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हाई प्रोफाइल जीवन छोड़ गांव-गांव घूमकर साध्वी दे रही शिक्षा
amarujala.com, Presented by: मुकेश झा
Updated Tue, 29 Aug 2017 04:41 PM IST
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साध्वी जिनप्रज्ञाश्रीजी
इंदौर के एक व्यक्ति ने अपनी नातिन को जैन धर्म की दीक्षा लेने से मना कर दिया। उन्होंने कहा चाहे तुम बंगला, गाड़ी या करोड़ों रुपये ले लो लेकिन दीक्षा मत लो। यदि तुम्हारी इच्छा है कि धर्म का प्रचार-प्रसार करना है तो सांसारिक जीवन में रहकर ही करो। लेकिन नातिन ने अपने नाना की बात को ठुकरा दी।
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दरअसल, यहां जिसकी बात हो रही है उसका नाम साध्वी जिनप्रज्ञाश्रीजी है। वो पिछले पिछले 15 साल से गांव-गांव, शहर-शहर घूमकर जैन धर्म की शिक्षा दे रही हैं। बता दें कि दीक्षा से पहले वे कास्मेटिक के क्षेत्र में व्यवसाय करती थी। जिसका टर्न ओवर 70 लाख सालाना था।
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व्यवसाय से पहले हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड में सेल्स के क्षेत्र में उंचे ओहदे पर कुछ वर्ष सेवाएं दी। 15 साल पहले साध्वी प्रशामिताश्रीजी से अहमदाबाद में दीक्षा ली। वो कहती है कि शुरू से वे खुले विचारों की रही है। उन्हें स्वतंत्र रहना पसंद था। गुरु के एक सवाल ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया।
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गौरतलब है कि साध्वी जिनप्रज्ञाश्रीजी 25 पुस्तकें लिख चुकी हैं। उनके पास 9 भाषाओं की जानकारी है। 11 साल की उम्र में सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड मिला। इसके साथ-साथ शास्त्री संगीत की विशेष जानकारी होने के चलते बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया के साथ वे संगत भी कर चुकी हैं।
साध्वी जिनप्रज्ञाश्रीजी ने अब तक गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बंगाल,बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश सहित देशभर में 30 हजार किलोमीटर की पदयात्रा कर चुके हैं। 25 जैन धार्मिक पुस्तकों का लेखन और संपादन किया है।
