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मध्यप्रदेश: एमपी में सरकारी भवन अब ग्रीन टेक्नोलॉजी से बनेंगे, सीमेंट के बिना सड़क बनाने पर भी होगा काम
Tue, 15 Sep 2026 04:05 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 15 Sep 2026 04:05 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में अधोसंरचना निर्माण को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार अब सरकारी भवनों में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक और सीमेंट के बिना कंक्रीट सड़क बनाने की तकनीक को बढ़ावा देगी।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार अधोसंरचना विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। देश और प्रदेश में बनी खूबसूरत इमारतों और ऐतिहासिक संरचनाओं में इंजीनियरों की कला, सोच और कौशल दिखाई देता है। आज तकनीक के साथ नवाचार को जोड़कर अधोसंरचना विकास को नई दिशा देने की जरूरत है। मुख्यमंत्री मंगलवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय अभियंता दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान सीएसआईआर-एम्प्री भोपाल और मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के बीच अधोसंरचना निर्माण के लिए एमओयू हुआ। इसके तहत फ्लायऐश आधारित सीमेंट से सड़क निर्माण की दिशा में काम किया जाएगा। इसे अपनी तरह का पहला प्रयोग बताया गया।
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इंजीनियर में इंजन जैसी ऊर्जा जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इंजीनियर शब्द में ही ‘इंजन’ का आभास होता है। इंजन का अर्थ है पूरी ताकत और क्षमता के साथ संचालन करना। इसी तरह इंजीनियर अपनी प्रतिभा, अनुभव और तकनीकी ज्ञान से विकास को गति देते हैं। उन्होंने महान अभियंता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को याद करते हुए कहा कि 19वीं और 20वीं शताब्दी के दौरान देश की कई प्रतिभाओं ने विकास की नई राह बनाई। विश्वेश्वरैया ने इंजीनियरिंग की शिक्षा के साथ शानदार कार्य किया और कई महत्वपूर्ण संरचनाएं तैयार कीं। उनकी हर रचना उनकी सोच और दूरदृष्टि को दर्शाती है।
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हजारों साल पुरानी संरचनाओं में भी इंजीनियरिंग
डॉ. यादव ने कहा कि भारत की प्राचीन संरचनाएं आज भी कला और कौशल की मिसाल हैं। अजंता-एलोरा का कैलाश मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर और देश की अन्य ऐतिहासिक रचनाएं इसकी गवाही देती हैं। उन्होंने कहा कि इन संरचनाओं में महान विभूतियों की कला साधना और तकनीकी समझ दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक ताकत के रूप में उभरा है और शासन के विभाग भी आत्मविश्वास के साथ अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। प्रधानमंत्री का 17 सितंबर को जन्मदिन है। मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के काम की सराहना करते हुए कहा कि विभाग तकनीक के साथ नवाचार कर रहा है। विभाग द्वारा अपने स्तर पर फंड जुटाकर अधोसंरचना तैयार करना बड़ी बात है। सीएसआईआर-एम्प्री और लोक निर्माण विभाग के बीच हुआ एमओयू अधोसंरचना विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार नवाचारी विचारों और कार्यों को आगे बढ़ाने में हमेशा सहयोग करेगी।
‘समस्या का समाधान निकालना ही इंजीनियरिंग’
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश के सभी विभाग विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश की विकास की तस्वीर बदलने में लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों की टीम का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि इंजीनियरिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान निकालने की क्षमता है। इंजीनियरों के लिए खोजी स्वभाव, अनुभव और परफेक्शन महत्वपूर्ण हैं। उनके विचारों पर मंथन से ही नए नवाचार निकलते हैं। राकेश सिंह ने कहा कि पिछले नौ महीने में प्रदेश के करीब 85 प्रतिशत इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया गया है। मुख्यमंत्री ने भोपाल में इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए संस्थान शुरू करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-एम्प्री के साथ हुए एमओयू से सीमेंट के बिना कांक्रीट सड़क बनाने की तकनीक पर भी काम होगा। प्रदेश में बनने वाले सरकारी भवनों को ग्रीन बिल्डिंग तकनीक के अनुरूप तैयार किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग के नवाचारों को देश के कई राज्यों ने अपनाया है। उन्होंने कहा, “गुणवत्ता हमारी पहचान है, नवाचार हमारी शक्ति है, तकनीक हमारा भविष्य है और विकसित मध्यप्रदेश हमारा संकल्प है।” उन्होंने बताया कि एमपीआरडीसी अगले एक साल में करीब दो लाख करोड़ रुपये लागत के कार्य करेगा।
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सड़कों से बाजार और रोजगार तक पहुंच
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कहा कि विभाग ने लोक कल्याण के लिए नवाचारों को अपने काम से जोड़ा है। सड़कें किसानों को बाजार, युवाओं को स्कूल और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि एमपीआरडीसी करीब 30 हजार करोड़ रुपये लागत के कार्य पूरे कर चुका है। सड़क निर्माण में रोड सेफ्टी और आधुनिक तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों की सलाह ली जा रही है। पिछले नौ महीने में ब्लैक स्पॉट के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में तुलनात्मक कमी आई है।
