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त्विषा शर्मा डेथ केस: जिस कोर्ट से मिली थी बेल, अब वहीं चलेगा रिटायर्ड जज गिरिबाला और बेटे पर केस
Tue, 01 Sep 2026 09:46 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 01 Sep 2026 09:46 AM IST
सार
त्विषा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ के खिलाफ केस अब उसी अदालत में चलेगा, जहां गिरिबाला को पहले अग्रिम जमानत मिली थी। दोनों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए 16 सितंबर को सुनवाई होगी, वहीं परिजनों ने केस को भोपाल से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की है।
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गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह (फाइल फोटो )
- फोटो : एएनआई
विस्तार
भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले में आरोपी पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला एवं सत्र प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने मामले को अपर सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत में ट्रांसफर कर दिया है। खास बात यह है कि इसी अदालत से गिरिबाला सिंह को त्विषा की मौत के दूसरे दिन अग्रिम जमानत मिली थी। हालांकि, बाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उस जमानत आदेश को रद्द कर दिया था। दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए 16 सितंबर 2026 को सुनवाई होगी।
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17 अगस्त को सीबीआई ने दाखिल की थी चार्जशीट
सीबीआई ने 17 अगस्त को गिरिबाला सिंह और त्विषा के पति समर्थ सिंह के खिलाफ भोपाल की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है। यह अपराध सत्र न्यायालय में विचारणीय होने के कारण केस की फाइल जिला एवं सत्र प्रधान न्यायाधीश के पास भेजी गई। इसके बाद मामले को अपर सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया।
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एम्स की दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंतर
सीबीआई की चार्जशीट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में त्विषा के शरीर पर गंभीर चोट के निशान नहीं मिले। वहीं, इससे पहले एम्स भोपाल की शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पहले शरीर पर छह चोटों के निशान दर्ज किए गए थे।
पहले भी जमानत को लेकर बदली थीं अदालतें
गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी के बाद उनकी नियमित जमानत अर्जी पर भोपाल जिला अदालत में लगातार तीन दिनों तक सुनवाई नहीं हो सकी थी। बताया गया कि मामला अलग-अलग अदालतों में भेजे जाने के बाद संबंधित न्यायाधीशों ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इसका कारण बताया कि वे पहले गिरिबाला सिंह के अधीनस्थ या उनके सहकर्मी के रूप में काम कर चुके हैं। बाद में मामला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश रामप्रताप मिश्रा की अदालत में पहुंचा, जहां उनकी पहली नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।
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परिजनों ने बाहर केस ट्रांसफर करने की मांग की
केस उसी अदालत में ट्रांसफर होने के बाद ट्विशा के परिजनों और उनके वकीलों में नाराजगी बढ़ गई है। परिजनों ने भोपाल में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताते हुए मामले को किसी अन्य स्थान पर ट्रांसफर करने की मांग की है।
हाईकोर्ट में जमानत पर सुनवाई टली
गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में भी सुनवाई नहीं हो सकी। दैनिक कार्यसूची में जमानत आवेदन का नंबर काफी पीछे होने के कारण उपलब्ध समय में मामले की सुनवाई नहीं हो पाई। अब जमानत याचिका पर आने वाले दिनों में सुनवाई होने की संभावना है।
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17 अगस्त को सीबीआई ने दाखिल की थी चार्जशीट
सीबीआई ने 17 अगस्त को गिरिबाला सिंह और त्विषा के पति समर्थ सिंह के खिलाफ भोपाल की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है। यह अपराध सत्र न्यायालय में विचारणीय होने के कारण केस की फाइल जिला एवं सत्र प्रधान न्यायाधीश के पास भेजी गई। इसके बाद मामले को अपर सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया।
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एम्स की दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंतर
सीबीआई की चार्जशीट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में त्विषा के शरीर पर गंभीर चोट के निशान नहीं मिले। वहीं, इससे पहले एम्स भोपाल की शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पहले शरीर पर छह चोटों के निशान दर्ज किए गए थे।
पहले भी जमानत को लेकर बदली थीं अदालतें
गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी के बाद उनकी नियमित जमानत अर्जी पर भोपाल जिला अदालत में लगातार तीन दिनों तक सुनवाई नहीं हो सकी थी। बताया गया कि मामला अलग-अलग अदालतों में भेजे जाने के बाद संबंधित न्यायाधीशों ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इसका कारण बताया कि वे पहले गिरिबाला सिंह के अधीनस्थ या उनके सहकर्मी के रूप में काम कर चुके हैं। बाद में मामला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश रामप्रताप मिश्रा की अदालत में पहुंचा, जहां उनकी पहली नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।
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परिजनों ने बाहर केस ट्रांसफर करने की मांग की
केस उसी अदालत में ट्रांसफर होने के बाद ट्विशा के परिजनों और उनके वकीलों में नाराजगी बढ़ गई है। परिजनों ने भोपाल में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताते हुए मामले को किसी अन्य स्थान पर ट्रांसफर करने की मांग की है।
हाईकोर्ट में जमानत पर सुनवाई टली
गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में भी सुनवाई नहीं हो सकी। दैनिक कार्यसूची में जमानत आवेदन का नंबर काफी पीछे होने के कारण उपलब्ध समय में मामले की सुनवाई नहीं हो पाई। अब जमानत याचिका पर आने वाले दिनों में सुनवाई होने की संभावना है।
