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उज्जैन: खड़े हनुमान मंदिर पर महामंडलेश्वर की चेतावनी, यहीं रमाएंगे धुनी; देखें वीडियो
Thu, 10 Sep 2026 09:05 AM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 09:05 AM IST
सार
श्री खड़े हनुमान मंदिर को लेकर संत समाज और प्रशासन आमने-सामने हैं। महामंडलेश्वर अतुलेशानंद सरस्वती ने मंदिर हटाने का विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है, जबकि प्रशासन ने प्रतिमा को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।
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महामंडलेश्वर अतुलेशानंद सरस्वती
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
धर्मनगरी उज्जैन में श्री खड़े हनुमान मंदिर को लेकर विवाद गहरा गया है। मंदिर के बाहरी हिस्से को हटाए जाने और भगवान श्री खड़े हनुमान की प्रतिमा को विस्थापित करने के प्रयासों के विरोध में हिंदू संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। मामले को लेकर महामंडलेश्वर अतुलेशानंद सरस्वती (आचार्य शेखर) ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिंदू समाज अब किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेगा।
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महामंडलेश्वर अतुलेशानंद सरस्वती ने मंदिर की धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थान श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। उन्होंने दावा किया कि यहां धागा बांधने मात्र से असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों के ठीक होने की मान्यता है। उन्होंने नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों को धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान से बड़ा कोई पुरातत्वविद नहीं हो सकता।
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जिन्होंने हथौड़े चलाए, वे आज उठ नहीं पा रहे
महामंडलेश्वर ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पोकलेन, जेसीबी और क्रेन की मदद से मंदिर के बाहरी हिस्से को तोड़ा और भगवान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि तमाम कोशिशों के बावजूद प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। उन्होंने कहा कि शहर के विकास के लिए हिंदू समाज ने हमेशा सहयोग किया है और अब तक 40 से अधिक मंदिरों के विस्थापन को सहन किया है। इसके बावजूद प्रशासन इस छोटे से 4 बाय 4 फीट के स्थान को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन लोगों ने मंदिर का शिखर तोड़ा या हथौड़े चलाए, वे आज बीमार हैं और बिस्तर से उठने की स्थिति में नहीं हैं।
चाहे स्क्रीनिंग करें या कुछ भी, यहीं धुनी रमाएंगे
महामंडलेश्वर अतुलेशानंद सरस्वती ने प्रशासन के रवैये के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज और धार्मिक संगठन पूरी निष्ठा के साथ मौके पर डटे हुए हैं। प्रशासन चाहे स्क्रीनिंग करे या कोई अन्य कदम उठाए, मंदिर को यहां से नहीं हटने दिया जाएगा। संत समाज और श्रद्धालु यहीं धुनी रमाएंगे, भंडारा चलाएंगे। उन्होंने आगामी सिंहस्थ महाकुंभ की शुरुआत भी इसी पवित्र स्थान से करने की बात कही।
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देवभूमि में मंदिर तोड़ना सनातन पर आघात
आचार्य शेखर ने उज्जैन की पौराणिक और धार्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्जैन तीर्थ नगरी और देवभूमि है, जहां बाबा महाकाल विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि सात सागर और 84 महादेव की उपस्थिति इस भूमि को विशेष बनाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि राम और कृष्ण की इस भूमि पर शांतिपूर्वक पूजा-पाठ करने वाले सनातन धर्मावलंबियों के मंदिरों को यदि इस तरह हटाया जाएगा तो यह गंभीर विचार का विषय है।
प्रशासन ने कहा
आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और क्षेत्र में विकास कार्यों के बीच श्री खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को विस्थापित किए जाने की खबरों पर प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और प्रतिमा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। बिना विशेषज्ञों की तकनीकी जांच और संत समाज की सहमति के प्रतिमा को स्थानांतरित करने संबंधी कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
सोशल मीडिया पर लगातार यह दावा किया जा रहा था कि प्रशासन ने मशीनों और मानवीय प्रयासों के जरिए प्रतिमा को हटाने की कोशिश की है। प्रशासन ने इन दावों को भ्रामक और निराधार बताया है। प्रशासन के अनुसार अब तक प्रतिमा को हटाने या हिलाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।
प्रशासन ने बताया कि प्रतिमा की वर्तमान स्थिति और संरचना का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। विशेषज्ञों की तकनीकी राय मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि संत समाज की सहमति के बिना प्रतिमा के विस्थापन का कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
