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घटिया सड़क निर्माण: ठेकेदार के 26 करोड़ रुपये भुगतान पर रोक, सड़क के सभी सैंपल फेल होने पर हाईकोर्ट सख्त
Tue, 06 Oct 2026 07:43 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Tue, 06 Oct 2026 07:43 PM IST
सार
ग्वालियर हाईकोर्ट ने घटिया सड़क निर्माण की तकनीकी रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित ठेकेदार के करीब 26 करोड़ रुपये के भुगतान पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे शराब दुकानों के संचालन की नीति पर भी सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से सात दिन में विस्तृत जवाब मांगा है।
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एमपी हाईकोर्ट से एनएचएआई को झटका
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने सड़क निर्माण की घटिया गुणवत्ता पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को बड़ा झटका दिया है। न्यायालय ने सड़क निर्माण से जुड़े मामले में संबंधित ठेकेदार को किए जाने वाले करीब 26 करोड़ रुपये के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी है।
उच्च न्यायालय ने यह कड़ा आदेश सड़क के नमूनों की तकनीकी जांच रिपोर्ट संतोषजनक नहीं मिलने के बाद जारी किया है। परीक्षण में सड़क निर्माण से जुड़े सभी सैंपल की रिपोर्ट नकारात्मक आई है। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे शराब दुकानों के संचालन पर भी गंभीर चिंता जताई। न्यायालय ने राजमार्ग के समीप शराब दुकानों को अनुमति देने वाली सरकारी नीति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य शासन से सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है।
ये भी पढ़ें- महिलाओं को कम आंकना लैंगिक पूर्वाग्रह, निचली अदालत के तर्क पर हाईकोर्ट सख्त
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जांच रिपोर्ट में खुली निर्माण की पोल
घटिया सड़क निर्माण और निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता को लेकर कैलाश चंद अग्रवाल ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका में बेटी बचाओ चौराहा से लेकर गुढ़ा-गुढ़ी का नाका मार्ग सहित ग्वालियर शहर की विभिन्न प्रमुख सड़कों के निर्माण कार्य और उनकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पिछली सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने विशेष जांच आयोग का गठन किया था। आयोग को निर्मित सड़कों के अलग-अलग हिस्सों से नमूने एकत्र कर उनकी गहन तकनीकी जांच कराने का निर्देश दिया गया था। आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया ने सड़कों का एनएसवी निरीक्षण कराया और नमूनों की जांच कराकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। आयोग ने \तकनीकी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की, जिसमें निर्माण के मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
घटिया गुणवत्ता पर भुगतान रोकने का आदेश
जनहित याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान जब न्यायालय के सामने आयोग की रिपोर्ट रखी गई, तो उसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सड़क के सभी नमूनों की लैब टेस्ट रिपोर्ट पूरी तरह नकारात्मक आई और निर्माण सामग्री तय मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। सड़क निर्माण की गुणवत्ता अत्यंत खराब मिलने पर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया। उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक धन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से संबंधित ठेकेदार को दिए जाने वाले करीब 26 करोड़ रुपये के भुगतान पर अंतरिम रोक लगा दी।
राजमार्ग किनारे शराब दुकान पर सरकार से जवाब तलब
सड़क की गुणवत्ता पर सुनवाई के दौरान ही सिकरौदा चौराहे के पास राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी शराब दुकान का मुद्दा भी पीठ के समक्ष उठा। राजमार्ग पर यात्रियों और वाहनों की सुरक्षा को देखते हुए न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने इस पर गहरा असंतोष जताया। न्यायालय ने चिंता व्यक्त करते हुए सवाल किया कि किस नीति के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के निकट शराब दुकानों के संचालन की अनुमति दी जा रही है।
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उच्च न्यायालय ने यह कड़ा आदेश सड़क के नमूनों की तकनीकी जांच रिपोर्ट संतोषजनक नहीं मिलने के बाद जारी किया है। परीक्षण में सड़क निर्माण से जुड़े सभी सैंपल की रिपोर्ट नकारात्मक आई है। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे शराब दुकानों के संचालन पर भी गंभीर चिंता जताई। न्यायालय ने राजमार्ग के समीप शराब दुकानों को अनुमति देने वाली सरकारी नीति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य शासन से सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है।
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जांच रिपोर्ट में खुली निर्माण की पोल
घटिया सड़क निर्माण और निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता को लेकर कैलाश चंद अग्रवाल ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका में बेटी बचाओ चौराहा से लेकर गुढ़ा-गुढ़ी का नाका मार्ग सहित ग्वालियर शहर की विभिन्न प्रमुख सड़कों के निर्माण कार्य और उनकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पिछली सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने विशेष जांच आयोग का गठन किया था। आयोग को निर्मित सड़कों के अलग-अलग हिस्सों से नमूने एकत्र कर उनकी गहन तकनीकी जांच कराने का निर्देश दिया गया था। आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया ने सड़कों का एनएसवी निरीक्षण कराया और नमूनों की जांच कराकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। आयोग ने \तकनीकी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की, जिसमें निर्माण के मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
घटिया गुणवत्ता पर भुगतान रोकने का आदेश
जनहित याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान जब न्यायालय के सामने आयोग की रिपोर्ट रखी गई, तो उसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सड़क के सभी नमूनों की लैब टेस्ट रिपोर्ट पूरी तरह नकारात्मक आई और निर्माण सामग्री तय मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। सड़क निर्माण की गुणवत्ता अत्यंत खराब मिलने पर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया। उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक धन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से संबंधित ठेकेदार को दिए जाने वाले करीब 26 करोड़ रुपये के भुगतान पर अंतरिम रोक लगा दी।
राजमार्ग किनारे शराब दुकान पर सरकार से जवाब तलब
सड़क की गुणवत्ता पर सुनवाई के दौरान ही सिकरौदा चौराहे के पास राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी शराब दुकान का मुद्दा भी पीठ के समक्ष उठा। राजमार्ग पर यात्रियों और वाहनों की सुरक्षा को देखते हुए न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने इस पर गहरा असंतोष जताया। न्यायालय ने चिंता व्यक्त करते हुए सवाल किया कि किस नीति के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के निकट शराब दुकानों के संचालन की अनुमति दी जा रही है।
