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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore: Spoke on the topic of Gharanadar singing and new flow, the decline of classical music due to non-compliance of the Gharanadar tradition

इंदौर: घरानेदार गायकी और नवप्रवाह विषय पर बोलीं झोकरकर-घरानेदार परंपरा का अनुसरण नहीं करने से शास्त्रीय संगीत का हो रहा ह्रास

Sat, 22 Jan 2022 06:55 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Sat, 22 Jan 2022 06:55 PM IST
सार

राग अमीर संगीत समारोह के दूसरे दिन रागदारी नाम से व्याख्यानमाला आयोजित की गई। इसमें सुविख्यात शास्त्रीय गायिका कल्पना झोकरकर ने अपनी बात रखी। कहा कि घराने का अपना महत्व है, वे परिपक्वता देती है लेकिन विचारों की स्वतंत्रता भी अच्छी बात है।
 

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Indore: Spoke on the topic of Gharanadar singing and new flow, the decline of classical music due to non-compliance of the Gharanadar tradition
कल्पना झोकरकर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राग अमीर संगीत समारोह के दूसरे दिन शनिवार शाम को रागदारी नाम से व्याख्यानमाला आयोजित की गई। इसमें सुविख्यात शास्त्रीय गायिका कल्पना झोकरकर ने अपनी बात रखी। कहा कि घराने का अपना महत्व है, वे परिपक्वता देती है लेकिन विचारों की स्वतंत्रता भी अच्छी बात है।
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प्रीतमलाल दुआ सभागार में आयोजित व्याख्यानमाला को सुनने बड़ी संख्या में संगीतरसिक पहुंचे। घरानेदार गायकी और नव प्रवाह विषय पर झोकरकर ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शास्त्रीय संगीत सीखने और सिखाने की परंपरा में वक्त के साथ बहुत बदलाव आया है। एक वक्त था जब शास्त्रीय संगीत सीखना सहज नहीं था। शिष्य को एक ही गुरु से शिक्षा लेनी होती थी। दूसरे गुरु से शिक्षा लेनी तो दूर उसका संगीत सुनना भी मुश्किल होता था। सुनने वाले भी उस घराने की समझ लिए होते थे। उस्ताद अमीर खां के वक्त इसमें थोड़ी स्वतंत्रता आई। उन्होंने किराना घराने से तालीम ली और अपने संगीत को एक ऐसी ऊंचाई पर पहुंचाया जिसने इंदौर घराना, अमीर खां गायकी का मुकाम हासिल किया। यह दौर मिश्रित दौर रहा। उस दौर ने वैचारिक स्वतंत्रता दी। आज वक्त और भी बदल गया है। आगे कहा कि घरानेदार परंपरा कला में गहराई प्रदान करती है तो नवप्रवाह नवाचार को मौका देता है। घरानेदार परंपरा का अनुसरण नहीं करने से शास्त्रीय संगीत का ह्रास हो रहा है। ऑडियो क्लीपिंग के माध्यम से उदाहरण देते हुए कई जानकारियां दी और कहा कि जहां तक नवाचार की बात है तो आज का श्रोता हर तरह, हर घराने का संगीत सुन रहा है। इसका लाभ यह हो रहा है कि कलाकार भी उसके अनुरूप खुद को तैयार कर रहा है। इस प्रयास में कुछ उम्दा परिणाम सामने आ रहे हैं और कुछ नकारात्मक पक्ष भी दिख रहे हैं। नए कलाकार गुरु की बातों को महत्व दें। वे लोकप्रियता के पीछे नहीं जाएं। लोकप्रियता की ललक शुद्धता को कम कर रही है। 
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