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Jabalpur: पैर मेज पर थे तो फिर कैसे लगाई फांसी? दोषी दहेज हत्या से मुक्त, कत्ल के अपराध में आजीवन कारावास
Fri, 10 Feb 2023 04:21 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मध्य प्रदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मध्य प्रदेश
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Fri, 10 Feb 2023 04:21 PM IST
सार
हाई कोर्ट में अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी युवक दहेज के लिए महिला को प्रताड़ित करता था। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि परिस्थितिजनक साक्ष्य हत्या के अपराध को इंगित कर रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को हत्या का दोषी मानते हुए सजा सुना दी।
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट
विस्तार
जबलपुर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक आरोपी को हत्या के अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पुलिस ने आरोपी शख्स के खिलाफ दहेज हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि गर्भवृती मृतका के पैर लकड़ी की मेज पर स्थिर अवस्था में थे।
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दहेज हत्या के आरोप में दर्ज हुआ मामला
अभियोजन के अनुसार, गोहलपुर थानांतर्गत समता कॉलोनी में मामा के घर किराए पर रहने वाले सोनू उर्फ राहुल ठाकुर ने 24 जनवरी 2013 को प्रिया ठाकुर से प्रेम विवाह किया था। पति ने दहेज में एक लाख रुपये की मांग करते हुए उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था। इस कारण प्रिया ने छह फरवरी 2014 को घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ धारा 304बी, 498 तथा दहेज अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया था।
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सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया गया कि आरोपी तथा उसकी पत्नी के बीच 31 जनवरी 2014 को स्वेच्छा से तलाक हो गया था। स्टांप पेपर में दोनों ने नोटरी के समक्ष तलाक लिया था। तलाक के बाद महिला अपने मायके चली गई थी। घटना के दिन आरोपी विवाह समारोह में गया था। इस दौरान महिला उनके घर में आई और कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
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दहेज के लिए प्रताड़ना का आरोप साबित नहीं कर सका अभियोजन
अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी युवक दहेज के लिए महिला को प्रताड़ित करता था। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि परिस्थितिजनक साक्ष्य हत्या के अपराध को इंगित कर रहे हैं। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपी का कथन है कि जब वह शादी से लौटा से मामा ने उसे सूचित किया कि प्रिया ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। मकान मालिक मामा का कथन है कि शादी से लौटने के बाद आरोपी अपने कमरे में गया तो देखा कि प्रिया फांसी के फंदे पर लटकी हुई है।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपी युवक यह नहीं बता पाया कि वह किसकी और कहां शादी समारोह में गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार महिला के गृभ में चार माह का भ्रूण था। तलाक लेने के दौरान मौजूद गवाह के हस्ताक्षर नहीं करवाए गए। नोटरी करने वाले अधिवक्ता के भी हस्ताक्षर नहीं करवाए थे, जिससे प्रमाणित हो कि स्टांप पेपर पर प्रिया के हस्ताक्षर थे।
अदालत ने परिस्थितिजनक साक्ष्यों के आधार पर सुनाई सजा
परिस्थितिजनक साक्ष्यों के आधार पर मृतका के पैर लकड़ी की मेज पर स्थिर अवस्था में थे। जब पैर मेज पर थे तो फिर फांसी कैसे लगा सकती है। महिला के शरीर में चोट के निशान थे। न्यायालय ने परिस्थितिजनक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास तथा 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया है।
