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MP News: एम्स बनेगा प्रदेश का पहला रोबोटिक सर्जरी सेंटर, 30 करोड़ की लागत से स्थापित होगा अत्याधुनिक सिस्टम
Wed, 01 Oct 2025 06:04 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 01 Oct 2025 06:04 PM IST
सार
एम्स भोपाल में अब जटिल सर्जरी रोबोट के जरिए की जाएंगी। यह प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल होगा जहां मशीनों की मदद से ऑपरेशन होंगे। अस्पताल में 30 करोड़ रुपये की लागत से ‘दा विंची रोबोटिक आर्म सिस्टम’ लगाया जाएगा।
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एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश की राजधानी स्थित एम्स भोपाल में अब जटिल सर्जरी रोबोट के जरिए की जाएंगी। यह प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल होगा जहां मशीनों की मदद से ऑपरेशन होंगे। अस्पताल में 30 करोड़ रुपये की लागत से ‘दा विंची रोबोटिक आर्म सिस्टम’ लगाया जाएगा। यह अत्याधुनिक तकनीक नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत उपलब्ध कराई जा रही है। इसपरियोजना को ‘राइज’ (Robotic Assisted Intervention for Surgical Excellence) नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य सर्जरी को अधिक सटीक, सुरक्षित और आधुनिक बनाना है।
एम्स और एनसीएल के बीच हुआ समझौता
एम्स और एनसीएल के बीच इस परियोजना को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में भाग लिया और कहा कि यह कदम राज्य के नागरिकों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर एम्स के निदेशक डॉ. माधवा नंदकर, एनसीएल के सीएसआर प्रमुख राजीव रंजन, डीन रिसर्च डॉ. रेहान उल हक, उप-चिकित्सा अधीक्षक डॉ. (मेजर) मयंक दीक्षित, यूरोलॉजी विभाग के डॉ. देवाशीष कौशल और डॉ. केतन मेहरा, सीटीवीएस विभाग से डॉ. विक्रम बट्टी भी मौजूद रहे।
रोबोटिक सर्जरी के युग में कदम रखेगा एम्स भोपाल
एम्स के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, यूरोलॉजी विभाग में सबसे पहले यह अत्याधुनिक रोबोटिक सिस्टम स्थापित किया जाएगा। डॉ. केतन मेहरा, जो ऑस्ट्रिया से रोबोटिक सर्जरी का विशेष प्रशिक्षण लेकर लौटे हैं, इसकी शुरुआत करेंगे। इस तकनीक की मदद से प्रोस्टेट कैंसर, किडनी कैंसर और पेशाब की थैली के कैंसर जैसे जटिल ऑपरेशन अब और अधिक सटीकता और कम जटिलता के साथ किए जा सकेंगे।
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तीन भागों में बंटा सिस्टम
1. कंसोल सिस्टम: डॉक्टर यहीं से सर्जरी के कमांड देंगे।
2. दो रोबोटिक आर्म्स: ऑपरेशन थिएटर में ये आर्म्स डॉक्टर के निर्देशों पर काम करेंगे।
3. मोबाइल यूनिट: यह यूनिट कहीं भी ले जाई जा सकती है। खास बात यह है कि इस तकनीक से विदेश में मौजूद किसी मरीज की सर्जरी भोपाल से भी संभव होगी।
यह भी पढ़ें-वन विहार से शुरू हुआ वन्यजीव सप्ताह, CM बोले-मप्र बनेगा इको सिस्टम मॉडल, जल-थल-नभ में संतुलन की कोशिश
तकनीक की खासियतें
10 गुना अधिक संवेदनशील कैमरा: हाई-डेफिनिशन थ्रीडी इमेजिंग से डॉक्टर शरीर के बारीक हिस्सों को भी देख सकते हैं।
छोटे चीरे में सर्जरी: मरीज को बड़े कट की जरूरत नहीं होगी, जिससे खून कम बहेगा और रिकवरी तेज होगी।
बेहतर सटीकता: जटिल स्थानों तक आसानी से पहुंचकर ऑपरेशन किया जा सकेगा।
अत्यधिक सुरक्षा: यह तकनीक पारंपरिक सर्जरी की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी है।
