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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Child Conservation Foundation India's 88th Symposium: Women's desire to be a man is not empowerment: Assistant GST Commissioner

चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन इंडिया की 88वीं संगोष्ठी: स्त्री का पुरुष होने की चाह सशक्तिकरण नहीं: सहायक जीएसटी आयुक्त

Sun, 06 Mar 2022 07:23 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी Published by: दिनेश शर्मा Updated Sun, 06 Mar 2022 07:23 PM IST
सार

शिवपुरी में रविवार को चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन इंडिया की 88वीं संगोष्ठी का आयोजन वर्चुअली किया गया। इसमें सहायक जीएसटी आयुक्त श्रीमती रक्षा दुबे चौबे ने कहा कि समाज में महिला और पुरुषों के मध्य प्रतिस्पर्धा नहीं समन्वय और सामंजस्य की आवश्यकता है, क्योंकि स्त्री का सशक्तिकरण उसके पुरुष होने में नहीं बल्कि अपनी अंतर्निहित क्षमता और कौशल को पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रकटीकरण में सुनिश्चित है।
 

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Child Conservation Foundation India's 88th Symposium: Women's desire to be a man is not empowerment: Assistant GST Commissioner
शिवपुरी में रविवार को चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन इंडिया की 88वीं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिवपुरी में रविवार को चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन इंडिया की 88वीं संगोष्ठी का आयोजन वर्चुअली किया गया। इसमें सहायक जीएसटी आयुक्त श्रीमती रक्षा दुबे चौबे ने कहा कि समाज में महिला और पुरुषों के मध्य प्रतिस्पर्धा नहीं समन्वय और सामंजस्य की आवश्यकता है, क्योंकि स्त्री का सशक्तिकरण उसके पुरुष होने में नहीं बल्कि अपनी अंतर्निहित क्षमता और कौशल को पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रकटीकरण में सुनिश्चित है।
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चौबे ने देशभर से जुड़े बाल एवं महिला अधिकार कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में परिवर्तन सदैव चक्रीय रूप में होते हैं। इसलिए यह ध्यान रखना होगा कि स्त्रीत्व के सशक्तिकरण के अतिशय आग्रह भविष्य में पुरुषों के संरक्षण की अवधारणा को जन्म न देने लगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का आशय स्वावलंबी गुणधर्मों का विकास होना चाहिए। स्त्री खुद के प्रति सचेत होकर स्वज्ञान अर्जित करें औऱ अपनी अंतर्निहित क्षमता, कौशल का उपयोग सुनिश्चित कर आगे बढ़े।
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इस संगोष्ठी में अहमदाबाद से ख्याति प्राप्त कवि और ब्लॉगर प्रीति जैन अज्ञात भी जुड़ीं, उन्होंने इस बात की आवश्यकता पर जोर दिया कि बचपन से ही हमारी शालेय शिक्षा का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जिसमें बच्चों को भावनात्मक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया जाए ताकि आने वाला भविष्य बहुत ही खुशनुमा रहे। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने हर मोर्चे पर अतिशय जवाबदेही ओढ़ रखीं इसलिए कुछ धारणाएं निर्मित हो गई है कि पुरुष समाज, परिवार और कामकाजी क्षेत्रों में अलग काम के लिए निर्मित है।
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फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र शर्मा ने कहा कि समाज जीवन का विकास स्त्री पुरुष के संघर्ष नही बल्कि सामंजस्य का प्रतिफल है। पश्चिमी परिदृश्य के समानांतर भारत में स्त्री विमर्श को खड़ा करने वाले कुछ घटनाओं को जीवन बताने की कोशिश करते हैं जबकि सच्चाई यह है कि घटनाएं जीवन नही बल्कि जीवन मे घटनाएं होती हैं। फाउंडेशन के सचिव डॉ. कृपाशंकर चौबे ने कहा कि जीवन सामंजस्य का नाम है औऱ भारतीय जीवन सदैव इसका पक्षधर रहा है कि स्त्री पुरुष अलग इकाई न होकर पूरक है। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में शिक्षा को स्त्री सशक्तिकरण का सबसे अहम हथियार बताया। संचालन नीतू पांडेय ने किया। आभार माया पांडेय ने माना। इस संगोष्ठी की खास बात यह रही कि इसके समस्त संचालन सूत्र महिला दिवस के उपलक्ष्य में फाउंडेशन की महिला सदस्यों के हाथों में रहे।
 
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