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Jabalpur News: गर्भपात से नाबालिग पीड़िता व गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को खतरा, हाईकोर्ट ने नहीं दी अनुमति
Sun, 12 Oct 2025 04:12 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Oct 2025 04:12 PM IST
सार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 15 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के 36 सप्ताह की गर्भावस्था पर गर्भपात की अनुमति से इनकार किया, क्योंकि यह माँ और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा हो सकता था। कोर्ट ने बच्चे के जन्म की अनुमति दी और निर्देश दिया कि जन्म के बाद उसे 15 दिन माँ के पास रखकर सीडब्ल्यूसी को सौंपा जाए।
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गर्भपात से नाबालिग पीड़िता व गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को खतरा
विस्तार
नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था 36 सप्ताह से अधिक है और उसके गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को गर्भपात से जान का खतरा है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए अपने आदेश में कहा कि गर्भ में पल रहा शिशु लगभग नौ माह का है और जीवित है। ऐसी परिस्थिति में गर्भपात की अनुमति प्रदान करना व्यवहारिक नहीं होगी।
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दरअसल सतना जिला न्यायालय ने 15 साल 8 माह की दुष्कर्म पीड़िता के गर्भवती होने के संबंध में हाईकोर्ट को पत्र के माध्यम से सूचित किया था। हाईकोर्ट ने पत्र की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में करते हुए पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए थे। मेडिकल बोर्ड द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि पीड़िता की गर्भावस्था 36 सप्ताह की है और उसका हिमोग्लोबिन निर्धारित से कम है। पीड़िता तथा उसके अभिभावक को गर्भपात के सभी पहलुओं के संबंध में बताया गया। गर्भावस्था अधिक होने के कारण गर्भपात में पीड़ित तथा शिशु दोनों को जान का खतरा है। इसके बाद पीड़िता तथा उसके अभिभावक ने बच्चे को जन्म देने के लिए सहमति प्रदान कर दी है, लेकिन वह बच्चे को साथ में नही रखना चाहते हैं। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ पीड़िता की सहमति से बच्चे को जन्म देने अनुमति प्रदान की। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि बच्चे के जीवित पैदा होने पर स्तनपान के लिए 15 दिनों तक पीड़िता के पास रखा जाए। इसके बाद उसे सीडब्ल्यूसी सतना के अधिकारियों को सौंप दिया जाए। बच्चे के पालन-पोषण के लिए हरसंभव सावधानी बरती जाए। सीडब्ल्यूसी को बच्चे को किसी भी इच्छुक परिवार को गोद देने या राज्य सरकार को सौंपने की स्वतंत्रता होगी।
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