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MP News: 13 साल से शुरू होने का इंतजार कर रही 5 करोड़ की होम्योपैथी फार्मेसी बिल्डिंग, उपकरणों की खरीदी अटकी
Wed, 22 Oct 2025 07:31 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 22 Oct 2025 07:31 PM IST
सार
भोपाल में 2012 से तैयार फार्मेसी बिल्डिंग आज भी काम शुरू होने का इंतजार कर रही है। यदि उपकरणों की खरीदी और इंस्टॉलेशन में तेजी लाई जाए, तो यह प्रोजेक्ट प्रदेश में होम्योपैथिक चिकित्सा को नई दिशा दे सकता है। प्रदेश को पहला सरकारी होम्योपैथी दवा उत्पादन केंद्र भी दिला सकता है।
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फार्मेसी बिल्डिंग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल स्थित मध्यप्रदेश के एकमात्र शासकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में स्थापित की गई 5 करोड़ रुपए की फार्मेसी बिल्डिंग बीते 13 वर्षों से बेकार पड़ी है। यह फार्मेसी भवन वर्ष 2012 में दवा निर्माण के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन उपकरणों की खरीदी न हो पाने के कारण यह अब तक शुरू नहीं हो सका है। नतीजतन, यह बहुमूल्य भवन अब जर्जरता की कगार पर पहुंच चुका है।
केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने मिलकर किया था खर्च
इस फार्मेसी की स्थापना के लिए भारत सरकार से 2 करोड़ रुपए और राज्य सरकार से 3 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई थी। भवन निर्माण कार्य वर्ष 2012 में ही पूरा हो गया था, लेकिन उपकरणों की खरीदी और इंस्टॉलेशन से जुड़ी प्रक्रियाओं में वर्षों तक चली खींचतान के कारण दवा निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया है।
उपकरणों को लेकर उलझा रहा विभागों के बीच मामला
पहले यह स्पष्ट नहीं था कि उपकरणों की खरीदी कौन करेगा। आयुष विभाग या मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपोरेशन (MPPHSCL)। वर्ष 2019 में कॉरपोरेशन ने यह कहते हुए पीछे हट लिया कि जिन उपकरणों की जरूरत है, उनकी आपूर्ति के लिए कंपनियां ही सामने नहीं आ रही हैं। इसके बाद निर्णय लिया गया कि उपकरणों की खरीदी आयुष संचालनालय करेगा, लेकिन यह प्रक्रिया भी अब तक अटकी हुई है।
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विशेष मापदंड वाली मशीनों की कमी भी बन रही बाधा
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, जिन मशीनों की आवश्यकता है- जैसे हर्बल ग्राइंडर, डोजिंग यूनिट, ड्रग टेस्टिंग मशीनें और पैकिंग सिस्टम, वे विशिष्ट मानकों के अनुसार होनी चाहिए। ऐसे उपकरण बनाने वाली कंपनियों की संख्या देश में बेहद कम है, जिससे प्रक्रिया में और विलंब हो रहा है।
क्या कहते हैं कॉलेज प्राचार्य
होम्योपैथी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसके मिश्रा ने बताया कि,उपकरणों की खरीदी की प्रक्रिया दोबारा कॉरपोरेशन के जरिए शुरू करने की तैयारी चल रही है। जैसे ही मशीनें मिलती हैं, फार्मेसी का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। हम लगातार विभागीय स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें-गोवर्धन पूजा की भक्ति में रंगी राजधानी, विधायक, महापौर और भक्तों ने की गौसेवा और अन्नकूट अर्पण
फार्मेसी चालू हुई तो होंगे ये 4 बड़े फायदे
1. हर साल 20 करोड़ रुपए की दवाओं का उत्पादन संभव: इस फार्मेसी की दवा निर्माण क्षमता प्रति वर्ष 20 करोड़ रुपए तक की होगी। इससे न सिर्फ कॉलेज और इसके अस्पताल की ज़रूरतें पूरी होंगी, बल्कि प्रदेश के अन्य होम्योपैथिक औषधालयों में भी दवाएं भेजी जा सकेंगी।
2. सरकारी आयुष औषधालयों में दवा आपूर्ति सुधरेगी: अभी मरीजों को केवल अत्यावश्यक दवाएं ही उपलब्ध हो पाती हैं, बाकी दवाएं उन्हें बाजार से खरीदनी पड़ती हैं। फार्मेसी के संचालन से यह निर्भरता काफी हद तक खत्म होगी।
3. बचे हुए उत्पाद बाजार में बिक सकेंगे: यदि दवाओं का उत्पादन आवश्यकता से अधिक होता है, तो उसे खुले बाजार में भी बेचा जा सकेगा, जिससे आयुष कॉलेज को स्वयं की आमदनी होगी।
4. ड्रग टेस्टिंग लैब भी प्रस्तावित: फार्मेसी के साथ ही ड्रग टेस्टिंग लैब की स्थापना भी प्रस्तावित है, जहां न केवल फार्मेसी में बनी दवाओं की, बल्कि अस्पताल में वितरित सभी दवाओं की गुणवत्ता की जांच की जा सकेगी।
