{"_id":"6aade70491d47169af059956","slug":"mp-rewa-doctor-dismissed-after-3-years-why-was-action-delayed-despite-earlier-recommendation-2026-09-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमपी: तीन साल पहले सिफारिश के बाद अब हुई रीवा डॉक्टर की सेवा समाप्ति, आखिर किसकी शह पर लंबित रहा मामला?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमपी: तीन साल पहले सिफारिश के बाद अब हुई रीवा डॉक्टर की सेवा समाप्ति, आखिर किसकी शह पर लंबित रहा मामला?
Sat, 19 Sep 2026 07:06 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 19 Sep 2026 07:06 AM IST
सार
रीवा मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं 16 सितंबर 2026 को समाप्त कर दी गईं। उनके खिलाफ शिकायत की जांच और कार्रवाई की सिफारिश करीब साढ़े तीन साल पहले ही हो चुकी थी। अब सवाल डॉक्टर पर हुई कार्रवाई से ज्यादा इस बात पर है कि 2023 की जांच रिपोर्ट के बाद अंतिम फैसला होने में इतना लंबा समय क्यों लगा।
विज्ञापन
डॉ. सोनल अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा की सहायक प्राध्यापक डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं 16 सितंबर 2026 को समाप्त कर दी गईं। उन पर मरीजों को निजी नर्सिंग होम जाने के लिए बाध्य करने की शिकायत की जांच करीब साढ़े तीन साल पहले ही पूरी हो चुकी थी। चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति ने 1 मार्च 2023 को अपनी रिपोर्ट में उनके खिलाफ दीर्घशास्ति के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बावजूद अंतिम निर्णय अब हुआ। ऐसे में अब सवाल कार्रवाई से ज्यादा इस बात को लेकर उठ रहा है कि जांच और सिफारिश के बाद मामला इतने लंबे समय तक लंबित क्यों रहा? रिकॉर्ड के मुताबिक चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 7 फरवरी 2023 को चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। समिति ने 1 मार्च को अपनी रिपोर्ट तैयार की और 7 मार्च 2023 को इसे कार्यालय भेजा। रिपोर्ट में डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसके बाद नोटिस और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया चली। करीब साढ़े तीन साल बाद 16 सितंबर को कार्यकारिणी समिति के संकल्प के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी हुआ।
ये भी पढ़ें- राहुल इंदौर में: भारत जोड़ो यात्रा वाले इलाके में कांग्रेस का प्रयोग, क्या छात्रों की गूंज 2028 तक सुनाई देगी?
मां और नवजात की मौत के बाद फिर चर्चा में मामला
अगस्त 2026 में रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और डॉक्टरों की भूमिका को लेकर सवाल उठे। प्रारंभिक कार्रवाई में दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया था। मामले की जांच भी शुरू की गई। कल्पना मिश्रा के पिता रामशिरोमणि मिश्रा ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और एफआईआर की मांग की थी। इसी घटनाक्रम के बीच 16 सितंबर को डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्ति का आदेश सामने आया। हालांकि, डॉ. अग्रवाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया 2023 की शिकायत और जांच से जुड़ी थी। इसलिए दोनों घटनाक्रमों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का निष्कर्ष निकालने के बजाय यह सवाल महत्वपूर्ण है कि पुरानी जांच में कार्रवाई की सिफारिश होने के बावजूद अंतिम निर्णय में इतना समय क्यों लगा?
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- MP के 7400 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को मिलेगी ई-स्कूटी, सीएम मोहन यादव 19 सितंबर को करेंगे वितरण
देरी पर जवाबदेही का सवाल
अब चिकित्सा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि 2023 में जांच पूरी होने के बाद मामला किन स्तरों पर लंबित रहा। क्या इस देरी की वजह जानने के लिए कोई समीक्षा या जांच होगी? यदि प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब हुआ तो उसकी जिम्मेदारी तय होगी या नहीं? यह भी सवाल है कि क्या शासन 2023 की जांच रिपोर्ट से लेकर 16 सितंबर 2026 को सेवा समाप्ति के आदेश तक की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेगा।
ये भी पढ़ें- एमपी में फर्जी GST नंबर से 10 लाख का MSME लोन!: बैंक मैनेजर समेत 5 पर FIR, मशीन भी नहीं मिली
जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी
रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेंद्र सिंह ने इस संबंध में कहा कि इस मामले में अब शासन ने निर्णय ले लिया है। शासन के निर्णय पर अब मैं कुछ कहना नहीं चाहता। वहीं, इस मामले में विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह और कमिश्नर एस धनराजू संपर्क किया, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी। उनको सोशल मीडिया पर सवाल पूछा, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- राहुल इंदौर में: भारत जोड़ो यात्रा वाले इलाके में कांग्रेस का प्रयोग, क्या छात्रों की गूंज 2028 तक सुनाई देगी?
विज्ञापन
मां और नवजात की मौत के बाद फिर चर्चा में मामला
अगस्त 2026 में रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और डॉक्टरों की भूमिका को लेकर सवाल उठे। प्रारंभिक कार्रवाई में दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया था। मामले की जांच भी शुरू की गई। कल्पना मिश्रा के पिता रामशिरोमणि मिश्रा ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और एफआईआर की मांग की थी। इसी घटनाक्रम के बीच 16 सितंबर को डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्ति का आदेश सामने आया। हालांकि, डॉ. अग्रवाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया 2023 की शिकायत और जांच से जुड़ी थी। इसलिए दोनों घटनाक्रमों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का निष्कर्ष निकालने के बजाय यह सवाल महत्वपूर्ण है कि पुरानी जांच में कार्रवाई की सिफारिश होने के बावजूद अंतिम निर्णय में इतना समय क्यों लगा?
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- MP के 7400 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को मिलेगी ई-स्कूटी, सीएम मोहन यादव 19 सितंबर को करेंगे वितरण
देरी पर जवाबदेही का सवाल
अब चिकित्सा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि 2023 में जांच पूरी होने के बाद मामला किन स्तरों पर लंबित रहा। क्या इस देरी की वजह जानने के लिए कोई समीक्षा या जांच होगी? यदि प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब हुआ तो उसकी जिम्मेदारी तय होगी या नहीं? यह भी सवाल है कि क्या शासन 2023 की जांच रिपोर्ट से लेकर 16 सितंबर 2026 को सेवा समाप्ति के आदेश तक की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेगा।
ये भी पढ़ें- एमपी में फर्जी GST नंबर से 10 लाख का MSME लोन!: बैंक मैनेजर समेत 5 पर FIR, मशीन भी नहीं मिली
जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी
रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेंद्र सिंह ने इस संबंध में कहा कि इस मामले में अब शासन ने निर्णय ले लिया है। शासन के निर्णय पर अब मैं कुछ कहना नहीं चाहता। वहीं, इस मामले में विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह और कमिश्नर एस धनराजू संपर्क किया, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी। उनको सोशल मीडिया पर सवाल पूछा, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
