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MP News: एमपी में छात्र सुरक्षा और पढ़ाई व्यवस्था पर सरकार सख्त, कॉलेज-यूनिवर्सिटी को अब नियम मानने होंगे

Thu, 29 Jan 2026 07:34 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Thu, 29 Jan 2026 07:34 PM IST
सार

मध्यप्रदेश सरकार ने कॉलेज और विश्वविद्यालयों को साफ चेतावनी दी है। छात्र सुरक्षा, पढ़ाई की व्यवस्था, डिजिटल परीक्षा, छात्रवृत्ति और खाली पद भरने जैसे काम चार महीने में पूरे करने होंगे। छात्रों की आत्महत्या या संदिग्ध मौत की सूचना तुरंत पुलिस को देना अनिवार्य होगा। 

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MP News: The government in Madhya Pradesh is taking a strict stance on student safety and education system; co
बीयू भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश सरकार ने कॉलेज और विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। सरकार ने साफ कहा है कि अब छात्रों की सुरक्षा, पढ़ाई की गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कुलगुरुओं के साथ बैठक में निर्देश दिए कि यदि किसी छात्र की आत्महत्या या अप्राकृतिक मौत की जानकारी मिलती है, तो कॉलेज या विश्वविद्यालय को तुरंत पुलिस को सूचना देनी होगी। यह नियम कैंपस के अंदर या बाहर, दोनों जगह हुई घटनाओं पर लागू होगा। सरकार ने यह भी कहा है कि सभी शैक्षणिक संस्थानों में यूजीसी के जरूरी नियमों का पालन अनिवार्य होगा। इसमें एंटी-रैगिंग व्यवस्था, समान अवसर प्रकोष्ठ, आंतरिक शिकायत समिति और छात्र शिकायत निवारण सिस्टम को सक्रिय रखना शामिल है। 
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परीक्षा से लेकर प्रशासन तक सब डिजिटल
अब सभी विश्वविद्यालयों में डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली अनिवार्य होगी। अकादमिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए SAMARTH डिजिटल प्लेटफॉर्म को पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। परिणामों की देरी, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और मैनुअल हस्तक्षेप को खत्म करने पर फोकस रहेगा।
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मानव संसाधन की कमी होगी दूर
सरकार ने विश्वविद्यालयों को चार महीने के भीतर शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक रिक्त पद भरने का अल्टीमेटम दिया है। अधिक रिक्तियों वाले संस्थानों में मिशन मोड पर भर्ती होगी, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात सुधरेगा और पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।
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छात्रवृत्ति और सुविधाओं पर टाइमलाइन
छात्रवृत्तियों के भुगतान में देरी अब स्वीकार्य नहीं होगी। निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी छात्र को परीक्षा, हॉस्टल, कक्षा या डिग्री से वंचित नहीं किया जाएगा। आवासीय संस्थानों में 24×7 मेडिकल सुविधा या पास में वैकल्पिक व्यवस्था अनिवार्य की गई है।

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वैश्विक मानकों की ओर कदम
सरकार ने विश्वविद्यालयों को प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस, वैश्विक प्रतिभा वापसी योजना, उभरती तकनीकों में फैकल्टी ट्रेनिंग और कौशल आधारित डिग्री कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही नवाचार, स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन सेंटर को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।

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छात्र केंद्रित विश्वविद्यालय’ का लक्ष्य
मंत्री परमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अब केवल डिग्री वितरण केंद्र नहीं, बल्कि छात्र केंद्रित ज्ञान और कौशल संस्थान बनना होगा। प्रशासनिक पारदर्शिता, समयबद्ध निर्णय और डिजिटल निगरानी ही आगे की शिक्षा नीति की पहचान होगी।


 
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