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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Sagar: Major Scam in MSP Maize Procurement, Rs 76 Lakh Paid to Farmers Without Actual Purchase; One Arrested

सागर: समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदी में बड़ा घोटाला, बिना खरीदे किसानों के खातों में भेजे 76 लाख, एक गिरफ्तार

Wed, 16 Sep 2026 09:31 AM IST
सागर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: सागर ब्यूरो Updated Wed, 16 Sep 2026 09:31 AM IST
सार

समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदी में फर्जी दस्तावेजों के जरिए 343 मीट्रिक टन मक्का की खरीदी दिखाकर 17 किसानों के खातों में 76.31 लाख रुपए के भुगतान कराने का फर्जीवाड़ा सामने आया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर 19 सितंबर तक रिमांड पर लिया है।

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Sagar: Major Scam in MSP Maize Procurement, Rs 76 Lakh Paid to Farmers Without Actual Purchase; One Arrested
आरोपी हिरासत में - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देवरीकलां में समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदी में फर्जी दस्तावेजों के जरिए बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। भारत सरकार की इथेनॉल उत्पादन योजना के तहत हुई मक्का खरीदी में 343 मीट्रिक टन मक्का की खरीदी के दस्तावेज तैयार कर 17 किसानों के खातों में कुल 76 लाख 31 हजार 750 रुपए का भुगतान किए जाने का आरोप है। मामले में पुलिस ने गांधी वार्ड निवासी अतिशय जैन, पिता अवधेश जैन को रहली से गिरफ्तार किया है। अदालत ने आरोपी को 19 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा है।
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ऐसे सामने आया फर्जीवाड़ा 
पुलिस के मुताबिक वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश में मक्का से इथेनॉल उत्पादन के लिए समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था की गई थी। इसके तहत NCCF के दिल्ली मुख्यालय की ओर से एकता कंपनी को पोर्टल और खरीदी पार्टनर नियुक्त किया गया था। एकता कंपनी ने मक्का खरीदी के लिए फूड गार्ड फार्मर प्रोसेसिंग कंपनी लिमिटेड नाम से FPO का पंजीयन कराया था। FPO के डायरेक्टर मनीष पटेल ने खरीदी से जुड़े काम के लिए अतिशय जैन को नियुक्त किया था।
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पुलिस का आरोप है कि मिलीभगत के जरिए पोर्टल पर 343 मीट्रिक टन मक्का खरीदी से संबंधित दस्तावेज अपलोड किए गए। इसके आधार पर 17 किसानों के बैंक खातों में 76 लाख 31 हजार 750 रुपए की राशि ट्रांसफर कर दी गई।
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भौतिक सत्यापन में खुली पोल
मामले में उस समय सवाल खड़े हुए जब NCCF की ओर से धरातल पर भौतिक सत्यापन कराया गया। अनुबंध के मुताबिक मक्का का भंडारण शांडिल्य वेयरहाउस में होना था लेकिन जांच के दौरान वहां एक दाना मक्का भी भंडारित नहीं मिला।

देवरी थाने के उपनिरीक्षक समरथ सीनम के अनुसार पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेजों को लेकर जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक ये दस्तावेज FPO डायरेक्टर मनीष पटेल के मोबाइल से अपलोड किए गए थे। इसके लिए लॉगिन आईडी और OTP साझा किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।


चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
उपनिरीक्षक समरथ सीनम ने बताया कि मामले में 343 मीट्रिक टन मक्का की खरीदी के कागजी दस्तावेज तैयार कर 17 किसानों के खातों में भुगतान कराया गया था, जबकि मौके पर निर्धारित वेयरहाउस में मक्का का कोई भंडारण नहीं मिला। पुलिस ने इस मामले में कुल चार आरोपियों के खिलाफ नामजद प्रकरण दर्ज किया है। अतिशय जैन को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अब कथित फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क, मक्का के वास्तविक भौतिक अस्तित्व, किसानों के खातों में पहुंची राशि और उसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही भुगतान की गई राशि की रिकवरी को लेकर भी कार्रवाई की जा रही है।

 

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