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Indore: 'पानी बचाना हम सबका दायित्व', वर्ल्ड वॉटर डे पर सेमिनार में भूजल वैज्ञानिक ने समझाया जल का मोल
Fri, 22 Mar 2024 08:49 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 22 Mar 2024 08:49 PM IST
सार
देश के जाने माने हाइड्रोलॉजिस्ट सुधींद्र मोहन शर्मा ने कहा कि पृथ्वी पर 70 प्रतिशत जल है। वहीं मनुष्य के शरीर में भी 70 फीसदी जल है। जल पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन सही प्रबंधन नहीं होने से जल समस्या बनी हुई है।
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वर्ल्ड वॉटर डे पर इंदौर में सेमिनार का आयोजन किया गया।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
इंदौर में वर्ल्ड वॉटर डे पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें युवाओं को पानी की कीमत और आने वाले समय में किस तरह पानी को सहेजकर रखना होगा, विषय पर समझाइश दी गई।
सेमिनार में मुख्य अतिथि प्रसिद्ध भूजल वैज्ञानिक सुधींद्र मोहन शर्मा उपस्थित थे। देश के जाने माने हाइड्रोलॉजिस्ट सुधींद्र मोहन शर्मा ने कहा कि पृथ्वी पर 70 प्रतिशत जल है। वहीं मनुष्य के शरीर में भी 70 फीसदी जल है। जल पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन सही प्रबंधन नहीं होने से जल समस्या बनी हुई है। ग्रामीण की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में खपत ज्यादा है। इंदौर में लगभग 550 एमएलडी पानी बंटता है। बढ़ती मांग को देखते हुए आवश्यक है कि दूषित जल को उपचारित कर पुनः उपयोग करें। एक परिवार 675 लीटर पानी में से 270 लीटर पानी फ्लश कर देता है। इसके पुन: इस्तेमाल से पानी के लिए इंदौर की नर्मदा पर निर्भरता कम हो जाएगी। इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज के सहयोग से ये सेमिनार आयोजित किया गया था।
नदियों को उधार के पानी से जीवंत करना उपाय नहीं
शर्मा ने कहा कि नदियों के खत्म होने को भी इसी ईकोसिस्टम से जोड़ते हैं। हालांकि उनके पास इस ईकोसिस्ट के खत्म होने का एक और कारण है। वे कहते हैं कि गांवों में पशुओं की संख्या बढ़ने से यहां की पहाड़ियां उनकी चारागाह बन गईं और इस तरह से यहां की प्राकृतिक वनस्पति खत्म होने लगी । इसके साथ मिट्टी बहती रही और पहाड़ों की बाहरी सतह पर पत्थर रह गए। ऐसे में नदियां कितने दिनों तक बची रहेंगी और पानी खेतों तक कितने दिनों तक आएगा यह कहना मुश्किल है क्योंकि इसका खर्च लगातार बढ़ता रहेगा। वे कहते हैं कि इस इलाके में हर कहीं एक एकड़ जमीन पर बारिश का एक करोड़ लीटर पानी जुटाया जा सकता है। ऐसे में किसान सरकार से इस पानी को जुटाने की व्यवस्थाएं बनाने की मांग करें क्योंकि उधार के पानी से अपनी खत्म की हुई नदियों को जिंदा करना आने वाली पीढ़ियों के लिए ठीक नहीं होगा।
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सेमिनार में मुख्य अतिथि प्रसिद्ध भूजल वैज्ञानिक सुधींद्र मोहन शर्मा उपस्थित थे। देश के जाने माने हाइड्रोलॉजिस्ट सुधींद्र मोहन शर्मा ने कहा कि पृथ्वी पर 70 प्रतिशत जल है। वहीं मनुष्य के शरीर में भी 70 फीसदी जल है। जल पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन सही प्रबंधन नहीं होने से जल समस्या बनी हुई है। ग्रामीण की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में खपत ज्यादा है। इंदौर में लगभग 550 एमएलडी पानी बंटता है। बढ़ती मांग को देखते हुए आवश्यक है कि दूषित जल को उपचारित कर पुनः उपयोग करें। एक परिवार 675 लीटर पानी में से 270 लीटर पानी फ्लश कर देता है। इसके पुन: इस्तेमाल से पानी के लिए इंदौर की नर्मदा पर निर्भरता कम हो जाएगी। इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज के सहयोग से ये सेमिनार आयोजित किया गया था।
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नदियों को उधार के पानी से जीवंत करना उपाय नहीं
शर्मा ने कहा कि नदियों के खत्म होने को भी इसी ईकोसिस्टम से जोड़ते हैं। हालांकि उनके पास इस ईकोसिस्ट के खत्म होने का एक और कारण है। वे कहते हैं कि गांवों में पशुओं की संख्या बढ़ने से यहां की पहाड़ियां उनकी चारागाह बन गईं और इस तरह से यहां की प्राकृतिक वनस्पति खत्म होने लगी । इसके साथ मिट्टी बहती रही और पहाड़ों की बाहरी सतह पर पत्थर रह गए। ऐसे में नदियां कितने दिनों तक बची रहेंगी और पानी खेतों तक कितने दिनों तक आएगा यह कहना मुश्किल है क्योंकि इसका खर्च लगातार बढ़ता रहेगा। वे कहते हैं कि इस इलाके में हर कहीं एक एकड़ जमीन पर बारिश का एक करोड़ लीटर पानी जुटाया जा सकता है। ऐसे में किसान सरकार से इस पानी को जुटाने की व्यवस्थाएं बनाने की मांग करें क्योंकि उधार के पानी से अपनी खत्म की हुई नदियों को जिंदा करना आने वाली पीढ़ियों के लिए ठीक नहीं होगा।
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