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MP News: युवाओं के लिए मत्स्य और पशुपालन के नए कोर्स शुरू होंगे, मुख्यमंत्री बोले - स्किल ही करेंसी है
Wed, 23 Jul 2025 06:50 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Wed, 23 Jul 2025 06:50 PM IST
सार
भोपाल में बुधवार को ‘विकसित भारत @2047 - रोजगार आधारित शिक्षा : रुझान एवं नए अवसर’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित हुई। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज के दौर में स्किल (कौशल) ही असली करेंसी है और शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना चाहिए। वहीं, राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों से कहा कि वे अपने पाठ्यक्रम स्थानीय रोजगार की संभावनाओं को देखकर बनाएं।
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सीएम डॉ. यादव और राज्यपाल मंगु भाई पटेल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल में बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में 'विकसित भारत @2047 - रोजगार आधारित शिक्षा : रुझान एवं नए अवसर' विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाग लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्किल ही आज की करेंसी है। मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए यहां कृषि शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब सामान्य महाविद्यालयों में भी खेती से जुड़े कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। इसमें मत्स्य और पशुपालन के नए कोर्स शुरू होंगे ।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 70 से अधिक विश्वविद्यालय हैं और शिक्षा को भविष्य की जरूरतों से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे आधुनिक कोर्स शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और कौशल होना चाहिए। प्रदेश में 220 से अधिक सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत की गई है। यहां विद्यार्थियों के लिए आधुनिक कंप्यूटर कोडिंग लैब स्थापित की गई हैं। शिक्षा केवल कागज की डिग्री लेने के लिए न हो, बल्कि वह भविष्य की चुनौतियों से लड़ने और उसे समझने में समर्थ हो। इसीलिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्युटिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा से समग्र कल्पना आती है, जिसमें कला, संस्कृति, इतिहास सभी समाहित होते हैं, लेकिन हमने इसे रोजगार की ओर ले जाने का प्रयास किया है। जिसमें माध्यम से शिक्षा हमें वहां तक पहुंचाती है।
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स्थानीय रोजगार की संभावनाओं को देकर पाठ्यक्रम बनाएं
राज्यपाल पटेल ने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को देखकर विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए, ताकि निवेश परियोजनाओं के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिल सके। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की निवेश के प्रयासों की सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि यह कार्यशाला समय की आवश्यकता है और रोजगार आधारित शिक्षा के लिए नई दिशा तय करेगी। उन्होंने शिक्षा को समाज की रीढ़ बताते हुए कहा कि शिक्षा समय के साथ बदलनी चाहिए ताकि छात्र नवीन अवसरों के लिए तैयार हो सकें। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, विभागीय अधिकारी, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव, विषय विशेषज्ञ और प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 70 से अधिक विश्वविद्यालय हैं और शिक्षा को भविष्य की जरूरतों से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे आधुनिक कोर्स शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और कौशल होना चाहिए। प्रदेश में 220 से अधिक सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत की गई है। यहां विद्यार्थियों के लिए आधुनिक कंप्यूटर कोडिंग लैब स्थापित की गई हैं। शिक्षा केवल कागज की डिग्री लेने के लिए न हो, बल्कि वह भविष्य की चुनौतियों से लड़ने और उसे समझने में समर्थ हो। इसीलिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्युटिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा से समग्र कल्पना आती है, जिसमें कला, संस्कृति, इतिहास सभी समाहित होते हैं, लेकिन हमने इसे रोजगार की ओर ले जाने का प्रयास किया है। जिसमें माध्यम से शिक्षा हमें वहां तक पहुंचाती है।
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स्थानीय रोजगार की संभावनाओं को देकर पाठ्यक्रम बनाएं
राज्यपाल पटेल ने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को देखकर विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए, ताकि निवेश परियोजनाओं के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिल सके। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की निवेश के प्रयासों की सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि यह कार्यशाला समय की आवश्यकता है और रोजगार आधारित शिक्षा के लिए नई दिशा तय करेगी। उन्होंने शिक्षा को समाज की रीढ़ बताते हुए कहा कि शिक्षा समय के साथ बदलनी चाहिए ताकि छात्र नवीन अवसरों के लिए तैयार हो सकें। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, विभागीय अधिकारी, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव, विषय विशेषज्ञ और प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति मौजूद रहे।
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