यह भी पढ़ें-दिवाली के बाद मध्य प्रदेश में जहरीली हुई हवा, ग्वालियर, सागर और मंडीदीप सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल
13 साल से नहीं शुरू हुई, अब होने लगी जर्जर
वर्षों से इस्तेमाल न होने और उचित रखरखाव के अभाव में यह बहुमूल्य भवन अब टपकने लगा है, दीवारों में सीलन और प्लास्टर झड़ने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, यदि जल्द ही यहां उपकरण नहीं लगाए गए, तो इस भवन को फिर से दुरुस्त करने में भी लाखों रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं।
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केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने मिलकर किया था खर्च
इस फार्मेसी की स्थापना के लिए भारत सरकार से 2 करोड़ रुपए और राज्य सरकार से 3 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई थी। भवन निर्माण कार्य वर्ष 2012 में ही पूरा हो गया था, लेकिन उपकरणों की खरीदी और इंस्टॉलेशन से जुड़ी प्रक्रियाओं में वर्षों तक चली खींचतान के कारण दवा निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया है।
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उपकरणों को लेकर उलझा रहा विभागों के बीच मामला
पहले यह स्पष्ट नहीं था कि उपकरणों की खरीदी कौन करेगा। आयुष विभाग या मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपोरेशन (MPPHSCL)। वर्ष 2019 में कॉरपोरेशन ने यह कहते हुए पीछे हट लिया कि जिन उपकरणों की जरूरत है, उनकी आपूर्ति के लिए कंपनियां ही सामने नहीं आ रही हैं। इसके बाद निर्णय लिया गया कि उपकरणों की खरीदी आयुष संचालनालय करेगा, लेकिन यह प्रक्रिया भी अब तक अटकी हुई है।
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विशेष मापदंड वाली मशीनों की कमी भी बन रही बाधा
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, जिन मशीनों की आवश्यकता है- जैसे हर्बल ग्राइंडर, डोजिंग यूनिट, ड्रग टेस्टिंग मशीनें और पैकिंग सिस्टम, वे विशिष्ट मानकों के अनुसार होनी चाहिए। ऐसे उपकरण बनाने वाली कंपनियों की संख्या देश में बेहद कम है, जिससे प्रक्रिया में और विलंब हो रहा है।
क्या कहते हैं कॉलेज प्राचार्य
होम्योपैथी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसके मिश्रा ने बताया कि,उपकरणों की खरीदी की प्रक्रिया दोबारा कॉरपोरेशन के जरिए शुरू करने की तैयारी चल रही है। जैसे ही मशीनें मिलती हैं, फार्मेसी का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। हम लगातार विभागीय स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।
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फार्मेसी चालू हुई तो होंगे ये 4 बड़े फायदे
1. हर साल 20 करोड़ रुपए की दवाओं का उत्पादन संभव: इस फार्मेसी की दवा निर्माण क्षमता प्रति वर्ष 20 करोड़ रुपए तक की होगी। इससे न सिर्फ कॉलेज और इसके अस्पताल की ज़रूरतें पूरी होंगी, बल्कि प्रदेश के अन्य होम्योपैथिक औषधालयों में भी दवाएं भेजी जा सकेंगी।
2. सरकारी आयुष औषधालयों में दवा आपूर्ति सुधरेगी: अभी मरीजों को केवल अत्यावश्यक दवाएं ही उपलब्ध हो पाती हैं, बाकी दवाएं उन्हें बाजार से खरीदनी पड़ती हैं। फार्मेसी के संचालन से यह निर्भरता काफी हद तक खत्म होगी।
3. बचे हुए उत्पाद बाजार में बिक सकेंगे: यदि दवाओं का उत्पादन आवश्यकता से अधिक होता है, तो उसे खुले बाजार में भी बेचा जा सकेगा, जिससे आयुष कॉलेज को स्वयं की आमदनी होगी।
4. ड्रग टेस्टिंग लैब भी प्रस्तावित: फार्मेसी के साथ ही ड्रग टेस्टिंग लैब की स्थापना भी प्रस्तावित है, जहां न केवल फार्मेसी में बनी दवाओं की, बल्कि अस्पताल में वितरित सभी दवाओं की गुणवत्ता की जांच की जा सकेगी।
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13 साल से नहीं शुरू हुई, अब होने लगी जर्जर
वर्षों से इस्तेमाल न होने और उचित रखरखाव के अभाव में यह बहुमूल्य भवन अब टपकने लगा है, दीवारों में सीलन और प्लास्टर झड़ने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, यदि जल्द ही यहां उपकरण नहीं लगाए गए, तो इस भवन को फिर से दुरुस्त करने में भी लाखों रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं।
