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भोपाल एनकाउंटरः मारे गए तीन सिमी सदस्यों को कोर्ट ने किया था बरी

Sat, 05 Nov 2016 02:02 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 05 Nov 2016 02:02 PM IST
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Evidence not believable, court said in case linked to 3 of killed SIMI men

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में दिवाली की रात हुए प्रतिबंधित संगठन सिमी के आठ सदस्यों के एनकाउंटर मामले में नया मोड़ सामने आया है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, लगभग एक साल पहले खांडवा कोर्ट ने मारे गए 8 सिमी सदस्यों में से 3 के खिलाफ मिले सबूतों को अविश्वसनीय करार दिया था।

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खबर के मुताबिक 2011 के एक मामले में खांडवा कोर्ट ने मध्यप्रदेश पुलिस और उस केस के इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर को लताड़ भी लगाई थी। अकील खिलजी के खिलाफ 2011 में एक मामला दर्ज हुआ था। जिसे लेकर कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधि कड़े (निवारण) अधिनियम (UAPA) के तहत बरी भी कर दिया था।
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वहीं जरूरी दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजने के लिए कोर्ट ने पुलिस को लताड़ गलाई थी। खिलजी को 13 जून 2011 को धार्मिक उन्माद फैलाने व गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालांकि 30 सितंबर 2015 को उसे बरी भी कर दिया गया था। 

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'पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूत अविश्वसनीय'

Evidence not believable, court said in case linked to 3 of killed SIMI men

मारे गए 8 सिमी आतंकियों में से 4 का अंतिम संस्कार गुरुवार को खिलजी के घर खंडवा में किया गया। आपको बता दें कि खिलजी अपने ऊपर लगे बाकी तीन केसों के लिए ट्रायल का इंतजार कर रहा था। खिलजी के खिलाफ 2000 में सिमी के बैन होने के बाद कई सारे केस दर्ज हुए थे। उस पर खंडवा में चार सांप्रदायिक दंगे कराने के आरोप भी लगे थे।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक 2011 वाले केस में पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि खिलजी के घर पर 10-15 सिमी के लोग एकत्रित थे और बड़े हमले की तैयारी कर रहे थे। उस वक्त पुलिस ने खिलजी के घर पर रेड मारकर सिमी के जुड़े दस्तावेज और भड़काऊ सीडी बरामद करने की भी बात कही थी।

चार साल के ट्रॉयल के बाद खंडवा कोर्ट ने सभी आरोपियों को यूएपीए के आरोपों से बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूत अविश्वसनीय हैं।

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