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मध्यप्रदेश: यूनेस्को की नजर में आया MP; बाघ गुफा से उदयगिरि तक 4 धरोहरें शामिल, अब 19 स्थल टेंटेटिव लिस्ट में
Tue, 29 Sep 2026 12:55 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 29 Sep 2026 12:55 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के चार और ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में जगह मिली है। बाघ गुफाएं, गिन्नौरगढ़ किला, बटेश्वर-पदावली-ककरामठ और उदयगिरि के शामिल होने से सूची में प्रदेश के 19 स्थल हो गए हैं।
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बाघ गुफाओं में दिखती है प्राचीन चित्रकला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और पहचान मिली है। यूनेस्को की विश्व धरोहर की टेंटेटिव (अस्थायी) सूची में प्रदेश के चार नए स्थलों को शामिल किया गया है। इनमें धार की बाघ गुफा चित्रकारी, रातापानी का गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना का बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह और विदिशा की उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं। इन चार स्थलों के जुड़ने के बाद यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में मध्यप्रदेश के स्थलों की संख्या 19 हो गई है। टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना किसी स्थल के विश्व धरोहर सूची में शामिल होने की प्रक्रिया का शुरुआती चरण है। इसके बाद संबंधित स्थलों का मूल्यांकन और अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने पर उन्हें विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चारों स्थलों के टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होने पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इससे मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान मिलने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास करने की बात कही।
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पहले से 15 स्थल सूची में शामिल
मध्यप्रदेश के 15 ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल पहले ही यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हैं। इनमें ग्वालियर किला, भोजेश्वर महादेव मंदिर, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, खूनी भंडारा, रामनगर के गोंड स्मारक, धामनार समूह, भेड़ाघाट-लामेताघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, ओरछा का ऐतिहासिक समूह और मांडू के स्मारक सहित अन्य स्थल शामिल हैं।
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बाघ गुफाओं में दिखती है प्राचीन चित्रकला
धार की बाघ गुफाएं चौथी से छठी शताब्दी के बीच विकसित हुईं नौ बौद्ध शैल गुफाओं का समूह हैं। यहां की गुफा संख्या चार के भित्तिचित्र विशेष महत्व रखते हैं। इन चित्रों में उस दौर के सामाजिक जीवन और संस्कृति की झलक मिलती है।
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गिन्नौरगढ़ में किलेबंदी और जल प्रबंधन
रातापानी क्षेत्र में स्थित गिन्नौरगढ़ किला गोंड स्थापत्य और पारंपरिक जल प्रबंधन का उदाहरण है। पहाड़ी इलाके में बनी इसकी प्राकृतिक सुरक्षा, किलेबंदी और बावड़ियां इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।
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मुरैना के मंदिरों में दिखती है स्थापत्य कला
मुरैना का बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह आठवीं से 11वीं शताब्दी के बीच विकसित मंदिर स्थापत्य की अलग-अलग विशेषताओं को सामने लाता है। बटेश्वर के मंदिर समूह, पदावली की नक्काशी और ककरामठ की स्थापत्य शैली इसे ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।
उदयगिरि में गुप्तकाल की छाप
विदिशा की उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र रही हैं। यहां 20 शैल-कृत गुफाएं हैं। इनमें प्रसिद्ध वराह प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है।
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पहले से 15 स्थल सूची में शामिल
मध्यप्रदेश के 15 ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल पहले ही यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हैं। इनमें ग्वालियर किला, भोजेश्वर महादेव मंदिर, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, खूनी भंडारा, रामनगर के गोंड स्मारक, धामनार समूह, भेड़ाघाट-लामेताघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, ओरछा का ऐतिहासिक समूह और मांडू के स्मारक सहित अन्य स्थल शामिल हैं।
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बाघ गुफाओं में दिखती है प्राचीन चित्रकला
धार की बाघ गुफाएं चौथी से छठी शताब्दी के बीच विकसित हुईं नौ बौद्ध शैल गुफाओं का समूह हैं। यहां की गुफा संख्या चार के भित्तिचित्र विशेष महत्व रखते हैं। इन चित्रों में उस दौर के सामाजिक जीवन और संस्कृति की झलक मिलती है।
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गिन्नौरगढ़ में किलेबंदी और जल प्रबंधन
रातापानी क्षेत्र में स्थित गिन्नौरगढ़ किला गोंड स्थापत्य और पारंपरिक जल प्रबंधन का उदाहरण है। पहाड़ी इलाके में बनी इसकी प्राकृतिक सुरक्षा, किलेबंदी और बावड़ियां इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।
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मुरैना के मंदिरों में दिखती है स्थापत्य कला
मुरैना का बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह आठवीं से 11वीं शताब्दी के बीच विकसित मंदिर स्थापत्य की अलग-अलग विशेषताओं को सामने लाता है। बटेश्वर के मंदिर समूह, पदावली की नक्काशी और ककरामठ की स्थापत्य शैली इसे ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।
उदयगिरि में गुप्तकाल की छाप
विदिशा की उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र रही हैं। यहां 20 शैल-कृत गुफाएं हैं। इनमें प्रसिद्ध वराह प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है।
