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MP News: भोपाल गैस कांड की SC में फिर सुनवाई, सामाजिक संगठनों ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

Sun, 28 Aug 2022 12:15 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sun, 28 Aug 2022 12:15 PM IST
सार

भोपाल में दिसम्बर 1984 के यूनियन कार्बाइड हादसे की लंबित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई होगी। 29 अगस्त को होने वाली सुनवाई से पहले गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाले संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकार पर आकड़ों में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए है।

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MP News: SC to hear again in Bhopal gas tragedy, social organizations level serious allegations against the go
भोपाल गैस कांड की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी - फोटो : Social Media

विस्तार

भोपाल गैस पीड़ितों को मुआवजे के रूप में मिल चुकी 25 हजार रुपए की राशि कम आंकी गई है। सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई सुधार याचिका का उद्देश्य ही यह है कि मुआवजा राशि को नए सिरे से तय किया जाए। इन याचिकाओं में गैस पीड़ित संगठन भी याचिकाकर्ता है। भोपाल ग्रुप फॉर इनफार्मेशन एन्ड एक्शन की रचना ढिंगरा ने कहा कि मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार मौतों के वास्तविक आंकड़ों को पेश नहीं कर रही है। 2009 में सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि मौत का सही आकड़ा 23 हजार से ज्यादा है। अब सरकार सुप्रीम कोर्ट में सुधार याचिका में मनगढ़त 5 हजार आकड़े क्यों दे रही है। उन्होंने कहा कि इसे सुधारने की पहल क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार गैस की वजह से 93% पीड़ितों के सेहत को पहुंचे नुकसान को अस्थाई बता रही है। वैज्ञानिक रिपोर्ट और और गैस लगने की वजह से बहुसंख्यक पीड़ितों के स्वास्थ्य को अस्थाई नहीं बल्कि स्थाई नुकसान पहुंचा है। ढिंगरा ने कहा कि इन आकड़ों से मुआवजे के कई पात्र हकधार वंचित हो जाएंगे। 
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गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने कहा कि पिछले कुछ सालों में कम से कम चार मौकों पर राज्य और केंद्र सरकारों के मंत्रियों और अधिकारियों ने यह माना है कि सुधार याचिका में गैस हादसे की वजह से पहुंचे नुकसान के आंकड़े गलत थे और आंकड़ों को सुधारने के लिए वादे भी किए थे।
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भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्षा रशीदा बी ने कहा कि हम संगठन भी इस मामले में राज्य और केंद्र सरकारों के साथ याचिकाकर्ता है | हम अतिरिक्त मुआवजे के रूप में 646 अरब रूपए मांग रहे हैं जबकि सरकारें मात्र 96 अरब रूपए मांग रही हैं | अब वक्त आ गया है कि अपने कानूनी अधिकारों पर हो रहे इस हमले के खिलाफ भोपाल के गैस पीड़ित फिर से सक्रिय हो जाए।
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