आसपास के जंगलों में इससे पहले तेंदुओं के शिकार की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद जंगलों में अवैध रूप से घर और खेत बनाकर रह रहे कथित शिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। चीता शावक की मौत के मामले ने एक बार फिर कूनो के आसपास सक्रिय अवैध शिकार के नेटवर्क और वन क्षेत्र में अतिक्रमण की समस्या को उजागर किया है। अब जांच का फोकस केवल शिकार करने वालों तक सीमित न रखकर उनके पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर है।
सीमा लांघकर राजस्थान पहुंचा एक अन्य चीता
वहीं कूनो नेशनल पार्क से निकला एक अन्य चीता सीमा लांघकर राजस्थान तक पहुंच गया है। रविवार को बारां जिले के खेरूना गांव में ग्रामीणों ने उसे देखा और उसका वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दिया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों को सतर्क किया और क्षेत्र में चौकसी बढ़ा दी।
खेरूना गांव कैलवाड़ा रेंज के खटका नाका क्षेत्र में आता है। यह इलाका कूनो पार्क की राजस्थान सीमा से पूरी तरह सटा हुआ है। वन अधिकारियों के मुताबिक इससे पहले भी कूनो के चीते कई बार इस क्षेत्र में विचरण करते हुए पहुंच चुके हैं। वन विभाग की टीम इलाके में चीते की मौजूदगी पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।