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उत्कृष्ट काम करने वाले इंजीनियर सम्मानित
कार्यक्रम में ईश्वर सिंह चंदेली, मानवेंद्र सिंह सेंगर, मनीष कुमार शर्मा, अर्चित लाहौटी, अमन अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, नितिन बरसैया, राजेश दायमा, शशांक शर्मा, हर्षिता वार्ष्णेय, दीपक नामदेव, साहित्य तिवारी, अनिल श्रीवास्तव, पुष्कल प्रताप, मोहन किशोर, महेंद्र डोलिया, शिवेंद्र सिंह, रामसिंह रघुवंशी और आशीष मंडल का सम्मान किया गया।सेवानिवृत्त लोक निर्माण विभाग सचिव सतीश चंद्र पांडे और सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता जीएस पल्नितकर को भी विशेष सम्मान दिया गया।
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इंजीनियर में इंजन जैसी ऊर्जा जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इंजीनियर शब्द में ही ‘इंजन’ का आभास होता है। इंजन का अर्थ है पूरी ताकत और क्षमता के साथ संचालन करना। इसी तरह इंजीनियर अपनी प्रतिभा, अनुभव और तकनीकी ज्ञान से विकास को गति देते हैं। उन्होंने महान अभियंता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को याद करते हुए कहा कि 19वीं और 20वीं शताब्दी के दौरान देश की कई प्रतिभाओं ने विकास की नई राह बनाई। विश्वेश्वरैया ने इंजीनियरिंग की शिक्षा के साथ शानदार कार्य किया और कई महत्वपूर्ण संरचनाएं तैयार कीं। उनकी हर रचना उनकी सोच और दूरदृष्टि को दर्शाती है।
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हजारों साल पुरानी संरचनाओं में भी इंजीनियरिंग
डॉ. यादव ने कहा कि भारत की प्राचीन संरचनाएं आज भी कला और कौशल की मिसाल हैं। अजंता-एलोरा का कैलाश मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर और देश की अन्य ऐतिहासिक रचनाएं इसकी गवाही देती हैं। उन्होंने कहा कि इन संरचनाओं में महान विभूतियों की कला साधना और तकनीकी समझ दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक ताकत के रूप में उभरा है और शासन के विभाग भी आत्मविश्वास के साथ अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। प्रधानमंत्री का 17 सितंबर को जन्मदिन है। मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के काम की सराहना करते हुए कहा कि विभाग तकनीक के साथ नवाचार कर रहा है। विभाग द्वारा अपने स्तर पर फंड जुटाकर अधोसंरचना तैयार करना बड़ी बात है। सीएसआईआर-एम्प्री और लोक निर्माण विभाग के बीच हुआ एमओयू अधोसंरचना विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार नवाचारी विचारों और कार्यों को आगे बढ़ाने में हमेशा सहयोग करेगी।
‘समस्या का समाधान निकालना ही इंजीनियरिंग’
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश के सभी विभाग विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश की विकास की तस्वीर बदलने में लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों की टीम का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि इंजीनियरिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान निकालने की क्षमता है। इंजीनियरों के लिए खोजी स्वभाव, अनुभव और परफेक्शन महत्वपूर्ण हैं। उनके विचारों पर मंथन से ही नए नवाचार निकलते हैं। राकेश सिंह ने कहा कि पिछले नौ महीने में प्रदेश के करीब 85 प्रतिशत इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया गया है। मुख्यमंत्री ने भोपाल में इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए संस्थान शुरू करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-एम्प्री के साथ हुए एमओयू से सीमेंट के बिना कांक्रीट सड़क बनाने की तकनीक पर भी काम होगा। प्रदेश में बनने वाले सरकारी भवनों को ग्रीन बिल्डिंग तकनीक के अनुरूप तैयार किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग के नवाचारों को देश के कई राज्यों ने अपनाया है। उन्होंने कहा, “गुणवत्ता हमारी पहचान है, नवाचार हमारी शक्ति है, तकनीक हमारा भविष्य है और विकसित मध्यप्रदेश हमारा संकल्प है।” उन्होंने बताया कि एमपीआरडीसी अगले एक साल में करीब दो लाख करोड़ रुपये लागत के कार्य करेगा।
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सड़कों से बाजार और रोजगार तक पहुंच
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कहा कि विभाग ने लोक कल्याण के लिए नवाचारों को अपने काम से जोड़ा है। सड़कें किसानों को बाजार, युवाओं को स्कूल और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि एमपीआरडीसी करीब 30 हजार करोड़ रुपये लागत के कार्य पूरे कर चुका है। सड़क निर्माण में रोड सेफ्टी और आधुनिक तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों की सलाह ली जा रही है। पिछले नौ महीने में ब्लैक स्पॉट के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में तुलनात्मक कमी आई है।
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उत्कृष्ट काम करने वाले इंजीनियर सम्मानित
कार्यक्रम में ईश्वर सिंह चंदेली, मानवेंद्र सिंह सेंगर, मनीष कुमार शर्मा, अर्चित लाहौटी, अमन अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, नितिन बरसैया, राजेश दायमा, शशांक शर्मा, हर्षिता वार्ष्णेय, दीपक नामदेव, साहित्य तिवारी, अनिल श्रीवास्तव, पुष्कल प्रताप, मोहन किशोर, महेंद्र डोलिया, शिवेंद्र सिंह, रामसिंह रघुवंशी और आशीष मंडल का सम्मान किया गया।सेवानिवृत्त लोक निर्माण विभाग सचिव सतीश चंद्र पांडे और सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता जीएस पल्नितकर को भी विशेष सम्मान दिया गया।
