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महेश्वर: अजा-जजा एक्ट के चार आरोपी दोषमुक्त, कोर्ट ने दिए टीआई गोयल समेत पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच के आदेश

Tue, 06 Oct 2026 11:10 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेश्वर Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 06 Oct 2026 11:10 PM IST
सार

महेश्वर के मंडलेश्वर विशेष न्यायालय ने एससी-एसटी एक्ट मामले में चार आरोपियों को दोषमुक्त कर पुलिस विवेचना पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज नहीं करने और जांच में कमियां मिलने का उल्लेख किया। तत्कालीन जांच अधिकारी जगदीश गोयल समेत संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच के लिए फैसला एसपी खरगोन को भेजने के निर्देश दिए।

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maheshwar sc-st act case four accused acquitted court orders police inquiry
मंडलेश्वर न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मंडलेश्वर स्थित विशेष न्यायालय ने अजा-जजा एक्ट से जुड़े करीब चार वर्ष पुराने मामले में चार आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए पुलिस की विवेचना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायालय ने तत्कालीन जांच अधिकारी निरीक्षक जगदीश गोयल तथा अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा की गई कार्रवाई को प्रथमदृष्ट्या विधिसम्मत नहीं माना है। न्यायालय ने मामले में उचित जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए निर्णय की प्रति पुलिस अधीक्षक खरगोन को भेजने के निर्देश दिए हैं।
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विशेष न्यायाधीश अमित रंजन समाधिया ने छह अक्तूबर को सुनाए फैसले में कहा कि विवेचना के दौरान घटनास्थल के स्वतंत्र गवाहों से पूछताछ नहीं की गई। जांच अधिकारी जगदीश गोयल द्वारा मुख्य रूप से शिकायतकर्ता बलराम, उसकी मां समोतीबाई और बहन साजना के बयान दर्ज किए गए, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार घटना के समय सरपंच दौलत और उसका बेटा प्रियंशु भी मौके पर मौजूद थे। न्यायालय ने इन बिंदुओं को विवेचना की कमी माना। मामला 20 अक्तूबर 2022 को बागफल गांव में हुई कथित मारपीट से संबंधित था। पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं तथा एससी-एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर चालान पेश किया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। फैसले में पुलिस कार्रवाई को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां दर्ज की गईं।
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न्यायालय ने कहा कि जांच अधिकारी जगदीश गोयल द्वारा की गई विवेचना उचित तरीके से की गई प्रतीत नहीं होती। फैसले में यह भी उल्लेख है कि घटनास्थल के स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए गए और बाह्य उपचार संबंधी दस्तावेज मिलने के बावजूद इस दिशा में पर्याप्त जांच नहीं की गई। न्यायालय ने पुलिस द्वारा की गई मारपीट के तथ्य को छिपाने का प्रयास किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया।

फैसले के अनुसार, न्यायालय ने पुलिस आरक्षक कुशल सोनी और पुलिस द्वारा शिकायतकर्ता बलराम के साथ की गई कथित मारपीट से बचाने के लिए उसके साथ मिलकर आरोपियों के खिलाफ अपराध बनाए जाने की संभावना का भी उल्लेख किया। हालांकि, न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अपराध प्रमाणित नहीं माना और चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि दोषपूर्ण अथवा अवैध विवेचना पाए जाने पर विचारण न्यायालय वरिष्ठ अधिकारियों को अनुशासनात्मक एवं अन्य आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित कर सकता है। इसी आधार पर जगदीश गोयल सहित संबंधित पुलिसकर्मियों को सुनवाई का उचित अवसर देते हुए यथोचित जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए निर्णय की प्रति एसपी खरगोन को भेजने तथा की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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