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MP News: विजय शाह मामले में विवेक तन्खा बोले- मंत्री-पूर्व मंत्री के अभियोजन पर सरकार नहीं ले सकती कोई फैसला
Wed, 26 Aug 2026 08:22 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 26 Aug 2026 08:22 PM IST
सार
विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति को लेकर कैबिनेट के फैसले पर वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने 2003 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मंत्री या पूर्व मंत्री के खिलाफ ऐसे मामले में फैसला राज्यपाल को लेना चाहिए।
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वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति के मामले में कैबिनेट के फैसले के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने सवाल उठाए हैं। तन्खा का कहना है कि इस मामले में निर्णय लेने का अधिकार कैबिनेट को नहीं, बल्कि राज्यपाल को है। उन्होंने 2003 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व या वर्तमान मंत्री के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के मामले में राज्यपाल अपने स्वविवेक से निर्णय लेते हैं।
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तन्खा ने कहा कि 2003 में राजेंद्र सिंह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति का मामला सामने आया था। उस समय कैबिनेट ने अभियोजन की अनुमति नहीं दी थी, जबकि राज्यपाल ने कैबिनेट के फैसले से अलग निर्णय लिया था। मामला पहले हाईकोर्ट पहुंचा, जहां सिंगल और डबल बेंच में सरकार को राहत मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। तन्खा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब किसी पूर्व या वर्तमान मंत्री के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का मामला हो तो उसे सामान्य तरीके से मंत्रिमंडल के समक्ष नहीं भेजा जाना चाहिए। उन्होंने इसके पीछे तर्क बताते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में संबंधित व्यक्ति के राजनीतिक सहयोगी या विरोधी दोनों हो सकते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में निर्णय की जिम्मेदारी राज्यपाल को दी गई है। तन्खा ने कहा कि विजय शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट खुद सुनवाई की निगरानी कर रहा है। इसलिए राज्यपाल को फैसला लेते समय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और उसकी मंशा को ध्यान में रखना चाहिए।
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कैबिनेट के फैसले के बाद राज्यपाल की भूमिका अहम
विजय शाह मामले में कैबिनेट ने एसआईटी की रिपोर्ट और कानूनी राय पर चर्चा के बाद उनके खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है। अब यह मामला राज्यपाल के पास भेजे जाने की प्रक्रिया में है। विजय शाह मामले में सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित है। इस दौरान राज्य सरकार को एसआईटी की रिपोर्ट और अभियोजन स्वीकृति से जुड़े फैसले की जानकारी अदालत के सामने रखनी पड़ सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में राज्यपाल के फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई भी महत्वपूर्ण रहेगी।
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तन्खा ने कहा कि 2003 में राजेंद्र सिंह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति का मामला सामने आया था। उस समय कैबिनेट ने अभियोजन की अनुमति नहीं दी थी, जबकि राज्यपाल ने कैबिनेट के फैसले से अलग निर्णय लिया था। मामला पहले हाईकोर्ट पहुंचा, जहां सिंगल और डबल बेंच में सरकार को राहत मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। तन्खा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब किसी पूर्व या वर्तमान मंत्री के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का मामला हो तो उसे सामान्य तरीके से मंत्रिमंडल के समक्ष नहीं भेजा जाना चाहिए। उन्होंने इसके पीछे तर्क बताते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में संबंधित व्यक्ति के राजनीतिक सहयोगी या विरोधी दोनों हो सकते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में निर्णय की जिम्मेदारी राज्यपाल को दी गई है। तन्खा ने कहा कि विजय शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट खुद सुनवाई की निगरानी कर रहा है। इसलिए राज्यपाल को फैसला लेते समय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और उसकी मंशा को ध्यान में रखना चाहिए।
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कैबिनेट के फैसले के बाद राज्यपाल की भूमिका अहम
विजय शाह मामले में कैबिनेट ने एसआईटी की रिपोर्ट और कानूनी राय पर चर्चा के बाद उनके खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है। अब यह मामला राज्यपाल के पास भेजे जाने की प्रक्रिया में है। विजय शाह मामले में सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित है। इस दौरान राज्य सरकार को एसआईटी की रिपोर्ट और अभियोजन स्वीकृति से जुड़े फैसले की जानकारी अदालत के सामने रखनी पड़ सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में राज्यपाल के फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई भी महत्वपूर्ण रहेगी।
