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एमपी में टॉपर्स के खाते में आज आएंगे स्कूटी के पैसे, 70% अंक और स्कूल में फर्स्ट जरूरी;जानें कितनी मिलेगी राशि
Sat, 19 Sep 2026 07:51 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 19 Sep 2026 07:51 AM IST
सार
मध्यप्रदेश में 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के तहत आज राशि दी जाएगी। इस बार योजना का लाभ लेने के लिए 70% अंक और स्कूल में प्रथम स्थान जरूरी है। 7,400 से ज्यादा विद्यार्थियों को इसका फायदा मिलेगा। ई-स्कूटी के लिए 1.20 लाख और मोटराइज्ड वाहन के लिए 90 हजार रुपए तक मिलेंगे।
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सीएम आज जारी करेंगे स्कूटी के लिए राश
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सरकारी स्कूलों में 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों के लिए मुख्यमंत्री स्कूटी योजना में इस बार नियम बदल गए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शिवाजी नगर में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में 7,400 से अधिक विद्यार्थियों के खातों में योजना की राशि ट्रांसफर करेंगे। इस बार सिर्फ स्कूल में टॉप करना पर्याप्त नहीं होगा। 2026 से योजना का लाभ लेने के लिए 12वीं में कम से कम 70 प्रतिशत अंक और अपने स्कूल में प्रथम स्थान हासिल करना अनिवार्य किया गया है।
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पहली बार 70% अंकों की शर्त
मुख्यमंत्री स्कूटी योजना का लाभ शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को मिलेगा। इसके लिए विद्यार्थी को 12वीं की परीक्षा पहले प्रयास में पास करनी होगी। साथ ही कम से कम 70 प्रतिशत अंक और अपने स्कूल में प्रथम स्थान होना जरूरी है। योजना में सभी संकायों के पात्र विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। पहली बार न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक की शर्त लागू की गई है। जुलाई 2026 के शासन आदेश के मुताबिक योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 495 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।
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ई-स्कूटी के लिए 1.20 लाख तक
पात्र विद्यार्थी निर्धारित श्रेणी में अपनी पसंद का वाहन चुन सकेंगे। योजना के तहत ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपए और मोटराइज्ड वाहन के लिए अधिकतम 90 हजार रुपए तक की राशि दी जाएगी। इसमें वाहन की एक्स-शोरूम कीमत के अलावा रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, दो हेलमेट और एसेसरीज का खर्च भी शामिल रहेगा।
पैसे आने से पहले वाहन खरीदा तो फंसेंगे विद्यार्थी और पालक
योजना में वाहन खरीदने को लेकर सरकार ने सख्त व्यवस्था की है। विद्यार्थी के बैंक खाते में योजना की राशि पहुंचने से पहले वाहन खरीदना नियमों के खिलाफ होगा। ऐसा करने पर केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि उसके पालक और संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
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पहले कोटेशन, फिर खाते में पैसा
वाहन खरीदने के लिए विद्यार्थी को अधिकृत वाहन विक्रेता के शोरूम से कोटेशन लेना होगा। इसमें एक्स-शोरूम कीमत के साथ रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और एसेसरीज का पूरा विवरण देना होगा। यह कोटेशन स्कूल के प्राचार्य के पास जमा होगा। प्राचार्य इसे संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भेजेंगे। इसके बाद स्वीकृत राशि विद्यार्थी के खाते में भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी।
मनमर्जी की बाइक नहीं खरीद सकेंगे
योजना की राशि से विद्यार्थी अपनी मनमर्जी का कोई भी वाहन नहीं खरीद सकेगा। निर्धारित श्रेणी में आने वाला वाहन ही लेना होगा। जिला शिक्षा अधिकारियों को कोटेशन की जांच कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उसमें योजना के तहत स्वीकृत वाहन के अलावा कोई दूसरा वाहन शामिल न हो। आदेश में मोटर बाइक आदि के चयन से बचने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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बैंक खाते से जुड़ी शर्तें भी जरूरी
योजना की राशि पहले विद्यार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी और उसके बाद ही वाहन खरीदा जा सकेगा। यह भुगतान जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कोषालय के माध्यम से किया जाएगा। यदि विद्यार्थी का अपना बैंक खाता नहीं है तो राशि माता-पिता या अभिभावक के खाते में भेजी जा सकती है। इसके लिए खाता आधार से लिंक होना जरूरी है। बैंक पासबुक के पहले पेज की कॉपी में खाता नंबर और IFSC कोड दर्ज होना चाहिए। यह विवरण विभागीय पोर्टल पर भी दर्ज किया जाएगा।
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डीलर के खाते में जाएगा रजिस्ट्रेशन-इंश्योरेंस का पैसा
