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ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ की मुलाकात से मध्य प्रदेश में बने नए समीकरण
Wed, 18 Sep 2019 01:02 AM IST
संदीप भट्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संदीप भट्ट
Updated Wed, 18 Sep 2019 01:02 AM IST
सार
- सीएम प्रदेश अध्यक्ष के लिए सिंधिया या उनके समर्थक का कर सकते हैं समर्थन
- कमलनाथ पहले ही कर चुके हैं अध्यक्ष पद छोड़ने का एलान
- सिंधिया या उनके किसी समर्थक के नाम पर कमलनाथ कर सकते हैं समर्थन
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विस्तार
मध्य प्रदेश कांग्रेस में नेताओं के बीच खींचतान, मनमुटाव और दूरियां कम होती दिख रही है। इसकी शुरुआत पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से हुई, जिन्होंने मंगलवार को भोपाल में मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात की।
कांग्रेस नेतृत्व ने बारी-बारी राज्य के तीनों गुटों के नेताओं कमलनाथ, सिंधिया और दिग्विजय सिंह से बातचीत की थी। इसके बाद नेताओं की एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी और शिकायतों के बाद मामला अनुशासन समिति को सौंपा गया है।
पिछले दिनों कांग्रेस शासित मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में सोनिया गांधी ने सरकार और संगठन के बीच तालमेल बैठाने और आपस में बैठक कर जनता से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के निर्देश दिए थे। सिंधिया की कमलनाथ से मुलाकात के पीछे का कारण उनके क्षेत्र से संबंधित विकास कार्य बताए जा रहे हैं, जिन्हें गति दिलाने के लिए वे राजधानी भोपाल गए थे। स्पष्ट है कि दोनों नेताओं के बीच सरकार बनने के बाद से ही तल्खी रही है।
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पिछले दिनों सिंधिया समर्थक मंत्री उमंग सिंगार ने दिग्विजय का खुलकर विरोध और कमलनाथ का समर्थन किया था। दिग्विजय की मंत्रियों को लिखी चिट्ठी और हिसाब मांगना भी कमलनाथ को अखर गया था। जिसकी शिकायत उन्होंने नेतृत्व से की थी।
सिंधिया और कमलनाथ की मुलाकात के बाद राज्य में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। कमलनाथ अध्यक्ष पद छोड़ने की बात पहले कह चुके हैं। ऐसे में सिंधिया या उनके किसी समर्थक का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आने पर कमलनाथ समर्थन कर सकते हैं।
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कांग्रेस नेतृत्व ने बारी-बारी राज्य के तीनों गुटों के नेताओं कमलनाथ, सिंधिया और दिग्विजय सिंह से बातचीत की थी। इसके बाद नेताओं की एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी और शिकायतों के बाद मामला अनुशासन समिति को सौंपा गया है।
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पिछले दिनों कांग्रेस शासित मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में सोनिया गांधी ने सरकार और संगठन के बीच तालमेल बैठाने और आपस में बैठक कर जनता से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के निर्देश दिए थे। सिंधिया की कमलनाथ से मुलाकात के पीछे का कारण उनके क्षेत्र से संबंधित विकास कार्य बताए जा रहे हैं, जिन्हें गति दिलाने के लिए वे राजधानी भोपाल गए थे। स्पष्ट है कि दोनों नेताओं के बीच सरकार बनने के बाद से ही तल्खी रही है।
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पिछले दिनों सिंधिया समर्थक मंत्री उमंग सिंगार ने दिग्विजय का खुलकर विरोध और कमलनाथ का समर्थन किया था। दिग्विजय की मंत्रियों को लिखी चिट्ठी और हिसाब मांगना भी कमलनाथ को अखर गया था। जिसकी शिकायत उन्होंने नेतृत्व से की थी।
सिंधिया और कमलनाथ की मुलाकात के बाद राज्य में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। कमलनाथ अध्यक्ष पद छोड़ने की बात पहले कह चुके हैं। ऐसे में सिंधिया या उनके किसी समर्थक का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आने पर कमलनाथ समर्थन कर सकते हैं।