यह भी पढ़ें-हंगामे के बाद BMHRC सहित 4 और सरकारी नर्सिंग कॉलेजों को मिली मान्यता,अब भी 13 कालेज मान्यता से वंचित
तेजी से बढ़ रही है मांग
एम्स भोपाल के डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन ने कहा कि बीमारियों की जटिलता बढ़ने के साथ ही रोबोटिक सर्जरी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। यह तकनीक भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ साबित होगी। एम्स भोपाल में यह तकनीक शुरुआत में यूरोलॉजी विभाग में उपयोग की जाएगी, लेकिन आगे चलकर इसे सीटीवीएस, ऑन्कोलॉजी और अन्य जटिल सर्जरी विभागों में भी लागू किया जाएगा।
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एम्स और एनसीएल के बीच हुआ समझौता
एम्स और एनसीएल के बीच इस परियोजना को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में भाग लिया और कहा कि यह कदम राज्य के नागरिकों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर एम्स के निदेशक डॉ. माधवा नंदकर, एनसीएल के सीएसआर प्रमुख राजीव रंजन, डीन रिसर्च डॉ. रेहान उल हक, उप-चिकित्सा अधीक्षक डॉ. (मेजर) मयंक दीक्षित, यूरोलॉजी विभाग के डॉ. देवाशीष कौशल और डॉ. केतन मेहरा, सीटीवीएस विभाग से डॉ. विक्रम बट्टी भी मौजूद रहे।
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रोबोटिक सर्जरी के युग में कदम रखेगा एम्स भोपाल
एम्स के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, यूरोलॉजी विभाग में सबसे पहले यह अत्याधुनिक रोबोटिक सिस्टम स्थापित किया जाएगा। डॉ. केतन मेहरा, जो ऑस्ट्रिया से रोबोटिक सर्जरी का विशेष प्रशिक्षण लेकर लौटे हैं, इसकी शुरुआत करेंगे। इस तकनीक की मदद से प्रोस्टेट कैंसर, किडनी कैंसर और पेशाब की थैली के कैंसर जैसे जटिल ऑपरेशन अब और अधिक सटीकता और कम जटिलता के साथ किए जा सकेंगे।
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तीन भागों में बंटा सिस्टम
1. कंसोल सिस्टम: डॉक्टर यहीं से सर्जरी के कमांड देंगे।
2. दो रोबोटिक आर्म्स: ऑपरेशन थिएटर में ये आर्म्स डॉक्टर के निर्देशों पर काम करेंगे।
3. मोबाइल यूनिट: यह यूनिट कहीं भी ले जाई जा सकती है। खास बात यह है कि इस तकनीक से विदेश में मौजूद किसी मरीज की सर्जरी भोपाल से भी संभव होगी।
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तकनीक की खासियतें
10 गुना अधिक संवेदनशील कैमरा: हाई-डेफिनिशन थ्रीडी इमेजिंग से डॉक्टर शरीर के बारीक हिस्सों को भी देख सकते हैं।
छोटे चीरे में सर्जरी: मरीज को बड़े कट की जरूरत नहीं होगी, जिससे खून कम बहेगा और रिकवरी तेज होगी।
बेहतर सटीकता: जटिल स्थानों तक आसानी से पहुंचकर ऑपरेशन किया जा सकेगा।
अत्यधिक सुरक्षा: यह तकनीक पारंपरिक सर्जरी की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी है।
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तेजी से बढ़ रही है मांग
एम्स भोपाल के डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन ने कहा कि बीमारियों की जटिलता बढ़ने के साथ ही रोबोटिक सर्जरी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। यह तकनीक भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ साबित होगी। एम्स भोपाल में यह तकनीक शुरुआत में यूरोलॉजी विभाग में उपयोग की जाएगी, लेकिन आगे चलकर इसे सीटीवीएस, ऑन्कोलॉजी और अन्य जटिल सर्जरी विभागों में भी लागू किया जाएगा।