वाहन की कीमत से जुड़े निर्धारित भुगतान के साथ रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और एसेसरीज की राशि संबंधित वाहन विक्रेता के खाते में ट्रांसफर की जाएगी। इसके बाद डीलर रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस समेत जरूरी औपचारिकताएं पूरी करेगा। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि वितरण समारोह के दिन संबंधित विद्यार्थियों के लिए वाहन उपलब्ध रहना चाहिए।
कलेक्टर की अध्यक्षता में होगी निगरानी
योजना की निगरानी के लिए हर जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी। इसमें जिला परिवहन अधिकारी और जिला कोषालय अधिकारी सदस्य होंगे, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी सदस्य सचिव रहेंगे। समिति वाहन चयन, भुगतान और वितरण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया के समन्वय की निगरानी करेगी।
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पहली बार 70% अंकों की शर्त
मुख्यमंत्री स्कूटी योजना का लाभ शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को मिलेगा। इसके लिए विद्यार्थी को 12वीं की परीक्षा पहले प्रयास में पास करनी होगी। साथ ही कम से कम 70 प्रतिशत अंक और अपने स्कूल में प्रथम स्थान होना जरूरी है। योजना में सभी संकायों के पात्र विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। पहली बार न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक की शर्त लागू की गई है। जुलाई 2026 के शासन आदेश के मुताबिक योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 495 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।
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ई-स्कूटी के लिए 1.20 लाख तक
पात्र विद्यार्थी निर्धारित श्रेणी में अपनी पसंद का वाहन चुन सकेंगे। योजना के तहत ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपए और मोटराइज्ड वाहन के लिए अधिकतम 90 हजार रुपए तक की राशि दी जाएगी। इसमें वाहन की एक्स-शोरूम कीमत के अलावा रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, दो हेलमेट और एसेसरीज का खर्च भी शामिल रहेगा।
पैसे आने से पहले वाहन खरीदा तो फंसेंगे विद्यार्थी और पालक
योजना में वाहन खरीदने को लेकर सरकार ने सख्त व्यवस्था की है। विद्यार्थी के बैंक खाते में योजना की राशि पहुंचने से पहले वाहन खरीदना नियमों के खिलाफ होगा। ऐसा करने पर केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि उसके पालक और संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
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पहले कोटेशन, फिर खाते में पैसा
वाहन खरीदने के लिए विद्यार्थी को अधिकृत वाहन विक्रेता के शोरूम से कोटेशन लेना होगा। इसमें एक्स-शोरूम कीमत के साथ रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और एसेसरीज का पूरा विवरण देना होगा। यह कोटेशन स्कूल के प्राचार्य के पास जमा होगा। प्राचार्य इसे संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भेजेंगे। इसके बाद स्वीकृत राशि विद्यार्थी के खाते में भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी।
मनमर्जी की बाइक नहीं खरीद सकेंगे
योजना की राशि से विद्यार्थी अपनी मनमर्जी का कोई भी वाहन नहीं खरीद सकेगा। निर्धारित श्रेणी में आने वाला वाहन ही लेना होगा। जिला शिक्षा अधिकारियों को कोटेशन की जांच कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उसमें योजना के तहत स्वीकृत वाहन के अलावा कोई दूसरा वाहन शामिल न हो। आदेश में मोटर बाइक आदि के चयन से बचने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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बैंक खाते से जुड़ी शर्तें भी जरूरी
योजना की राशि पहले विद्यार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी और उसके बाद ही वाहन खरीदा जा सकेगा। यह भुगतान जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कोषालय के माध्यम से किया जाएगा। यदि विद्यार्थी का अपना बैंक खाता नहीं है तो राशि माता-पिता या अभिभावक के खाते में भेजी जा सकती है। इसके लिए खाता आधार से लिंक होना जरूरी है। बैंक पासबुक के पहले पेज की कॉपी में खाता नंबर और IFSC कोड दर्ज होना चाहिए। यह विवरण विभागीय पोर्टल पर भी दर्ज किया जाएगा।
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डीलर के खाते में जाएगा रजिस्ट्रेशन-इंश्योरेंस का पैसा
वाहन की कीमत से जुड़े निर्धारित भुगतान के साथ रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और एसेसरीज की राशि संबंधित वाहन विक्रेता के खाते में ट्रांसफर की जाएगी। इसके बाद डीलर रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस समेत जरूरी औपचारिकताएं पूरी करेगा। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि वितरण समारोह के दिन संबंधित विद्यार्थियों के लिए वाहन उपलब्ध रहना चाहिए।
कलेक्टर की अध्यक्षता में होगी निगरानी
योजना की निगरानी के लिए हर जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी। इसमें जिला परिवहन अधिकारी और जिला कोषालय अधिकारी सदस्य होंगे, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी सदस्य सचिव रहेंगे। समिति वाहन चयन, भुगतान और वितरण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया के समन्वय की निगरानी करेगी।
