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एमपी: अब उज्जैन में होगी भगवान कृष्ण पर रिसर्च, बनेगी हाईटेक लाइब्रेरी; मंदिरों की जमीन से कमाई बढ़ाएगी सरकार!

Mon, 02 Nov 2026 07:08 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Mon, 02 Nov 2026 07:08 PM IST
सार

भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, विचारों और उनसे जुड़े स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार उज्जैन में अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी बनाएगी। इसके साथ ही कृष्ण पर वृत्तचित्र, नाटक और संगीत के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू होगा। मंदिरों की जमीन से आय बढ़ाकर उनकी व्यवस्था सुधारने की भी तैयारी है।

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MP: Krishna Research Library in Ujjain, Plan to Generate Income from Temple Land
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बैठक लेते हुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, विचारों और उनसे जुड़े स्थलों को लेकर मध्यप्रदेश में अब शोध और प्रचार-प्रसार की नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके तहत उज्जैन में भगवान श्रीकृष्ण पर केंद्रित अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी बनाई जाएगी। इसमें दुर्लभ पांडुलिपियों और शोध पत्रों को सुरक्षित रखने के साथ अध्ययन की सुविधा मिलेगी। वहीं, भगवान श्रीकृष्ण पर आधारित वृत्तचित्र, नाटक और संगीत कार्यक्रमों के लिए अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म और यूट्यूब चैनल शुरू करने की भी योजना है। खास बात यह है कि सरकार अब मंदिरों से जुड़ी जमीनों को भी मंदिरों की आय का स्रोत बनाने पर विचार कर रही है। इन जमीनों पर खेती के साथ व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। बड़े मंदिरों की आय का एक हिस्सा आसपास की गौशालाओं और वृंदावन गांवों की व्यवस्था सुधारने में लगाने का सुझाव भी दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय में श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की कार्यसमिति की बैठक में ये निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के विचार आज भी जीवन प्रबंधन, अर्थव्यवस्था, कृषि और गौ-संवर्धन जैसे क्षेत्रों में प्रासंगिक हैं। इसलिए इन विषयों पर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर विचार सत्र और संगोष्ठियां आयोजित की जानी चाहिए।
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कृष्ण से जुड़े स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी। इसके अलावा प्रदेश के कई स्थानों से उनका जुड़ाव रहा है। ऐसे सभी स्थानों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इन्हें तीर्थ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि श्रद्धालु इनसे जुड़ सकें। इन स्थानों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ मंदिरों का संरक्षण, जीर्णोद्धार और बेहतर प्रबंधन भी किया जाए। सरकार इस काम में कृष्ण भक्ति से जुड़ी संस्थाओं का सहयोग लेने की भी योजना बना रही है। मुख्यमंत्री ने मंदिरों में मौजूद जल संरचनाओं के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए जल गंगा अभियान के तहत काम कराने के निर्देश दिए।
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मंदिरों की जमीन से आय बढ़ाने पर जोर
बैठक में मंदिरों से जुड़ी जमीनों के बेहतर उपयोग का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिरों की भूमि का उपयोग उनकी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इसके लिए जमीनों पर कृषि और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। बड़े मंदिरों की आय का कुछ हिस्सा आसपास की गौशालाओं और वृंदावन गांवों की व्यवस्थाओं को सुधारने में खर्च करने पर भी विचार किया जाए। इससे मंदिरों की आय का उपयोग धार्मिक गतिविधियों के साथ स्थानीय व्यवस्थाओं को मजबूत करने में हो सकेगा। 

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3200 से ज्यादा मंदिरों के रखरखाव की योजना
बैठक में श्रीकृष्ण पाथेय योजना के तहत चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 3200 से अधिक मंदिरों के रखरखाव, प्रवेश द्वारों के निर्माण और श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़ी जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम के विकास और जीर्णोद्धार के लिए भूमि-पूजन भी हो चुका है। इसके अलावा नारायण धाम महिदपुर, श्रीकृष्ण धाम छतरपुर, जानापाव महू (इंदौर), अमझेरा (धार), मां जागेश्वरी लोक (चंदेरी), श्रीकृष्ण राधा लोक (पन्ना) और रायसेन जिले की जमगढ़ पहाड़ियों में चल रही विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
 

 
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