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सागर जहरीली शराब कांड: 13 या 27 या फिर 50+ मौतें? सरकारी आंकड़ों और जमीनी दावों में इतना अंतर क्यों; जानें

Tue, 08 Sep 2026 01:36 PM IST
सागर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: सागर ब्यूरो Updated Tue, 08 Sep 2026 01:36 PM IST
सार

सागर के बंडा विधानसभा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर प्रशासन और विपक्ष के दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। प्रशासन आधिकारिक तौर पर 13 मौतों की पुष्टि कर रहा है, जबकि स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह संख्या 24 से 27 तक बताई जा रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया है कि जहरीली शराब से 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।

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Banda Toxic Liquor Tragedy: Administration Hides Death Toll While Reality Exposes False Claims
सागर जहरीली शराब कांड - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बुंदेलखंड के बंडा विधानसभा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मामला अब सियासत और प्रशासनिक दावों के बीच उलझकर रह गया है। एक ओर जहां प्रशासन मौतों का आंकड़ा 13 बताकर स्थिति सामान्य होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स, ग्रामीणों और विपक्षी दलों के दावे इन आंकड़ों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस त्रासदी में असली सच क्या है, इसे लेकर पूरे क्षेत्र में असमंजस और आक्रोश का माहौल है।
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प्रशासनिक दावे और मंत्रियों के दौरे
सागर दौरे पर आ रहे प्रदेश सरकार के मंत्रियों और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का आधिकारिक रुख अब भी मौतों के आंकड़े 13 पर अटका हुआ है। प्रशासन का तर्क है कि आधिकारिक रूप से अस्पतालों के रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही मौतों की पुष्टि की जा रही है। इसके अलावा, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) और अन्य स्थानीय अस्पतालों में लगभग 96 से अधिक गंभीर मरीज उपचाराधीन हैं, जिनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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स्थानीय मीडिया और विपक्ष के गंभीर आरोप
इसके विपरीत, धरातल पर स्थिति बेहद डरावनी है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अलग-अलग दावों के अनुसार, इस त्रासदी में मरने वालों का आंकड़ा 24 से 27 तक पहुंच चुका है। वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद सनसनीखेज दावा किया है कि सरकार सच छिपा रही है और जहरीली शराब से 50 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। पटवारी के अनुसार, कई परिवारों ने डर और प्रशासनिक दबाव के चलते शवों का चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया, जिससे ये मौतें सरकारी फाइलों में दर्ज नहीं हो पाईं।
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ये भी पढ़ें-  सागर में पहले अवैध शराब का कारोबार: फिर पुलिस की दबिश और 24 मौतें; जानें शिकायत से जान गंवाने तक का पूरा मामला

प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के इस भारी अंतर ने पीड़ित परिवारों के दर्द को और बढ़ा दिया है। जनता अब लाचारी के बीच बस यह जानना चाहती है कि आखिर इस त्रासदी में असल सच क्या है और मौतों के इन आंकड़ों के अंतर के पीछे जिम्मेदार कौन है।
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