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फर्जी IAS तृप्ति का नया VIDEO: विधानसभा में सहेलियों संग ब्लॉगिंग, बोली- हमें देखकर कोई अफसर नहीं समझेगा

Tue, 01 Sep 2026 10:57 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Tue, 01 Sep 2026 10:57 AM IST
सार

चंदेरी में फर्जी आईएएस बनकर ठगी के आरोप में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत से जुड़े नए वीडियो सामने आए हैं। वीडियो में वह दो सहेलियों के साथ विधानसभा परिसर के बाहर ब्लॉग बनाती और खुद को प्रोबेशनर बताती नजर आ रही है।

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New video of 'fake IAS' Trupti: Vlogging with friends inside the Legislative Assembly; says, "No officer would
लाल साड़ी में फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर लोगों को सरकारी नौकरी और मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की संपत्ति दिलाने का झांसा देने के आरोप में गिरफ्तार और अशोक नगर जेल में बंद तृप्ति सिंह राजपूत की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब उसके ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वह दो सहेलियों के साथ विधानसभा परिसर में घूमती नजर आ रही है। तीनों ने वहां ब्लॉग भी बनाया था। वीडियो में तृप्ति और उसकी सहेलियों के बीच हुई बातचीत ने पुलिस की जांच को नया एंगल दे दिया है। वीडियो में तृप्ति लाल साड़ी में दिखाई दे रही है। उसकी एक सहेली उसे सीनियर बताती है, जबकि तृप्ति खुद को प्रोबेशनर कहती है। बातचीत के दौरान वह यह भी कहती है कि तीनों का व्यवहार ऐसा है कि उन्हें देखकर कोई अधिकारी नहीं समझ सकता। 
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विधानसभा आने का बताया था कारण
विधानसभा परिसर के बाहर रिकॉर्ड किए गए वीडियो में तृप्ति की सहेली बताती है कि वे विधानसभा अटेंड करने आई हैं। इसी दौरान उन्होंने अपना पहला ब्लॉग बनाने का फैसला किया। सहेली के मुताबिक, विधानसभा के अंदर फोटो और वीडियो बनाने की अनुमति नहीं है, इसलिए बाहर वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा है। वीडियो में तीनों काफी सहज अंदाज में बातचीत करती और हंसी-मजाक करती दिखाई देती हैं। 
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सहेली ने तृप्ति को बताया सीनियर
वीडियो में एक सहेली तृप्ति को अपनी सीनियर बताती है। इसके बाद तृप्ति खुद को सीनियर बताते हुए कहती है कि वह उनके साथ दोस्त की तरह रहती है। बातचीत में वह खुद को प्रोबेशनर भी बताती है। यही वीडियो अब पुलिस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तृप्ति ने सरकारी अधिकारी जैसी पहचान बनाने के लिए इस तरह की गतिविधियों का इस्तेमाल कितने समय तक किया।

क्या लोगों पर प्रभाव डालने के लिए बनाए जाते थे वीडियो?
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या तृप्ति जानबूझकर ऐसी जगहों पर वीडियो बनाती थी, जहां उसकी सरकारी अधिकारी जैसी छवि लोगों के सामने बन सके। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उसके साथ वीडियो में दिखाई दे रही दोनों युवतियां उसके दावों के बारे में कितना जानती थीं। जरूरत पड़ने पर उनसे पूछताछ की जा सकती है। 

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चंदेरी में 9.80 लाख की ठगी का आरोप
तृप्ति सिंह राजपूत पर चंदेरी में चार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 9.80 लाख रुपये लेने का आरोप है। इस मामले में पुलिस ने तृप्ति और उसके भाई सुधांशु सिंह को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान भोपाल स्थित उसके घर और ससुराल की तलाशी ली गई। पुलिस को यहां से कथित फर्जी सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामान मिलने की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक, तृप्ति अलग-अलग लोगों के सामने खुद को अलग-अलग सरकारी पदों पर तैनात बताती थी। कभी वह IAS अधिकारी तो कभी मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की एडिशनल डायरेक्टर होने का दावा करती थी। आरोप है कि इसी पहचान के जरिए वह लोगों का भरोसा हासिल करती और नौकरी या सरकारी काम कराने के नाम पर रकम लेती थी।

सीबीआई कार्ड और ‘भारत सरकार’ लिखी कार
जांच में तृप्ति के पास कथित तौर पर सीबीआई लिखा पहचान पत्र और सरकारी लेटरहेड मिले हैं। पुलिस ने एक इनोवा कार भी जब्त की है, जिस पर ‘भारत सरकार’ लिखा था। अब पुलिस यह पता कर रही है कि इन चीजों का इस्तेमाल लोगों के सामने सरकारी अधिकारी की छवि बनाने के लिए किया जाता था या नहीं। पुलिस को तृप्ति के पास मंत्रालय और आईएएस अधिकारियों के नामों की सूची होने की जानकारी भी मिली है। आरोप है कि वह जरूरत के अनुसार इन अधिकारियों के नाम लेकर खुद को उनका करीबी बताती थी। पुलिस सूची में शामिल नामों और तृप्ति के कथित संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।

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भोपाल में 39.17 लाख की FIR
बागसेवनिया थाने में तृप्ति के खिलाफ 39.17 लाख रुपये की धोखाधड़ी की FIR दर्ज है। शिकायतकर्ता रोहित लिल्हारे का आरोप है कि तृप्ति ने खुद को ट्रेनी आईएएस और एमपीटी की एडिशनल डायरेक्टर बताया। होटल-रिसॉर्ट की संपत्ति लीज पर दिलाने के नाम पर 35.30 लाख और नौकरी के लिए 3.87 लाख रुपये लिए गए। शिकायत के अनुसार, न लीज हुई और न नौकरी लगी। पैसे वापस मांगने पर केवल एक लाख रुपये ऑनलाइन लौटाए गए। बाकी 38.17 लाख रुपये नहीं लौटाए गए। इसके बाद रोहित ने पुलिस में शिकायत की।

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अब पूरे नेटवर्क की तलाश
भोपाल मामले में तृप्ति के भाई सुधांशु सिंह, प्रखर सिंह और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने तृप्ति के बताए सरकारी पद की पुष्टि की थी। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि कथित ठगी में किसकी क्या भूमिका थी। नए वीडियो, कथित फर्जी दस्तावेज और अलग-अलग मामलों के सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगा रही है कि तृप्ति ने कब से फर्जी अधिकारी की पहचान बना रखी थी और कितने लोगों को प्रभावित किया। विधानसभा के वीडियो में नजर आई उसकी सहेलियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
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