{"_id":"681eca0770ef876c910e450a","slug":"sehore-this-year-the-construction-of-maximum-687-farm-ponds-started-in-sehore-of-the-state-sehore-news-c-1-1-noi1381-2928856-2025-05-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sehore News: प्रदेश में सबसे ज्यादा 687 खेत-तालाब का निर्माण शुरू, बारिश का पानी बचेगा, सिंचाई में होगा लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sehore News: प्रदेश में सबसे ज्यादा 687 खेत-तालाब का निर्माण शुरू, बारिश का पानी बचेगा, सिंचाई में होगा लाभ
Sat, 10 May 2025 09:56 AM IST
सीहोर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Sat, 10 May 2025 09:56 AM IST
सार
खेत-तालाब के निर्माण में मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा तैयार कराया गया सिपरी सॉफ्टवेयर मददगार बना है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्थल चयन करने में आसानी हुई है।
विज्ञापन
बारिश के पानी का संचयन करने की कोशिश।
विस्तार
बारिश के पानी का संचयन करने और पुराने जल स्रोतों को नया जीवन देने के लिए प्रदेश में 90 दिवसीय जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इसमें प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा अंतर्गत खेत-तालाब, कूप रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर सहित अन्य निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। सीहोर जिले ने बड़े पैमाने पर खेत-तालाब बनाने की मिसाल पेश की है। इस वर्ष 2025 में प्रदेश में सबसे ज्यादा 687 से अधिक खेत-तालाब प्रारंभ हो चुके हैं।
विज्ञापन
जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत सीहोर जिले में लगभग 1670 खेत-तालाब के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 687 पर कार्य प्रारंभ हो गया है। इसी प्रकार 2600 कूप रिचार्ज पिट का निर्माण किया जाना है। निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा 2250 कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से 1440 पर कार्य भी प्रारंभ हो गया है। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत जिलों में चल रहे कार्यों की मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: छिंदवाड़ा में आमने-सामने से भिड़ीं दो बाइक, हादसे में पांच युवकों की मौत, इनमें दो एक ही परिवार के
विज्ञापन
किसानों ने भी दिखाई रुचि, सिंचाई में होगा फायदा
किसान अपने खेतों में अधिक से अधिक खेत-तालाब बनवाएं, इसके लिए जिला प्रशासन सीहोर की मेहनत रंग लाई है। खेत-तालाब को बनवाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को जागरूक किया गया। खेत-तालाब का महत्व बताया गया। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीणों ने पानी के महत्व को समझा और खेत-तालाब को बनवाने में रुचि दिखाई। खेत-तालाब बनने से किसानों को सिंचाई के लिए आसानी से पानी मिलेगा। साथ ही पानी बहने के बजाय जमीन में जाएगा। इससे कुओं और ट्यूबवेल का जलस्तर बढ़ेगा, जिसका फायदा किसानों को होगा।
ये भी पढ़ें: मध्य प्रदेश में आज भी आंधी, हल्की बारिश के आसार, 40 से अधिक जिलों में अलर्ट,4 दिन रहेगा असर
फसलों की सिंचाई के साथ कर सकेंगे मछली पालन
सीहोर जिले की जनपद पंचायत इछावर की ग्राम पंचायत हालियाखेड़ी के ग्राम बालापुरा के किसान पीयूष, बापू सिंह, हजारीलाल, रामप्रसाद ने बताया कि पथरीली व बंजर जमीन होने के साथ पानी की सुविधा भी नहीं थी। इस वजह से फसलों की सिंचाई नहीं हो पाती थी। अब गांव में खेत-तालाब बन जाने से फसलों की दो से तीन बार सिंचाई कर सकेंगे। साथ ही मत्स्य पालन सहित अन्य कार्य भी कर सकेंगे। किसानों ने गांव में खेत-तालाब बनने से खुशी जताई है। उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत हालियाखेड़ी में अब तक 7 खेत-तालाब बनाए जा चुके हैं और 5 प्रगतिरत हैं।
ये भी पढ़ें: प्रदेश सरकार को बड़ा फैसला, 13 शासकीय विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों की छुट्टी पर रोक
सिपरी सॉफ्टवेयर बना मददगार
जिला प्रशासन सीहोर के अनुसार, खेत-तालाब के निर्माण में मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा तैयार कराया गया सिपरी सॉफ्टवेयर मददगार बना है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्थल चयन करने में आसानी हुई है। सिपरी (Software for Identification and Planning of Rural Infrastructure) सॉफ्टवेयर एक उन्नत तकनीक का सॉफ्टवेयर है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जियोमार्फोलॉजी और हाइड्रोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके संरचनाओं का सही स्थान तय किया जा सकता है।
