{"_id":"623c3024bf73c51de05d51c3","slug":"megha-parmar-s-new-record-set-a-world-record-by-doing-45m-technical-scuba-diving","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"MP की मेघा परमार ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड: एवरेस्ट फतह करने के साथ स्कूबा डाइविंग करने वाली विश्व की पहली महिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP की मेघा परमार ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड: एवरेस्ट फतह करने के साथ स्कूबा डाइविंग करने वाली विश्व की पहली महिला
Thu, 24 Mar 2022 02:52 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Thu, 24 Mar 2022 02:52 PM IST
सार
मध्य प्रदेश की बेटी मेघा परमार ने स्कूबा डाइविंग कर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। वे माउंट एवरेस्ट फतह करने के साथ ही स्कूबा डाइविंग में सफल होने वालीं दुनिया की पहली महिला बन गई हैं।
विज्ञापन
मेघा परमार ने स्कूबा डाइविंग कर बनाया नया वर्ल्ड रिकॉर्ड।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्य प्रदेश की बेटी मेघा परमार ने स्कूबा डाइविंग कर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। वे माउंट एवरेस्ट फतह करने के साथ ही स्कूबा डाइविंग में सफल होने वालीं दुनिया की पहली महिला बन गई हैं। हाल ही में मेघा ने 147 फीट (45 मीटर) की टेक्निकल स्कूबा डाइविंग कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। मेघा अब विश्व की पहली महिला बन गई हैं जिन्होंने माउंट एवरेस्ट को फतह किया है और साथ-साथ टेक्निकल स्कूबा डाइविंग में समुद्र के अंदर 45 मीटर की गहराई तक डाइव की है।
मेघा परमार स्कूबा डाइविंग और माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली महिला बनी।
- फोटो : अमर उजाला
4 महाद्वीप फतह कर चुकी हैं मेघा
मेघा परमार विश्व की पहली महिला हैं, जिन्होंने 4 महाद्वीप के शिखरों को फतह किया है। वे मध्य प्रदेश शासन के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी हैं। सिहोर जिले की रहने वालीं मेघा परमार ने 2019 में माउंट एवरेस्ट फतह किया था और प्रदेश की पहली महिला बनी थीं। मेघा परमार ने ये रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान को समर्पित किया है।
मेघा परमार विश्व की पहली महिला हैं, जिन्होंने 4 महाद्वीप के शिखरों को फतह किया है। वे मध्य प्रदेश शासन के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी हैं। सिहोर जिले की रहने वालीं मेघा परमार ने 2019 में माउंट एवरेस्ट फतह किया था और प्रदेश की पहली महिला बनी थीं। मेघा परमार ने ये रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान को समर्पित किया है।
सीएम शिवराज सिंह चौहान के साथ मेघा परमार।
- फोटो : अमर उजाला
अर्जेटीना के कोच से ली ट्रेनिंग
स्कूबा डाइविंग के लिए मेघा परमार बीते डेढ़ साल तैयारी कर रहीं थीं। उन्होंने हर दिन 8 घंटे प्रैक्टिस की और कुल 134 बार डाइविंग की। मेघा परमार ने बताया कि मेरे पास भारत से बाहर जाकर ट्रेनिंग करने का विकल्प था, क्योंकि भारत में इसके लिए कोच नहीं मिलते इसलिए अर्जेंटीना से कोच वॉल्टर को भारत बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे मैं ईश्वर की शक्ति और सभी स्पॉन्सर का धन्यवाद करती हूं, जिनके माध्यम से यह संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि जब मैंने माउंट एवरेस्ट पर मध्य प्रदेश की बेटी के रूप में तिरंगा झंडा फहराया तो उस वक्त मन में संकल्प लिया था कि एक दिन देश की बेटी बनकर तिरंगा लहराऊं। मेरे मन में था कि पर्वत चढ़ लिया लेकिन अब समुद्र की गहराई में जाकर तिरंगा लहराऊं। मुझे पता चला कि इसके लिए टेक्निकल स्कूबा डाइविंग करनी पड़ेगी, जो बहुत कठिन होती है। लेकिन मेरे मन में दृढ़ संकल्प था, जिसे मैं अपनी मेहनत से पूरा करना चाहती थी।
स्कूबा डाइविंग के लिए मेघा परमार बीते डेढ़ साल तैयारी कर रहीं थीं। उन्होंने हर दिन 8 घंटे प्रैक्टिस की और कुल 134 बार डाइविंग की। मेघा परमार ने बताया कि मेरे पास भारत से बाहर जाकर ट्रेनिंग करने का विकल्प था, क्योंकि भारत में इसके लिए कोच नहीं मिलते इसलिए अर्जेंटीना से कोच वॉल्टर को भारत बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे मैं ईश्वर की शक्ति और सभी स्पॉन्सर का धन्यवाद करती हूं, जिनके माध्यम से यह संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि जब मैंने माउंट एवरेस्ट पर मध्य प्रदेश की बेटी के रूप में तिरंगा झंडा फहराया तो उस वक्त मन में संकल्प लिया था कि एक दिन देश की बेटी बनकर तिरंगा लहराऊं। मेरे मन में था कि पर्वत चढ़ लिया लेकिन अब समुद्र की गहराई में जाकर तिरंगा लहराऊं। मुझे पता चला कि इसके लिए टेक्निकल स्कूबा डाइविंग करनी पड़ेगी, जो बहुत कठिन होती है। लेकिन मेरे मन में दृढ़ संकल्प था, जिसे मैं अपनी मेहनत से पूरा करना चाहती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्कूबा डाइविंग के लिए मेघा परमार ने हर दिन 8 घंटे प्रैक्टिस की।
- फोटो : अमर उजाला
मेघा ने कहा कि पहले मुझे स्वीमिंग तक नहीं आती थी, इसके लिए स्वीमिंग की ट्रेनिंग लेनी पड़ी। फिर उसके बाद लगातार डेढ साल तक हर दिन 8 घंटे ट्रेनिंग की। स्कूबा डाइविंग के सभी कोर्स किए इस दौरान 134 डाइव की। इसमें जान जाने के जोखिम होते हैं। जो ऑक्सीजन धरती पर इंसान के लिए अमृत रहती है वहीं समुद्र में शरीर के अंदर ज्यादा मात्रा में हो जाने पर जान पर बन आती है। जिससे इसांन पैरालिसिस जैसी अन्य गंभीर बीमारी का शिकार हो सकता है। और जान भी जा सकती है। इस खेल में आपको शारीरिक रूप से ज्यादा मानसिक तौर पर ज्यादा मजबूत होना पड़ता है। कई बार डाइव की तैयारी में मेरे पैरों पर 11-11 किलो के सिलेंडर गिरे जिससे गंभीर चोटों का सामना करना पड़ा। मेरे लिए सबसे मुश्किल पूरे सफर में पढ़ाई कर टेक्निकल डाइविंग का एग्जाम पास करना था, जिसमें फिजिक्स एवं मैथ्स के जटिल सवालों का अध्ययन करना पड़ता था।
