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MPPSC मेंस 2025: हाईकोर्ट ने रोक हटाई, अभ्यर्थियों को मिली राहत, अगली सुनवाई 17 जुलाई को

Thu, 18 Jun 2026 11:16 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर/इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर/इंदौर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 18 Jun 2026 11:16 PM IST
सार

याचिकाओं में उठाए गए आरक्षण, मेरिट और माइग्रेशन से जुड़े मूल कानूनी प्रश्न अभी भी विचाराधीन हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 17 जुलाई को निर्धारित की गई है।

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MP High Court lifts stay on MPPSC State Services Mains Exam 2025
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मप्र हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग यएमपी.पीएससीद्ध राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 (एमपीपीएससी मेंस 2025) के आयोजन का रास्ता आखिरकार साफ कर दिया है। न्यायालय ने गुरुवार को मुख्य परीक्षा पर 25 मार्च से लागू अंतरिम स्थगन आदेश समाप्त कर दिया।

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गौरतलब है कि राज्य सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम और आरक्षण नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से स्वयं यह आग्रह किया गया कि मुख्य परीक्षा पर लगी रोक हटाई जाए ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित नही हो।
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इन सभी आधार पर लगी थी रोक
याचिकाओं में वर्गवार कट ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं करने, आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को अनारक्षित पदों पर चयनित नहीं किए जाने तथा आयु सीमा जैसी छूट लेने वाले अभ्यर्थियों के अनारक्षित वर्ग में माइग्रेशन संबंधी नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। इन्हीं याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने 25 मार्च और दो अप्रैल 2025 को मुख्य परीक्षा के आयोजन पर रोक लगा दी थी।
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17 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
गुरुवार को यह मामला युगलपीठ के समक्ष सूचीबद्ध था लेकिन देर शाम तक सुनवाई नहीं हो सकी। इस पर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने निवेदन किया कि अंतरिम आदेश समाप्त कर दिया जाए और शेष कानूनी मुद्दों पर अलग से सुनवाई की जाए। युगलपीठ ने अनुरोध स्वीकार करते हुए लोक सेवा आयोग को मुख्य परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी। हालांकि याचिकाओं में उठाए गए आरक्षण, मेरिट और माइग्रेशन से जुड़े मूल कानूनी प्रश्न अभी भी विचाराधीन हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 17 जुलाई को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह व पुष्पेद्र कुमार शाह ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा। जबकि पीएससी की ओर से अधिवक्ता पराग तिवारी खड़े हुए।

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