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MP News: सीएम बोले- नर्मदा तट पर बसे धार्मिक नगरों और स्थलों के आसपास मांस और मदिरा का उपयोग नहीं किया जाए

Sat, 14 Sep 2024 05:57 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sat, 14 Sep 2024 05:57 PM IST
सार


नर्मदांचल के समग्र विकास को लेकर शुक्रवार को हुई  मंत्रिमंडल समिति की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह निर्देश दिए। 

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MP News: CM said- Meat and liquor should not be used near religious towns and places situated on the banks of
सीएम मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश की जीवनदायनी मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक का प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अमरकंटक विकास प्राधिकरण के माध्यम से किया जाएगा। भविष्य में होने वाली बसाहटों के लिए नर्मदा नदी के उद्गम स्थल से दूर भूमि चिह्नत कर सेटेलाइट सिटी विकसित की जाएगी, साथ ही यह सुनिश्चित होगा कि मां नर्मदा के प्राकट्य स्थल अमरकंटक से लेकर प्रदेश की सीमा तक किसी भी बसाहट का सीवेज नर्मदा नदी में नहीं मिले। इसको लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुशासन भवन में बैठक बुलाई। इसको संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा में सीवेज न मिले इसके लिए समय-सीमा निर्धारित कर कार्य किया जाए। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग हो। पर्यावरण संरक्षण के लिए नर्मदा के आसपास चलने वाली गतिविधियों पर सैटेलाइट इमेजरी व ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से भी नजर रखी जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए की नर्मदा नदी के तट पर बसे धार्मिक नगरों में और धार्मिक स्थलों व उनके आसपास मांस-मदिरा का उपयोग नहीं हो। उन्होंने नदी में मशीनों से खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, परिवहन तथा स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपत्तिया उइके, मुख्य सचिव वीरा राणा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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नर्मदा किनारे विद्यमान हैं 430 प्राचीन शिव मंदिर और दो शक्तिपीठ
बैठक में जानकारी दी गई कि अमरकंटक से आरंभ होकर खंभात की खाड़ी में मिलने वाली 1312 किलोमीटर लंबी नर्मदा नदी की मध्य प्रदेश में लंबाई 1079 किलोमीटर है। नर्मदा जी के किनारे 21 जिले, 68 तहसीलें, 1138 ग्राम और 1126 घाट हैं। नर्मदा किनारे 430 प्राचीन शिव मंदिर और दो शक्तिपीठ विद्यमान हैं। साथ ही कई स्थान और घाटों के प्रति जनसामान्य में पर्याप्त आस्था और मान्यता है। बैठक में मंत्री और अधिकारियों द्वारा भी सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।
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बैठक में लिए प्रमुख निर्णय
उद्गम स्थल अमरकंटक से लेकर प्रदेश की सीमा तक किसी भी बसाहट का सीवेज नर्मदा में न मिले
अमरकंटक में उद्गम स्थल से दूर भूमि चिन्हित कर सैटेलाइट सिटी विकसित की जाए
 नर्मदा के आसपास चलने वाली गतिविधियों पर सैटेलाइट इमेजरी व ड्रोन टेक्नोलॉजी से नजर रखें
नदी के दोनों ओर के विस्तार का चिन्हांकन कर क्षेत्र के संरक्षण किया जाए
विकास के लिए विभिन्न विभाग समन्वित कार्ययोजना तैयार करें
नर्मदा परिक्रमा को प्रमुख धार्मिक पर्यटन गतिविधि के रूप में विकसित किया जाए
नर्मदा नदी के दोनों ओर पांच किलोमीटर तक प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाए
नर्मदा के जल को निर्मल तथा प्रवाह को अविरल बनाए रखें।
 
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