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मप्र हाईकोर्ट: व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर महिला कलेक्टर ने माफी मांगी, दी आदेश के परिपालन की जानकारी

Wed, 30 Sep 2026 09:36 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 30 Sep 2026 09:36 PM IST
सार

अवमानना याचिका में गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पन्ना कलेक्टर उषा परमार हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुईं। उन्होंने बिना शर्त माफी मांगते हुए आदेश का पालन किए जाने की जानकारी दी। जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने आग्रह स्वीकार कर गिरफ्तारी वारंट निरस्त किया और अवमानना याचिका का निराकरण कर दिया। 

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Appearing in person, female Collector apologized and provided information regarding compliance with order
मप्र हाईकोर्ट

विस्तार

वमानना याचिका में जारी गिरफ्तारी वारंट के बाद पन्ना कलेक्टर उषा परमार बुधवार को हाईकोर्ट में जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं। कलेक्टर ने बिना शर्त माफी मांगते हुए हाईकोर्ट के आदेश का पालन किए जाने की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी वारंट निरस्त करने का आग्रह किया, जिसे एकलपीठ ने स्वीकार कर लिया। वारंट निरस्त करते हुए अदालत ने अवमानना याचिका का निराकरण कर दिया।

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यह मामला सेवानिवृत्त कर्मचारी जाविन आरा रिजवी की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ता पन्ना कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत थीं। नियमितीकरण और अन्य वेतन संबंधी लाभ दिए जाने की मांग को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को याचिका का निराकरण करते हुए याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर 90 दिनों के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। आदेश का पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की गई थी।
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गैर-जमानती वारंट जारी करने के दिए थे निर्देश
अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने पाया कि 4 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी होने के बावजूद कलेक्टर की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई और न ही आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। कलेक्टर ने 5 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर नोटिस मिलने की जानकारी दी थी। साथ ही कलेक्टर कार्यालय की स्थापना शाखा के प्रभारी अधिकारी को मामले के लिए संपर्क अधिकारी नियुक्त किया गया था, लेकिन इसके बाद आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए कलेक्टर की उपस्थिति सुनिश्चित करने और आदेश का पालन कराने के लिए गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने का निर्देश दिया था। वारंट की तामील की जिम्मेदारी पन्ना पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई थी।

आदेश पालन की जानकारी दी
बुधवार की सुनवाई में कलेक्टर उषा परमार स्वयं अदालत में उपस्थित हुईं। उन्होंने आदेश का पालन किए जाने की जानकारी देते हुए बिना शर्त माफी मांगी और गिरफ्तारी वारंट निरस्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। एकलपीठ ने आवेदन स्वीकार करते हुए वारंट निरस्त कर दिया और अवमानना याचिका का निराकरण कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विद्या प्रसाद ने पैरवी की।

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